भोपाल में एक बार फिर सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के बीच टकराव सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस ने कलेक्टर दफ्तर नर्मदापुरम स्थित जनजातीय कार्यालय में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया। यह मामला अंतरजातीय विवाह के प्रोत्साहन राशि के भुगतान से जुड़ा था।

इस घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पीड़ित की पत्नी ने स्वयं ही इंस्पेक्टर बनकर कार्रवाई की। उन्होंने लोकायुक्त पुलिस के साथ मिलकर योजना बनाई और रिश्वत लेते समय बाबू को पकड़वाया। इससे यह साफ़ हुआ कि आम जनता की जागरूकता और सक्रिय भागीदारी भ्रष्टाचार के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन राशि और सरकारी प्रक्रिया
सरकारी योजना के तहत अंतरजातीय विवाह करने वाले जोड़ों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जाता है। इसका उद्देश्य समाज में समानता और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना है। हालांकि, इस प्रोत्साहन राशि का लाभ लेने के दौरान कुछ सरकारी कर्मचारी इसे अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। इस मामले में सहायक ग्रेड-2 ने 10 हजार रुपए की घूस की मांग की।
लोकायुक्त ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के तुरंत बाद कार्रवाई शुरू की और योजना बनाकर इसे अंजाम तक पहुँचाया। बाबू ट्रैप की यह कार्रवाई प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों के लिए एक मिसाल साबित हो रही है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस ने कार्रवाई के बाद सहायक ग्रेड-2 के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और आगे की जांच शुरू कर दी है। इस प्रकार की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार अभी भी मौजूद है, लेकिन सक्रिय निगरानी और जागरूक नागरिक इस पर रोक लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी कार्रवाईयों से न केवल भ्रष्टाचारियों को सबक मिलता है बल्कि आम जनता का सरकारी प्रक्रियाओं में भरोसा भी बढ़ता है। इसके साथ ही यह संदेश जाता है कि किसी भी प्रकार की रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सामाजिक और प्रशासनिक महत्व
इस घटना का सामाजिक महत्व भी कम नहीं है। अंतरजातीय विवाह जैसी योजनाओं का लाभ आम जनता तक सही तरीके से पहुंचे, इसके लिए प्रशासन को और अधिक सतर्क रहना होगा। लोकायुक्त की यह कार्रवाई इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है। इसके जरिए यह स्पष्ट हो जाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में प्रशासन और नागरिकों का सहयोग अनिवार्य है।
इस मामले में पीड़ित की पत्नी की भागीदारी यह दिखाती है कि नागरिक सक्रियता और पारिवारिक सहयोग प्रशासनिक पारदर्शिता में कितना प्रभाव डाल सकता है।
