भारत का मौसम एक बार फिर तेजी से बदल रहा है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हो रही नई मौसमी प्रणाली पूरे दक्षिण भारत में भारी बारिश की स्थिति पैदा करने की ओर बढ़ रही है। दूसरी ओर उत्तरी, मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में जबरदस्त ठंड की लहर तेजी से फैल रही है। दिसंबर से पहले ही तापमान में अप्रत्याशित गिरावट ने आम लोगों से लेकर मौसम वैज्ञानिकों तक, सभी को चौकन्ना कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने बुधवार सुबह अपनी रिपोर्ट में चेतावनी देते हुए बताया कि आने वाले दिनों में दक्षिणी राज्यों में भारी से बहुत भारी वर्षा और मध्य-पश्चिम भारत में शीतलहर का गंभीर प्रकोप देखने को मिल सकता है।
इस बदलते मौसम के पीछे बंगाल की खाड़ी का मौसमी ऊथल-पुथल मुख्य कारण बताया जा रहा है। तमिलनाडु के समुद्री तट से लगे समुद्री क्षेत्र में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय हो चुका है, जो धीमी गति से एक डिप डिप्रेशन में परिवर्तित होने के करीब है। मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि आने वाले 24 से 72 घंटों के भीतर यह प्रणाली और भी मजबूत होगी, जिससे दक्षिण भारत के कई जिलों में भारी बारिश के हालात बनेंगे।

बंगाल की खाड़ी में उठता मौसमीय तूफान
भारत के पूर्वी समुद्री क्षेत्र बंगाल की खाड़ी में हर वर्ष सर्दियों की शुरुआत के आसपास हलचल बढ़ती है, जिसे उत्तर-पूर्वी मानसून का मुख्य समय माना जाता है। हालांकि इस वर्ष मानसूनी गतिविधि सामान्य की तुलना में कमज़ोर रही थी। लेकिन अब एक बार फिर समुद्री क्षेत्र सक्रिय हो चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, तमिलनाडु के पास मौजूद ऊपरी वायुदाब क्षेत्र में चक्रवाती परिक्रमा (Cyclonic Circulation) बन गई है, जो लगातार मजबूत होती दिख रही है।
IMD ने चेतावनी देते हुए कहा है कि शनिवार तक यही मौसमी प्रणाली डिप डिप्रेशन के रूप में विकसित हो सकती है। इसके कारण तमिलनाडु, केरल, माहे, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम और रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में बारिश का दौर तेज़ हो जाएगा। कई जगहों पर “भारी से बहुत भारी बारिश” (Heavy to Very Heavy Rainfall) की संभावना जताई गई है।
तमिलनाडु और केरल में लगातार वर्षा की चेतावनी
IMD की ताजा एडवाइजरी के अनुसार,
- 19 से 25 नवंबर के बीच तमिलनाडु में भारी वर्षा का दौर जारी रहेगा।
- 21 से 24 नवंबर के बीच केरल और माहे में भी मौसम खराब रहेगा।
- तटीय आंध्र प्रदेश और यनम में भी समुद्री हवाओं की गति में बढ़ोतरी के साथ बारिश होने की संभावना बनी है।
यह समय उत्तर-पूर्वी मानसून का चरम माना जाता है और आमतौर पर वर्षा की तीव्रता दिसंबर तक बनी रहती है, लेकिन इस बार समुद्री गतिविधि अपेक्षा से अधिक तेज हो रही है।
अंडमान-निकोबार पर भी बारिश का खतरा
दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बन रहे इस डिप डिप्रेशन का असर केवल दक्षिण भारत तक ही सीमित नहीं रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भी भारी बारिश की आशंका है। समुद्री हवाओं की तीव्रता बढ़ने के साथ द्वीप समूह में तेज़ हवाओं व उग्र समुद्री लहरों की चेतावनी भी जारी की गई है।
शीतलहर की चपेट में मध्य और पश्चिम भारत
जब दक्षिण भारत बारिश की चपेट में आता दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर मध्य और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में कड़कड़ाती ठंड ने तेजी पकड़ ली है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और पूर्वी राजस्थान समेत कई क्षेत्रों में शीतलहर तेज़ होती जा रही है।
राजस्थान में गिरा तापमान, सीकर सबसे ठंडा
IMD की रिपोर्ट के अनुसार—
- राजस्थान के सीकर में बुधवार सुबह 5.5°C तापमान दर्ज किया गया, जो इस सीजन का सबसे कम तापमान कहा जा सकता है।
- राजस्थान के कई जिलों में तापमान 6 से 8 डिग्री के बीच बना हुआ है।
मध्य प्रदेश में भीषण शीतलहर
मध्य प्रदेश में कई हिस्सों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
- पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ जिलों में भीषण शीतलहर (Severe Cold Wave) की चेतावनी जारी है।
- अगले 24 घंटों में पूर्वी मध्य प्रदेश और मध्य महाराष्ट्र में भी तापमान तेजी से गिर सकता है।
गुजरात और छत्तीसगढ़ में भी गिरावट
गुजरात के उत्तरी हिस्सों, कच्छ व सौराष्ट्र क्षेत्र और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में पारा सामान्य से 3-5°C तक नीचे आ चुका है।
दिल्ली-NCR में पारा गिरा, लेकिन बड़ी राहत की उम्मीद
पिछले चार दिनों से दिल्ली में तापमान तेजी से गिरा है।
- दिल्ली के प्रमुख मौसम स्टेशन सफदरजंग ने 15 से 18 नवंबर के बीच न्यूनतम तापमान 10°C से नीचे दर्ज किया।
- 17 नवंबर को राजधानी का तापमान 8.7°C पहुंच गया, जो सामान्य से 3.6°C कम था।
हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बढ़ रही गतिविधि के कारण पश्चिमी विक्षोभ की दिशा में बदलाव संभव है, जिससे दिल्ली में ठंड की तीव्रता अगले कुछ दिनों में कुछ कम हो सकती है।
पूर्वी भारत में तापमान अभी भी सामान्य से ऊपर
पूर्वांचल, बिहार और पश्चिम बंगाल में तापमान अभी भी औसत से ऊपर है।
- इन इलाकों में न्यूनतम तापमान 18 से 20°C दर्ज किया जा रहा है।
- अगले दो से तीन दिनों के दौरान तापमान में 2-3°C की वृद्धि की संभावना है।
पूर्वी भारत में ठंड का मुख्य दौर आमतौर पर दिसंबर मध्य से शुरू होता है, इसलिए इन राज्यों में फिलहाल मौसम राहत भरा बना हुआ है।
निष्कर्ष: आने वाले दिनों में मौसम दो चरमों पर
अगले कुछ दिनों में भारत दो अलग-अलग मौसमीय चरमों का अनुभव करेगा—
- दक्षिण भारत में भारी बारिश और समुद्री तूफानों का खतरा
- मध्य और पश्चिमी भारत में जमाने वाली ठंड और शीतलहर
मौसम वैज्ञानिक सलाह दे रहे हैं कि लोग अपडेटेड मौसम चेतावनियों को लेकर सतर्क रहें। तटीय क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर बढ़ने, समुद्र में ऊंची लहरें उठने और पहाड़ी इलाकों में घने कोहरे का खतरा भी बढ़ सकता है।
भारत की विविध जलवायु एक बार फिर अपनी अनिश्चितता साबित कर रही है। आने वाले 5-7 दिन मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
