मध्यप्रदेश की सोलहवीं विधानसभा के सत्र को लेकर राजधानी भोपाल में प्रशासनिक सतर्कता अपने चरम पर पहुंच गई है। सत्र के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था, विरोध प्रदर्शन या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पहले से ही सख्त कदम उठाए हैं। इसी क्रम में भोपाल में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 लागू कर दी गई है। यह आदेश विशेष रूप से विधानसभा भवन के आसपास के क्षेत्रों में प्रभावी रहेगा, जहां कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

धारा 163 लागू होने के बाद राजधानी का माहौल पूरी तरह से बदला हुआ नजर आ रहा है। विधानसभा के पांच किलोमीटर के दायरे में एक साथ पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है। इसका उद्देश्य किसी भी तरह की भीड़, धरना, प्रदर्शन या अप्रत्याशित गतिविधि को रोकना है, ताकि विधानसभा की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
धारा 163 क्या है और क्यों जरूरी मानी गई
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत लागू की गई धारा 163 मूल रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने का एक निवारक प्रावधान है। यह प्रशासन को यह अधिकार देती है कि वह किसी क्षेत्र में अस्थायी रूप से भीड़ जमा होने पर रोक लगा सके। इसका उपयोग तब किया जाता है, जब किसी विशेष आयोजन, राजनीतिक गतिविधि या संवेदनशील परिस्थिति के दौरान शांति भंग होने की आशंका होती है।
विधानसभा सत्र के दौरान राजधानी में मंत्रियों, विधायकों, वरिष्ठ अधिकारियों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तियों की आवाजाही रहती है। इसके साथ ही विभिन्न संगठनों द्वारा ज्ञापन, प्रदर्शन या विरोध की संभावनाएं भी बनी रहती हैं। इन्हीं सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने यह निर्णय लिया कि सत्र की अवधि के दौरान धारा 163 लागू रखी जाए।
पांच किलोमीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र
धारा 163 के तहत लगाया गया प्रतिबंध केवल विधानसभा भवन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके चारों ओर पांच किलोमीटर के दायरे में प्रभावी रहेगा। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की रैली, जुलूस, धरना या सार्वजनिक सभा की अनुमति नहीं होगी। बिना पूर्व अनुमति के एकत्र होना कानूनन अपराध की श्रेणी में आएगा।
प्रशासन का मानना है कि इस दायरे में प्रतिबंध लगाने से न केवल विधानसभा परिसर सुरक्षित रहेगा, बल्कि आसपास के प्रमुख मार्गों, सरकारी कार्यालयों और आवासीय क्षेत्रों में भी शांति बनी रहेगी। इस दौरान पुलिस और प्रशासनिक अमले की तैनाती बढ़ा दी गई है।
पुलिस और प्रशासन की तैयारी
विधानसभा सत्र के दौरान राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को बहुस्तरीय बनाया गया है। प्रमुख चौराहों, सड़कों और विधानसभा जाने वाले मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जा रहा है, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत नजर रखी जा सके।
पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे कानून का पालन सख्ती से कराएं, लेकिन आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो। इसके लिए बैरिकेडिंग, यातायात प्रबंधन और वैकल्पिक मार्गों की व्यवस्था भी की गई है।
आम नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा
धारा 163 लागू होने का सीधा असर आम नागरिकों की दिनचर्या पर भी पड़ता है। विधानसभा के आसपास रहने वाले लोगों को कुछ समय के लिए आवाजाही में सावधानी बरतनी होगी। बड़े समूह में एकत्र होने से बचने की सलाह दी गई है।
हालांकि प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध स्थायी नहीं है और केवल विधानसभा सत्र की अवधि तक ही लागू रहेगा। आवश्यक सेवाओं, आपात स्थितियों और वैध कार्यक्रमों को इससे छूट दी जा सकती है, बशर्ते इसके लिए पूर्व अनुमति ली जाए।
राजनीतिक गतिविधियां और प्रशासनिक संतुलन
विधानसभा सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल स्वाभाविक रूप से गर्म रहता है। विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बहस, प्रदर्शन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर आवाज उठाने की कोशिशें होती हैं। ऐसे में प्रशासन के लिए संतुलन बनाए रखना एक चुनौतीपूर्ण कार्य होता है।
धारा 163 के जरिए प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा न आए, लेकिन कानून-व्यवस्था भी बनी रहे। यह कदम किसी विशेष दल या संगठन को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि समग्र शांति के लिए उठाया गया बताया जा रहा है।
पिछले अनुभवों से लिया गया सबक
बीते वर्षों में विधानसभा सत्र के दौरान राजधानी में कई बार तनावपूर्ण स्थितियां देखने को मिली हैं। कभी विरोध प्रदर्शन उग्र हो गए, तो कभी अचानक भीड़ जमा होने से यातायात और सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई। इन अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन ने पहले से ही सख्ती बरतने का फैसला किया है।
अधिकारियों का मानना है कि समय रहते ऐसे निवारक कदम उठाने से बड़ी घटनाओं को रोका जा सकता है। धारा 163 इसी रणनीति का हिस्सा है।
नागरिकों से सहयोग की अपील
प्रशासन ने राजधानीवासियों से अपील की है कि वे इस दौरान नियमों का पालन करें और सहयोग बनाए रखें। किसी भी प्रकार की अफवाह, उकसावे या गैरकानूनी गतिविधि से दूर रहने की सलाह दी गई है।
अधिकारियों का कहना है कि यह प्रतिबंध नागरिकों की स्वतंत्रता पर हमला नहीं है, बल्कि एक अस्थायी व्यवस्था है, जिसका उद्देश्य सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
कानूनी दृष्टिकोण
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, धारा 163 का उपयोग संवैधानिक रूप से वैध है, बशर्ते इसका उद्देश्य सार्वजनिक शांति और सुरक्षा हो। हालांकि, इसके प्रयोग में संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन न हो।
इस मामले में प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश की समीक्षा समय-समय पर की जाएगी और स्थिति सामान्य होते ही प्रतिबंध हटा लिया जाएगा।
सत्र के दौरान संभावित मुद्दे
विधानसभा सत्र में कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। ऐसे में राजधानी में राजनीतिक हलचल बढ़ना स्वाभाविक है। प्रशासन चाहता है कि यह हलचल सदन के भीतर रहे और सड़कों पर न उतरे।
धारा 163 लागू कर यह संदेश दिया गया है कि लोकतांत्रिक बहस का स्थान विधानसभा है, न कि सार्वजनिक अव्यवस्था।
निष्कर्ष
भोपाल में विधानसभा सत्र के दिन धारा 163 लागू किया जाना प्रशासनिक सतर्कता का प्रतीक है। यह कदम न तो असामान्य है और न ही अभूतपूर्व। इसका उद्देश्य केवल इतना है कि विधानसभा सत्र शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो और राजधानी में कानून-व्यवस्था बनी रहे।
आने वाले दिनों में यह देखा जाएगा कि यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है और आम जनता व राजनीतिक संगठनों का सहयोग कितना मिलता है। फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि शांति और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
