भारतीय वित्तीय बाज़ार पिछले कुछ महीनों से कई उतार-चढ़ाव से गुजर रहा था, लेकिन हाल ही में सामने आए ब्याज दरों में बदलाव के फैसले ने निवेशकों के बीच नए उत्साह को जन्म दिया है। ऐसी स्थिति तब पैदा हुई जब मौद्रिक नीति समिति द्वारा रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई और अब रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर आ गया है। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया, जब वैश्विक बाज़ारों से मजबूत संकेत नहीं मिल रहे और विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली की मुद्रा में दिखाई दे रहे थे।

रेपो रेट के कटते ही सबसे पहला असर बैंकिंग क्षेत्र पर दिखा। ब्याज दरों में कमी हमेशा से ऋण मांग में तेजी लाने का कारक मानी जाती है। गृह ऋण, वाहन ऋण, छोटे बिजनेस लोन और इंडस्ट्रियल लोन जैसे क्षेत्रों में मांग बढ़ने की पूरी संभावना है। यही वजह है कि बैंकिंग और एनबीएफसी शेयरों में तेज़ी आते ही मजबूत खरीदारी की लहर दिखाई दी।
कई विशेषज्ञ इस बात पर सहमत हैं कि ब्याज दरों में कमी का फायदा बैंकिंग सेक्टर को तभी मिलेगा, जब यह लोन ऑफटेक और क्रेडिट ग्रोथ में व्यावहारिक रूप से परिवर्तित होगा। हालांकि बड़े संस्थागत बैंक पहले से ही अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर हैं और ऐसे में इनके लिए बड़ी तेजी का रास्ता सीमित दिख रहा है।
बैंक निफ्टी: तेजी के बाद अब करेक्शन या नया ब्रेकआउट?
बीते ट्रेडिंग सत्र में बैंक निफ्टी 489 अंक चढ़कर लगभग 59777 के स्तर पर बंद हुआ। इसके पहले यह इंडेक्स 60000 के ऊपर जाकर नया सर्वकालिक उच्च स्तर बना चुका है। 60 हजार का स्तर भौतिक आंकड़ा कम और मनोवैज्ञानिक स्तर अधिक माना जा रहा है, क्योंकि यह बहु-महीनों की तेजी, निवेशक विश्वास और अंतरराष्ट्रीय संकेतों के बावजूद मार्केट की मजबूती का प्रतीक माना जाता है।
लेकिन ट्रेडिंग चार्ट पर फिलहाल कुछ महत्वपूर्ण संकेत उपस्थित हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि बैंक निफ्टी की अगली चाल दो स्तरों पर निर्भर करेगी। यदि आने वाले दिनों में 59400 का स्तर टूटता है, तो इंडेक्स के 58700 तक गिरने की आशंका बढ़ जाएगी। यह करेक्शन तेज़ी की अगली शुरुआत से पहले ठहराव वाला स्तर साबित हो सकता है। यह भी धारणा है कि जब बाजार लगातार ऊंचाई पर चलता है, तो अगला कदम लेने से पहले साइडवेज़ मूवमेंट या सीमित गिरावट देखी जाती है।
यदि बाजार मजबूत रहता है और बैंक निफ्टी की क्लोजिंग 60000 के ऊपर टिकती है, तब अगला लक्ष्य 61000 तक खुल सकता है। लेकिन यह स्थिति केवल उसी समय बनती है, जब विदेशी संस्थागत निवेशक खरीदार के रूप में बाज़ार में शामिल हों। विदेशी निवेशकों का प्रभाव भारतीय बाजार पर सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
बैंकिंग शेयर पहले ही ऊंचाई पर, नई तेजी कहाँ से आएगी?
यह बात सही है कि प्रमुख लार्ज-कैप बैंक जैसे एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक पिछले महीनों में भारी तेजी दिखा चुके हैं। इन कंपनियों के मूल्य ऐसे स्थानों पर पहुंच चुके हैं, जहां से नए मूल्य स्तर तक पहुंचने के लिए बहुत मजबूत ट्रिगर की आवश्यकता होगी।
जानकार मानते हैं कि अगले चरण की तेजी में इन बड़े बैंकों की बजाय सेकंड-लाइन बैंक या मध्यम आकार के बैंक नेतृत्व कर सकते हैं। दूसरे चरण की उछाल में निम्न श्रेणी के एनबीएफसी स्टॉक, होम लोन आधारित कंपनियां और ऑटो लोन पोर्टफोलियो कंपनियां निवेशकों का ध्यान खींच सकती हैं।
घरेलू संकेत अब भी मजबूत, कमजोरी केवल विदेशी निवेश में
अगर भारतीय बाजार के वर्तमान आधारों को देखा जाए, तो कई आर्थिक संकेत मजबूत दिखते हैं। महंगाई नियंत्रित दायरे में है, आर्थिक विकास दर अन्य देशों की तुलना में अच्छी है, बैंकिंग क्रेडिट ग्रोथ लगातार स्थिर गति में है और कॉरपोरेट परिणामों में सुधार भी दिखाई दिया है। यही कारण था कि विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स नए शिखर तक गए।
हालांकि यह स्थिति हमेशा नहीं रहती। बाजार में हलचल तभी आसानी से जारी रहती है, जब बाहरी निवेशक सहयोग करें। विदेशी निवेशकों द्वारा धन निकालना रुपये में कमजोरी लाता है और बाजार में दबाव पैदा करता है। इसलिए आने वाले महीनों में विदेशी निवेश की भूमिका निर्णायक होगी।
आगे की संभावित स्थिति: नई उछाल या नियंत्रित गिरावट?
मौजूदा स्थिति में बाजार तीन अवस्थाओं में आगे जा सकता है।
पहली, यदि ब्याज कटौती के प्रभाव से लोन की मांग वास्तविक रूप से बढ़ती है, तो बैंकिंग सेक्टर को लाभ मिलेगा और इंडेक्स 61000 से ऊपर स्थिर हो सकता है।
दूसरी, विदेशी निवेशकों का समर्थन नहीं मिलता है, तो बाजार सीमा में रहकर ट्रेड करेगा और 58700 या इसके नीचे भी जा सकता है।
तीसरी, यदि वैश्विक बाजारों से अत्यंत अनुकूल संकेत आएं, तो बैंकिंग इंडेक्स में फिर से नई उछाल आने की संभावना बढ़ जाएगी।
अर्थव्यवस्था पर असर: सस्ता ऋण और उपभोग में वृद्धि
रेपो रेट में कटौती हमेशा वास्तविक उपभोग और आर्थिक चक्र पर प्रत्यक्ष असर डालती है। उपभोक्ता खर्च बढ़ता है, कंपनियां विस्तार योजनाओं की ओर जाती हैं, छोटे व्यवसाय लोन लेने में सक्षम होते हैं और रियल एस्टेट सेक्टर को भी तेजी मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम चरण में यह कटौती संसाधनों के प्रवाह को तेज करेगी और इससे कैपिटल गुड्स, निर्माण सामग्री, वाहन, होम प्रोजेक्ट और औद्योगिक गतिविधियों में हलचल दिखाई दे सकती है।
निष्कर्ष
बैंक निफ्टी एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। यह या तो 60000 के ऊपर रुके और 61000 की तरफ मजबूती दिखाए या 59400 टूटकर 58700 की ओर जाए और फिर अगले चरण का मार्ग तय करे।
बाजार की गति तय करने में घरेलू संकेत अच्छे हैं, लेकिन विदेशी समर्थन की आवश्यकता तथा सेक्टर-आधारित प्रतिभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण होगी।
