कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 20 नवंबर 2025 को दिनदहाड़े हुई एक सनसनीखेज घटना ने पूरे शहर को हिला दिया। एक गिरोह ने आरबीआई अधिकारियों का भेष धारण करके दक्षिण बेंगलुरु में एक बख्तरबंद कैश वैन से 7.11 करोड़ रुपये लूट लिए। यह लूट इतनी तेज़ और कुशलतापूर्वक की गई कि आसपास मौजूद लोग भी चौंक गए।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए शहर को हाई अलर्ट पर रखा है और वाहनों की जांच तेज़ कर दी है। घटना की जगह एक व्यस्त फ्लाईओवर थी, जिससे इस घटना का फिल्मी अंदाज़ और भी ज्यादा नाटकीय लग रहा था।

घटना का क्रम
घटना दोपहर 12:30 बजे से 1 बजे के बीच हुई। सीएमएस इन्फो सिस्टम्स की वैन जेपी नगर स्थित एचडीएफसी बैंक से नकदी लेकर एचबीआर लेआउट जा रही थी। वैन में चालक बिनोद कुमार, कस्टोडियन आफताब और बंदूकधारी राजन्ना व तम्मैया मौजूद थे।
यह लूट योजना बद्ध तरीके से की गई थी। एक हैचबैक मारुति ज़ेन ने वैन को रोका और उसके बाद तीन बदमाश बाहर निकले। पीछे से एक इनोवा और एक एमयूवी वैन का पीछा कर रही थी। बदमाशों ने खुद को आरबीआई अधिकारी बताकर सीएमएस कर्मचारियों को विश्वास दिलाया कि उनकी कंपनी के खिलाफ आरबीआई दिशानिर्देश उल्लंघन के मामले की जांच करनी है।
धोखाधड़ी और बंदूक की धमकी
बदमाशों ने कर्मचारियों को विश्वास में लेने के बाद, सिंगल-बैरल लाइसेंसी बंदूकें लेकर वैन में बैठे और एमयूवी में कैश वैन को नियंत्रित किया। उन्होंने चालक से डेयरी सर्किल फ्लाईओवर तक गाड़ी चलाने को कहा और वहां नकदी को अपने वाहन में डाल लिया। पलक झपकते ही बदमाश घटना स्थल से फरार हो गए।
पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने बताया कि इस घटना के लिए नौ विशेष जांच टीमें बनाई गई हैं। उन्होंने कहा कि सीएमएस से संपर्क में देरी हुई, लेकिन अब पूरे मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है।
अपराधियों की योजना और कार्यकुशलता
इस लूट की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि अपराधियों ने असली आरबीआई अधिकारियों जैसी शिनाख्त कर ली थी। उनकी गाड़ी की लाइसेंस प्लेट नकली थी, जिससे घटना और भी जटिल बन गई। पुलिस ने पता लगाया कि नकली नंबर प्लेट कल्याणनगर के एक व्यक्ति की कार से जुड़ी हुई थी।
अपराधियों ने कर्मचारियों को सीधे पुलिस स्टेशन जाने के लिए कहा और नकदी को अपने वाहन में डालकर फरार हो गए। घटना का यह तरीका दर्शाता है कि अपराधियों ने पहले से पूरी योजना बना रखी थी और यह केवल दिनदहाड़े की डकैती नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध था।
पुलिस की जांच और प्रतिक्रिया
बेंगलुरु पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। दो पुलिस उपायुक्त और एक संयुक्त आयुक्त के नेतृत्व में आठ विशेष टीमों को मामले की जांच में लगाया गया। पुलिस ने बताया कि मामले में किसी सीएमएस कर्मचारी की संलिप्तता नहीं पाई गई।
सीएमएस के वरिष्ठ सुरक्षा सलाहकार नटराज ने कहा कि जांच से अपराधियों तक पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। वहीं, शाखा प्रबंधक विनोद चंद्रार ने देर रात शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब अपराधियों की पहचान और उन्हें गिरफ्तार करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
घटना के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
यह घटना न केवल शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि बेंगलुरु में बैंकों और कैश वैन संचालन पर भी गंभीर असर डालती है। लोगों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अपराध यह दर्शाते हैं कि शहर में साइबर और फिजिकल सिक्योरिटी दोनों पर ध्यान देने की जरूरत है। बैंकिंग और नकदी परिवहन सुरक्षा प्रणाली में सुधार आवश्यक है।
निष्कर्ष
बेंगलुरु की इस फिल्मी स्टाइल की लूट ने दिखाया कि किस तरह संगठित गिरोह आधुनिक तकनीक और धोखाधड़ी का इस्तेमाल करके बड़े पैमाने पर चोरी कर सकते हैं। पुलिस की तेज़ कार्रवाई और जनता की सतर्कता ही ऐसे अपराधों को रोक सकती है।
