बैतूल जिले के बाचा गाँव में जल संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण और प्रेरक कदम उठाया गया है। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद, घोड़ाडोंगरी ने शनिवार को गाँव में नदी के पानी को रोकने और स्थानीय जल स्रोतों को संरक्षित करने के लिए 125 बोरियों से बोरी बांध बनाने का कार्य संपन्न किया। इस प्रयास का उद्देश्य केवल नदी के पानी को रोके रखना ही नहीं, बल्कि भू-जल स्तर को संवर्धित करना और स्थानीय जनता की भागीदारी बढ़ाना भी है।

इस आयोजन में गाँव के कई ग्रामीणों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले वर्षों में बरसात के पानी का अधिकांश भाग नदी और नालों में बहकर चला जाता था, जिससे खेती और पेयजल दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ता था। इसी समस्या का समाधान करने के लिए यह बोरी बांध योजना बनाई गई।
बोरी बांध निर्माण की प्रक्रिया
125 बोरियों का उपयोग कर नदी के किनारे विशेष ढांचे का निर्माण किया गया। प्रत्येक बोरी को मिट्टी और स्थानीय सामग्री से भरकर नदी में व्यवस्थित रूप से रखा गया। यह कार्य न केवल पानी को रोकने में मदद करेगा, बल्कि इसे धीरे-धीरे जमीन में रिसने देगा, जिससे भू-जल स्तर में वृद्धि होगी।
इस परियोजना में गाँव के युवाओं और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखी गई। उन्हें जल संरक्षण की महत्ता और स्थायी विकास के महत्व के बारे में भी बताया गया। कार्य के दौरान गाँववासियों ने साझा किया कि यह पहल उनके जीवन और खेती के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी।
उद्देश्य और दीर्घकालिक लाभ
बोरी बांध का निर्माण केवल अस्थायी समाधान नहीं है। इसका दीर्घकालिक लाभ यह है कि:
- भू-जल स्तर में वृद्धि होगी, जिससे पानी की कमी के समय स्थानीय कुएँ और हैंडपंपों में जल उपलब्ध रहेगा।
- कृषि उत्पादन में सुधार होगा, क्योंकि खेतों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध रहेगा।
- पर्यावरणीय संतुलन में मदद मिलेगी, जिससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह नियंत्रित रहेगा।
- जनसहभागिता और जागरूकता बढ़ेगी, जिससे ग्रामीण समुदाय भविष्य में भी जल संरक्षण के लिए सक्रिय रहेगा।
मप्र जन अभियान परिषद ने बताया कि यह पहल अन्य गाँवों के लिए मॉडल प्रोजेक्ट के रूप में काम करेगी। इससे यह संदेश जाएगा कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयास नहीं, बल्कि सामूहिक प्रयासों से ही सफल हो सकता है।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
बाचा गाँव के वरिष्ठ नागरिक रामसिंह यादव ने कहा, “हमने लंबे समय से देखा कि बरसात का पानी बहकर चला जाता था और हमारे खेतों में पानी की कमी रहती थी। अब इस बोरी बांध से हमें लंबे समय तक पानी मिलेगा और खेतों की सिंचाई में मदद मिलेगी।”
युवा ग्रामीण मोहित वर्मा ने कहा, “हमारे लिए यह सिर्फ एक बाँध नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा है। हमें अपने बच्चों के लिए पानी बचाने की जिम्मेदारी उठानी होगी। इस परियोजना ने हमें यह सिखाया कि छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।”
मप्र जन अभियान परिषद की भूमिका
मप्र जन अभियान परिषद, घोड़ाडोंगरी, ग्रामीण विकास और जल संरक्षण के क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रही है। परिषद ने इस परियोजना के माध्यम से ग्रामीणों को जल स्रोतों की देखभाल और संरक्षण की महत्ता समझाई। परिषद के अधिकारी ने कहा कि इस तरह की पहल से ग्रामीण समुदाय जल संरक्षण के प्रति जागरूक होंगे और अन्य क्षेत्रों में भी इस मॉडल का पालन करेंगे।
इस परियोजना में परिषद ने स्थानीय सामग्री का उपयोग किया, जिससे लागत कम हुई और गाँव के लोगों को परियोजना में शामिल होने का अवसर मिला।
जल संकट के समाधान के लिए सामूहिक प्रयास
आज के समय में जल संकट एक गंभीर समस्या बन चुका है। विशेष रूप से मध्य प्रदेश के कई जिलों में जल स्तर तेजी से गिर रहा है। इस चुनौती का सामना करने के लिए सामूहिक प्रयास, जागरूकता और स्थायी योजनाएँ आवश्यक हैं। बाचा गाँव की यह पहल इस दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
जल संरक्षण केवल नदी को रोकने तक सीमित नहीं है। यह भूमि, पेड़-पौधों, जलस्रोतों और कृषि के लिए आवश्यक जल प्रबंधन को भी प्रभावित करता है। इस पहल के माध्यम से गाँववासियों ने यह समझा कि यदि हर व्यक्ति छोटी-छोटी जिम्मेदारियाँ निभाए, तो बड़े स्तर पर जल संकट को कम किया जा सकता है।
भविष्य की योजनाएँ
मप्र जन अभियान परिषद ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में इस तरह की परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। गाँवों में छोटे बांध, तालाब पुनःनिर्माण, नाले और पानी संचयन के अन्य उपाय किए जाएंगे। इसके अलावा, शिक्षा और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे ताकि ग्रामीण जल संरक्षण के महत्व को समझें और अपने स्तर पर इसे लागू कर सकें।
संभावना है कि बाचा गाँव की यह पहल आसपास के गाँवों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी और मध्य प्रदेश में जल संरक्षण की दिशा में नई शुरुआत होगी।
