बैतूल जिले के अस्पताल में 15 नवंबर को प्रसूता समोती बाई (25) की मौत की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पताल प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। समोती बाई ईमलीखेड़ा, घोड़ाडोंगरी तहसील की रहने वाली थीं। उनकी मौत के बाद जिला अस्पताल प्रशासन ने तुरंत जांच के आदेश दिए, लेकिन 12 दिन बीत जाने के बाद भी जांच पूरी नहीं हो पाई।

प्रारंभिक घटना और अस्पताल में उपचार
समोती बाई 15 नवंबर को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती हुई थीं। अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, लेकिन दुर्भाग्यवश उनकी मौत हो गई। परिवार और ग्रामीणों ने इस घटना को गंभीरता से लिया और अस्पताल प्रशासन पर सवाल उठाए कि क्या समुचित देखभाल और समय पर उपचार किया गया या नहीं।
जिला अस्पताल के अधिकारियों ने मृतक की मौत की जांच के लिए विशेष टीम गठित की थी। इस टीम को मृतक के केस की पूरी पड़ताल करने, अस्पताल में उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा करने और जिम्मेदार डॉक्टरों तथा स्टाफ से पूछताछ करने का निर्देश दिया गया था।
जांच टीम में बदलाव और लंबित रिपोर्ट
घटना के 12 दिन बीत जाने के बावजूद जांच पूरी नहीं हो पाई। प्रशासन ने जांच टीम में बदलाव कर दिया, लेकिन नया गठन भी अभी तक किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंचा। इस लंबित जांच ने मरीजों के परिजनों और स्थानीय लोगों के विश्वास को कमजोर किया है।
स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों और परिवार के अनुसार, समोती बाई की मौत के कारणों को स्पष्ट रूप से उजागर करना अत्यंत आवश्यक है। अगर कोई चिकित्सा लापरवाही हुई है, तो इसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
सामाजिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
घोड़ाडोंगरी और ईमलीखेड़ा के ग्रामीण इस मामले को लेकर नाराज हैं। उन्होंने प्रशासन से तेजी से निष्पक्ष जांच करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। इस मामले में महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य प्रणाली की जवाबदेही पर भी सवाल उठाए गए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पताल में भर्ती महिला रोगियों के लिए मानक प्रोटोकॉल और समय पर देखभाल सुनिश्चित करना जरूरी है। अगर यह नहीं होता, तो ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।
