बैतूल जिले में 1 दिसंबर 2025 से रबी मौसम के लिए फसल बीमा सप्ताह का आयोजन शुरू हुआ, जो 7 दिसंबर तक चलेगा। यह पहल किसानों को फसल बीमा के महत्व, लाभ और प्रक्रिया के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से की गई है। जिले के सभी विकासखंडों में इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है ताकि हर किसान तक जानकारी पहुंच सके। उपसंचालक कृषि आनंद कुमार बडोनिया ने इस सप्ताह का शुभारंभ किया और किसानों को फसल बीमा के लाभों और उसकी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया।

फसल बीमा सप्ताह किसानों को यह समझाने का प्रयास करता है कि मौसम, कीट, बीमारी और अन्य प्राकृतिक जोखिमों से फसल को होने वाले नुकसान से बचाव के लिए बीमा कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कृषि विभाग ने जिले के सभी ब्लॉकों में जागरूकता शिविर और विशेष कार्यक्रम आयोजित किए, जहां किसानों को बीमा पॉलिसी लेने के तरीके, प्रीमियम की राशि और क्लेम प्रक्रिया के बारे में बताया गया।
फसल बीमा का महत्व
बैतूल जिले में खेती मुख्य रूप से रबी और खरीफ मौसम पर आधारित है। रबी फसल जैसे गेहूं, चना, सरसों, ज्वार और अन्य अनाज किसानों की आय का मुख्य आधार हैं। मौसम की अनिश्चितता, कीट और रोगों का प्रकोप, या अचानक आने वाले प्राकृतिक आपदाएं किसानों के लिए भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती हैं। ऐसे समय में फसल बीमा किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक मजबूत साधन साबित होता है।
फसल बीमा केवल किसानों को नुकसान की भरपाई प्रदान नहीं करता, बल्कि उन्हें कृषि निवेश के लिए आत्मविश्वास भी देता है। बीमा के माध्यम से किसान जोखिम प्रबंधन कर सकते हैं और बेहतर कृषि तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। इस तरह यह कार्यक्रम किसानों की वित्तीय स्थिरता और कृषि विकास में भी योगदान देता है।
बैतूल जिले में जागरूकता अभियान
फसल बीमा सप्ताह के दौरान जिले में कई गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों में किसानों के लिए कार्यशालाएं, जागरूकता शिविर, समूह चर्चा और केस स्टडी सेशन शामिल हैं। उपसंचालक कृषि आनंद कुमार बडोनिया ने किसानों को व्यक्तिगत रूप से समझाया कि फसल बीमा क्यों आवश्यक है और बीमा कंपनियों से सीधे संपर्क कैसे स्थापित किया जा सकता है।
जिले के विकासखंडों में किसानों को बीमा पॉलिसी की जानकारी देने के लिए विभिन्न मीडिया का उपयोग किया जा रहा है। इसमें स्थानीय रेडियो, मोबाइल एसएमएस, सोशल मीडिया और ग्रामीण पंचायतों की बैठक शामिल हैं। इस प्रकार, जानकारी का प्रसार ग्रामीण क्षेत्रों के हर किसान तक पहुंच रहा है।
बीमा योजनाओं की विस्तृत जानकारी
बैतूल जिले में मुख्य रूप से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और राज्य कृषि बीमा योजना लागू की गई हैं। इन योजनाओं के तहत किसान अपने फसल क्षेत्र के आधार पर बीमा कर सकते हैं। बीमा पॉलिसी में प्राकृतिक आपदाओं, कीट संक्रमण, सूखा और बाढ़ जैसे जोखिम शामिल हैं।
किसानों को बताया गया कि प्रीमियम राशि किस तरह निर्धारित होती है और यह उनकी फसल लागत के अनुरूप किस प्रकार की सुरक्षा प्रदान करती है। इसके अलावा क्लेम प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है। किसान अपनी फसल नुकसान की रिपोर्ट संबंधित अधिकारी को दे सकते हैं और उचित समय में मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।
किसानों की प्रतिक्रिया और उम्मीदें
जिले के किसानों ने इस जागरूकता अभियान को सराहा। उन्होंने कहा कि फसल बीमा के महत्व को समझना और सही जानकारी प्राप्त करना उनके लिए लाभकारी है। इससे वे अपने खेत और फसल को सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक कदम उठा सकते हैं।
किसान यह भी मानते हैं कि अगर अधिक किसानों को इस योजना के लाभों के बारे में जानकारी दी जाएगी, तो क्षेत्र में कृषि उत्पादकता और आर्थिक सुरक्षा दोनों में वृद्धि होगी। जागरूकता अभियान किसानों में आत्मनिर्भरता और वित्तीय समझ बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सरकारी प्रयास और भविष्य की योजनाएं
मध्यप्रदेश सरकार ने जिले में फसल बीमा सप्ताह का आयोजन करके किसानों के लिए वित्तीय सुरक्षा और जागरूकता को बढ़ावा दिया है। कृषि विभाग ने सुनिश्चित किया है कि हर विकासखंड में किसानों को व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन मिले और बीमा पॉलिसी लेने की प्रक्रिया सरल हो।
भविष्य में योजना है कि डिजिटल माध्यमों और मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए किसानों को फसल बीमा से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे किसान अपने खेत की स्थिति, बीमा पॉलिसी और क्लेम प्रक्रिया को घर बैठे मॉनिटर कर सकेंगे।
स्थानीय विकास और कृषि क्षेत्र में प्रभाव
फसल बीमा सप्ताह किसानों की वित्तीय सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ कृषि उत्पादन में सुधार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का प्रयास है। जागरूकता के माध्यम से किसान जोखिम प्रबंधन सीखते हैं, जिससे फसल नुकसान की स्थिति में उन्हें तत्काल राहत मिलती है।
बैतूल जिले में यह पहल अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बनेगी। इससे किसानों की आय स्थिर होगी और उन्हें प्राकृतिक आपदाओं के प्रति तैयार रहने में मदद मिलेगी।
