राजस्थान के झुंझुनूं जिले के खेतड़ी उपखंड क्षेत्र के बांसियाल गांव में हाल ही में एक अद्भुत पुरातात्विक खोज सामने आई है। यहां पुरातत्व विशेषज्ञों की एक टीम ने 4500 साल पुराने गणेश्वर जोधपुरा सभ्यता के अवशेषों का पता लगाया है। यह खोज क्षेत्र की प्राचीन जीवनशैली, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और सामाजिक संरचना को समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

इस उत्खनन का नेतृत्व महाराष्ट्र के पुणे की एक यूनिवर्सिटी के पुरातत्व विशेषज्ञों ने किया। टीम में डॉ. इशा प्रसाद, कल्याण शेखर चक्रवर्ती, डॉ. श्वेता सिन्हा देशपांडे, और अन्य छात्रों ने भाग लिया। टीम ने लगभग एक माह की खुदाई में गणेश्वर जोधपुरा सभ्यता और हड़प्पा संस्कृति के अवशेषों को खोजा।
खुदाई में मिली वस्तुएं और संरचनाएं
खुदाई के दौरान तांबे से बनी जुलरी, हड्डियों से बने औजार, मिट्टी के बर्तन, और लाइम पाउडर के सहयोग से बनाई गई मकान की दीवारें मिलीं। यह खोज न केवल उस समय की घरेलू वास्तुकला को उजागर करती है बल्कि बस्ती के संगठन और जीवन शैली की नई समझ भी देती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि बस्ती में गोलाकार गड्ढे मिले, जहां कचरे का निस्तारण किया जाता था। इन गड्ढों में हड्डियों और मिट्टी के बर्तनों के अवशेष भी मिले हैं। यह संकेत करता है कि प्राचीन लोग अपने कचरे के प्रबंधन में सावधानी रखते थे।
व्यापार और अंतर-सांस्कृतिक संपर्क
खुदाई में कार्नेलियन पत्थर के मनके भी मिले, जो गुजरात से आए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि इस क्षेत्र के निवासियों का अन्य प्राचीन सभ्यताओं के साथ व्यापारिक संपर्क था। विशेषज्ञों का मानना है कि बांसियाल का यह स्थल प्रारंभिक अंतर-सांस्कृतिक संपर्कों का केंद्र रहा होगा।
उत्खनन प्रक्रिया और अनुसंधान
डॉ. ईशा प्रसाद ने बताया कि यह उत्खनन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और राजस्थान के पुरातत्व विभाग की अनुमति से किया गया है। टीम का कार्य दिसंबर के पहले सप्ताह तक जारी रहने की उम्मीद है। यह परियोजना राजस्थान, हरियाणा और गुजरात के पुरातात्विक स्थलों के संयुक्त अध्ययन का हिस्सा है।
प्राचीन जीवन और तकनीक की झलक
इस खोज ने दिखाया कि प्राचीन लोग टिकाऊ और व्यवस्थित जीवन शैली अपनाते थे। मकानों की दीवारों में इस्तेमाल की गई तकनीक, तांबे और हड्डियों से बने उपकरण, और मिट्टी के बर्तन यह संकेत देते हैं कि उस समय की सभ्यता तकनीकी रूप से उन्नत और व्यवस्थित थी।
निष्कर्ष
बांसियाल गांव में मिली यह खोज न केवल इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, बल्कि प्राचीन भारतीय सभ्यताओं के जीवन और सामाजिक संगठन की गहरी समझ भी देती है। गणेश्वर जोधपुरा सभ्यता और हड़प्पा संस्कृति के अवशेष भविष्य में और अधिक शोध और संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण स्रोत बनेंगे।
