T20 विश्व कप 2026 से ठीक पहले ऑस्ट्रेलिया की टीम चयन प्रक्रिया ने क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। यह सिर्फ कुछ खिलाड़ियों के बाहर या अंदर होने की खबर नहीं है, बल्कि यह उस सोच को दर्शाती है, जिसके तहत ऑस्ट्रेलिया आने वाले वैश्विक टूर्नामेंट में उतरने जा रहा है। पैट कमिंस का बाहर होना, मैथ्यू शॉर्ट का ड्रॉप होना, मैट रेनशॉ की एंट्री और स्टीव स्मिथ को नजरअंदाज किया जाना, ये सभी फैसले मिलकर टीम की प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हैं।

ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम, जो वर्षों से विश्व क्रिकेट में आक्रामकता और संतुलन का प्रतीक रही है, उसने इस बार चोट, फॉर्म और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बेहद व्यावहारिक निर्णय लिए हैं।
पैट कमिंस का बाहर होना: चोट से बड़ा कोई नाम नहीं
पैट कमिंस ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट के सबसे अहम स्तंभों में से एक रहे हैं। तेज गेंदबाज़ी आक्रमण की रीढ़ माने जाने वाले कमिंस का T20 विश्व कप से बाहर होना किसी बड़े झटके से कम नहीं है। उनकी पीठ की चोट, जिसे मेडिकल भाषा में लम्बर स्ट्रेस इंजरी कहा गया है, लंबे समय से उनके करियर के साथ जुड़ी हुई है।
दिसंबर 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ एडिलेड टेस्ट के बाद से कमिंस ने कोई प्रतिस्पर्धी मैच नहीं खेला है। यह मैच जुलाई के बाद उनका एकमात्र मुकाबला था, जब उन्हें पहली बार पीठ के निचले हिस्से में दर्द और तनाव की समस्या महसूस हुई थी। उस समय से ही उनका वर्कलोड बेहद सावधानी से मैनेज किया जा रहा था।
संभावित टीम से अंतिम टीम तक का सफर
शुरुआत में कमिंस को ऑस्ट्रेलिया की संभावित 15 सदस्यीय टीम में इस उम्मीद के साथ शामिल किया गया था कि वे शुरुआती राउंड तक अपनी फिटनेस हासिल कर लेंगे। ऐशेज सीरीज़ पर कब्ज़ा जमाने के बाद, उन्हें खास तौर पर आराम दिया गया ताकि वे T20 विश्व कप के लिए पूरी तरह तैयार हो सकें।
जनवरी में कराए गए ताज़ा स्कैन रिपोर्ट्स सकारात्मक थीं और संकेत मिले थे कि रिकवरी सही दिशा में जा रही है। इसके बावजूद, क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का मानना रहा कि कमिंस को पूरी तरह फिट होने के लिए और समय चाहिए। इसी वजह से अंतिम टीम में उन्हें शामिल न करने का कठिन फैसला लिया गया।
IPL पर नजर, विश्व कप से समझौता
सूत्रों के अनुसार, कमिंस के IPL तक पूरी तरह फिट होने की संभावना जताई गई है। इसका मतलब साफ है कि ऑस्ट्रेलिया ने अल्पकालिक जोखिम लेने के बजाय दीर्घकालिक करियर को प्राथमिकता दी है। T20 विश्व कप जैसे बड़े मंच से बाहर रहना किसी भी खिलाड़ी के लिए निराशाजनक होता है, लेकिन चोट के साथ उतरना करियर के लिए और भी खतरनाक हो सकता है।
यह फैसला यह भी दिखाता है कि ऑस्ट्रेलिया अब अपने खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर ज्यादा सतर्क हो चुका है।
बेन ड्वारश्विस को मौका: भरोसेमंद विकल्प
कमिंस की जगह अंतिम 15 में बेन ड्वारश्विस को शामिल किया गया है। वह बाएं हाथ के तेज गेंदबाज़ हैं और अपनी स्विंग गेंदबाज़ी, विविधताओं और फील्डिंग के लिए जाने जाते हैं। निचले क्रम में तेजी से रन बनाने की उनकी क्षमता भी टीम के लिए अतिरिक्त बोनस मानी जा रही है।
टीम प्रबंधन को भरोसा है कि उनकी रफ्तार, गेंद को मूव कराने की कला और चतुर बदलाव उन परिस्थितियों के अनुकूल होंगे, जिनकी उम्मीद ऑस्ट्रेलिया को श्रीलंका और अन्य वेन्यू पर है।
मैथ्यू शॉर्ट का बाहर होना: फॉर्म और संतुलन का सवाल
मैथ्यू शॉर्ट को टीम से बाहर करने का फैसला भी आसान नहीं था। लेकिन हालिया फॉर्म और टीम संयोजन की जरूरतों को देखते हुए चयनकर्ताओं ने यह कदम उठाया। ऑस्ट्रेलिया को मध्य ओवरों में स्पिन को बेहतर तरीके से खेलने वाला एक बाएं हाथ का बल्लेबाज़ चाहिए था, जो गेम को संतुलित रख सके।
शॉर्ट की हालिया पारियां इस जरूरत को पूरी तरह पूरा नहीं कर पा रही थीं, जिसके चलते टीम प्रबंधन ने बदलाव का फैसला किया।
मैट रेनशॉ की एंट्री: निरंतरता का इनाम
मैट रेनशॉ का चयन इस बात का प्रमाण है कि घरेलू क्रिकेट और बिग बैश लीग में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वालों को आखिरकार मौका मिलता है। रेनशॉ ने हाल ही में पाकिस्तान के खिलाफ अपना T20I डेब्यू किया था और उससे पहले भी सफेद गेंद के क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है।
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया, क्वींसलैंड बुल्स और ब्रिस्बेन हीट के लिए अलग-अलग भूमिकाओं में खुद को साबित किया है। पिछले साल भारत के खिलाफ अपने वनडे डेब्यू में भी उन्होंने खास तौर पर स्पिन गेंदबाज़ों के सामने धैर्य और तकनीक का शानदार उदाहरण पेश किया था।
स्पिन के खिलाफ मजबूती बनी चयन का आधार
श्रीलंका में होने वाले पूल मैचों के दौरान स्पिन के अनुकूल परिस्थितियों की संभावना को ध्यान में रखते हुए रेनशॉ को मिडिल ऑर्डर में अतिरिक्त मजबूती देने वाला खिलाड़ी माना गया है। टॉप ऑर्डर पहले से ही सेट है, ऐसे में मध्यक्रम में स्थिरता और लचीलापन टीम के लिए बेहद जरूरी था।
इसके अलावा, एक बाएं हाथ के बल्लेबाज़ के रूप में रेनशॉ विरोधी गेंदबाज़ों के लिए अलग चुनौती पेश करते हैं।
स्टीव स्मिथ को बाहर रखना: सबसे चौंकाने वाला फैसला
शायद सबसे ज्यादा चर्चा का विषय स्टीव स्मिथ का T20 विश्व कप टीम से बाहर रहना रहा। बिग बैश लीग में उनके शानदार फॉर्म के बाद कई पूर्व खिलाड़ी और प्रशंसक उनकी वापसी की मांग कर रहे थे। लेकिन चयनकर्ताओं की सोच अलग थी।
स्मिथ को मुख्य रूप से एक गैर-गेंदबाज़ी सलामी बल्लेबाज़ के रूप में देखा जाता है। ऑस्ट्रेलिया के पास पहले से ही कप्तान मिचेल मार्श और उप-कप्तान ट्रैविस हेड की मजबूत ओपनिंग जोड़ी है। इसके अलावा कैमरन ग्रीन और ग्लेन मैक्सवेल भी जरूरत पड़ने पर पारी की शुरुआत कर चुके हैं।
ओपनिंग में विकल्पों की भरमार
ग्लेन मैक्सवेल ने 2016 में पल्लेकेले में ओपनिंग करते हुए T20I शतक लगाया था। यही मैदान इस विश्व कप के ग्रुप स्टेज में श्रीलंका के खिलाफ मुकाबले की मेजबानी करेगा। पिछले साल कैरेबियन में भी मैक्सवेल ने ओपनिंग की थी, जब पावरप्ले में स्पिन के जरिए ऑस्ट्रेलिया पर दबाव बनाया गया था।
इन तमाम विकल्पों के रहते, स्मिथ के लिए टीम में जगह बनाना मुश्किल हो गया।
विकेटकीपिंग की दिलचस्प स्थिति
15 सदस्यीय टीम में जॉश इंगलिस एकमात्र विशेषज्ञ विकेटकीपर हैं। हालांकि ग्लेन मैक्सवेल को नाममात्र का रिजर्व विकेटकीपर माना जा रहा है, बावजूद इसके कि उन्होंने कभी किसी पेशेवर मैच में विकेटकीपिंग नहीं की है।
टीम के साथ कोचिंग स्टाफ के हिस्से के रूप में पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज़ मैथ्यू वेड भी मौजूद रहेंगे। भले ही उन्होंने 2024 विश्व कप के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया था, लेकिन आपात स्थिति में उनके खेलने की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं गया है।
अनुभव और भविष्य का संतुलन
ऑस्ट्रेलिया की यह टीम अनुभव और युवा जोश का संतुलित मिश्रण है। मिचेल मार्श की कप्तानी में टीम आक्रामक क्रिकेट खेलने की मानसिकता के साथ उतरेगी। ट्रैविस हेड, मैक्सवेल, स्टॉयनिस और डेविड जैसे खिलाड़ी किसी भी मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं।
गेंदबाज़ी में हेज़लवुड, ज़ैम्पा और कुनमन जैसे खिलाड़ी परिस्थितियों के अनुसार अहम भूमिका निभा सकते हैं।
पूरा दल और आगे की राह
T20 विश्व कप 2026 के लिए चुनी गई यह टीम यह संकेत देती है कि ऑस्ट्रेलिया अब नामों से ज्यादा भूमिकाओं और परिस्थितियों पर भरोसा कर रहा है। हर खिलाड़ी को एक स्पष्ट जिम्मेदारी के साथ चुना गया है।
कमिंस और स्मिथ जैसे बड़े नामों का बाहर होना यह बताता है कि चयन प्रक्रिया में भावनाओं के बजाय रणनीति को प्राथमिकता दी गई है।
निष्कर्ष: जोखिम भरा लेकिन सोचा-समझा फैसला
T20 विश्व कप 2026 के लिए ऑस्ट्रेलिया का यह चयन साहसिक जरूर है, लेकिन पूरी तरह तार्किक भी। चोटिल खिलाड़ी को आराम देना, फॉर्म में चल रहे बल्लेबाज़ को मौका देना और संतुलन बनाए रखना, ये सभी फैसले टीम को आगे ले जा सकते हैं।
अब असली परीक्षा मैदान पर होगी, जहां यह देखना दिलचस्प रहेगा कि यह नई सोच ऑस्ट्रेलिया को एक और विश्व खिताब के करीब ले जाती है या नहीं।
