ऑस्ट्रेलिया के प्रसिद्ध थिंक टैंक लोवी इंस्टीट्यूट ने सालाना एशिया पावर इंडेक्स 2025 जारी किया है। इस रैंकिंग में एशिया के देशों की सैन्य क्षमता, आर्थिक स्थिति, कूटनीतिक प्रभाव, सांस्कृतिक प्रभाव, लचीलापन और भविष्य के संसाधनों के आधार पर उनकी ताकत का मूल्यांकन किया जाता है। इस बार भारत को “मेजर पावर” का दर्जा दिया गया है और इसके प्रभाव में पिछले वर्षों की तुलना में लगातार वृद्धि देखी गई है।

इंडेक्स में अमेरिका अब भी शीर्ष पर है, लेकिन उसके स्कोर में पिछले सालों के मुकाबले काफी गिरावट आई है। ट्रंप प्रशासन की नीतियों और उनकी वैश्विक रणनीति ने एशिया में अमेरिका की प्रभावशीलता को कमजोर किया है। इसके विपरीत, चीन ने अमेरिका के साथ अपने गैप को कम कर दिया है और अपने सैन्य और आर्थिक प्रभाव में लगातार सुधार किया है।
भारत की नई शक्ति और वैश्विक प्रभाव
एशिया पावर इंडेक्स के अनुसार, भारत ने 40 अंकों के साथ “मेजर पावर” के दर्जे को पार किया है। इंडेक्स में कहा गया है कि भारत की बढ़ती ताकत उसके सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ देश की आंतरिक स्थिरता और संसाधनों के विकास से जुड़ी हुई है। भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने डिफेंस नेटवर्क, आर्थिक साझेदारियों और क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों को मजबूती दी है, जिससे उसकी प्रभावशीलता और विश्व स्तर पर मान्यता बढ़ी है।
भारत ने अपने पड़ोसी देशों और एशिया के बड़े खिलाड़ियों के साथ रणनीतिक सहयोग को सुदृढ़ किया है। इसके साथ ही भारत की तकनीकी और आर्थिक ताकत भी बढ़ रही है, जिससे वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिडिल पावर से मेजर पावर की स्थिति में पहुंच गया है। हालांकि डिप्लोमेसी और आर्थिक रिश्तों के माध्यम से भारत का असर बढ़ा है, पर यह अभी भी उसके बढ़ते संसाधनों के अनुपात में पूरी तरह से नहीं है।
अमेरिका और चीन की स्थिति
एशिया पावर इंडेक्स में अमेरिका और चीन को “सुपर पावर” श्रेणी में रखा गया है। अमेरिका का स्कोर 80.5 अंक है, जो इसे एशिया में सबसे असरदार देश बनाता है। हालांकि, यह अपने ऐतिहासिक स्तर से काफी कम है और ट्रंप प्रशासन की गलत नीतियों के कारण एशिया में उसकी पकड़ कमजोर हुई है। चीन ने 73.7 अंकों के साथ अमेरिका के प्रभाव को चुनौती दी है और एशियाई क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत की है।
रूस और जापान की बढ़ती ताकत
रूस ने पिछले कुछ वर्षों में एशिया में अपनी ताकत को फिर से मजबूत किया है। यूक्रेन विवाद के बाद लगे प्रतिबंधों का सामना करने की उसकी क्षमता और चीन तथा उत्तर कोरिया के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी ने इसे पांचवीं सबसे असरदार ताकत बना दिया है। रूस का स्कोर 32.1 अंक है और यह मिडिल पावर श्रेणी में आता है। जापान ने भी अपने सैन्य और आर्थिक सुधारों के साथ 38.8 अंकों के साथ मिडिल पावर की स्थिति को सुदृढ़ किया है।
अन्य एशियाई देश
एशिया पावर इंडेक्स में ऑस्ट्रेलिया 31.8 अंक, दक्षिण कोरिया 31.5 अंक, सिंगापुर 26.8 अंक, इंडोनेशिया 22.5 अंक और मलेशिया 20.6 अंक के साथ मिडिल पावर की श्रेणी में हैं। पाकिस्तान शीर्ष 10 देशों में शामिल नहीं है और इसे 16वां स्थान मिला है। इंडेक्स के अनुसार, इन देशों की शक्ति सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक मापदंडों के आधार पर मूल्यांकित की जाती है।
एशिया पावर इंडेक्स का महत्व
एशिया पावर इंडेक्स 2025 आठ मुख्य मानकों के आधार पर देशों की ताकत को आंकता है। इनमें सैन्य क्षमता, आर्थिक शक्ति, कूटनीतिक और सांस्कृतिक प्रभाव, संसाधनों की उपलब्धता, तकनीकी विकास, लचीलापन, भविष्य की योजना और रणनीतिक साझेदारी शामिल हैं। यह इंडेक्स नीति निर्माताओं, विश्लेषकों और शोधकर्ताओं को एशियाई क्षेत्र में शक्ति संतुलन और वैश्विक रणनीति की समझ देता है।
भारत की स्थिति में यह वृद्धि संकेत देती है कि आने वाले वर्षों में देश की वैश्विक भूमिका और क्षेत्रीय महत्व लगातार बढ़ता रहेगा। अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा के बीच भारत ने खुद को मिडिल पावर से मेजर पावर के स्तर पर स्थापित कर दिया है, जो देश की विदेश नीति और रक्षा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत है।
