भोपाल जिले में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण इस समय प्रशासनिक व्यवस्था, निर्वाचन प्रबंधन और मतदाता डेटा को अद्यतन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अभियान बनकर उभरा है। मतदाता सूची की शुद्धता, पारदर्शिता और पूर्णता सुनिश्चित करने का लक्ष्य प्रशासन ने निर्धारित किया है। इसके अंतर्गत बीते कुछ दिनों में जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया काफी तेजी से आगे बढ़ी। तीन दिन में कुल 20 हजार मतदाताओं की पहचान कर उनके विवरण को डिजिटाइज कर लिया गया। इससे न केवल निर्वाचन कार्यप्रणाली की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी, बल्कि आगामी चुनावों में मतदाता आधार सुचारु और अद्यतन स्थिति में रहेगा।

जिले में मतदाता संख्या और उनकी श्रेणीबद्ध पहचान को लेकर पिछले दिनों समर्पित अधिकारियों और बीएलओ का कार्य संतोषजनक माना जा रहा है। विशेष रूप से अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं का जीवन्त निष्पादन शुरू हो गया है।
पुनरीक्षण अभियान की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल पात्र मतदाता ही बने रहें। इसके लिए प्रत्येक मतदाता की प्रविष्टि का सत्यापन किया जाता है। बीते समय में प्रशासन के संज्ञान में यह तथ्य आया कि बड़ी संख्या में मतदाता ऐसे हैं जिनका वर्तमान पता स्पष्ट नहीं है, कई लोग स्थानांतरित हो चुके हैं, कुछ का देहावसान हो चुका है, जबकि कुछ मतदाताओं का नाम दो विभिन्न स्थानों पर पंजीकृत पाया गया।
इन स्थितियों ने पुनरीक्षण प्रक्रिया को आवश्यक बना दिया। प्रदेश स्तर पर यह प्रक्रिया विगत तिथि से जारी है और डिजिटल माध्यम से डेटा संग्रह इसकी मुख्य आधारशिला है।
जिले में मौजूदा स्थिति और अब तक का कार्य
भोपाल जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 21 लाख 25 हजार 908 दर्ज है। इनमें से लगभग सभी को गणना पत्रक वितरित कर दिए गए थे। प्रशासन के अनुसार 21 लाख 25 हजार 840 मतदाताओं को गणना पत्रक वास्तविक रूप से प्रदान भी किए गए।
इन गणना पत्रकों को वापस एकत्र करना और उनका डिजिटाइजेशन एक व्यापक कार्य था। छह दिसंबर तक यह कार्य जिले में पूर्ण स्तर पर संपन्न कर दिया गया। इससे एक स्थिति स्पष्ट हो गई कि जिले में डिजिटल तौर पर उपलब्ध मतदाता विवरण का अनुपात बढ़कर लगभग 80 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।
जिले के सात विधानसभा क्षेत्र इस प्रक्रिया में शामिल रहे — बैरसिया, उत्तर, नरेला, दक्षिण-पश्चिम, मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर। इन सभी क्षेत्रों में यह कार्य प्रशासनिक सहयोग और स्थानीय स्तर पर टीम गठन के साथ संपन्न करवाया गया।
तीन दिनों की कार्यवाही और नई पहचानें
पिछले तीन दिनों में अनकलेक्टेबल श्रेणी और नो-मैपिंग श्रेणी के मतदाताओं की बड़ी संख्या सामने आई। विशेष रूप से उन मतदाताओं की तलाश की गई, जिनके पते दर्ज तो थे, पर पुष्टि न हो पाई थी। इस तलाश में करीब 17 हजार 112 मतदाताओं का रिकॉर्ड मिल गया। इनका डेटा पुनरीक्षित कर डिजिटाइज कर दिया गया है।
इसी अवधि में तीन हजार 395 मतदाताओं का रिकॉर्ड नो मैपिंग श्रेणी से मिला। इन मतदाताओं का डेटा भी सत्यापन के बाद डिजिटाइज किया गया। इस प्रकार तीन दिनों में कुल 20 हजार मतदाताओं की पहचान और डेटा सुरक्षा का कार्य संपन्न हुआ।
अनकलेक्टेबल मतदाता श्रेणी पर विशेष जोर
अनकलेक्टेबल श्रेणी में वे मतदाता आते हैं जिनके पते, पहचान दस्तावेज़ या अंतिम उपस्थित जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इनमें स्थानांतरित मतदाता, मृत मतदाता, अनुपस्थित सदस्य तथा दोहरी प्रविष्टियां शामिल होती हैं। इस श्रेणी से लगभग 17 हजार से अधिक प्रविष्टियों को सही कर लिया गया। लेकिन अभी इसमें लगभग चार लाख चार हजार से अधिक मतदाता शेष हैं।
इनकी पुष्टि के लिए समिति स्तर पर निरंतर समीक्षा बैठकें चल रही हैं।
बीएलओ की भूमिका और तकनीकी संसाधन
मतदाताओं की सटीक पहचान और मानचित्रण के लिए बीएलओ को सक्रिय किया गया। बीएलओ एप में नए फीचर रूप में ड्यूप्लिकेट मतदाता जानकारी की सुविधा जोड़ी गई। इससे प्रशासन को दोहराए गए नाम संकेतों की पुष्टि आसान हुई।
बीएलओ स्थानीय स्तर पर घर-घर जाकर जानकारी जुटा रहे हैं। पते की वास्तविकता और रिकॉर्ड की पुष्टि का यही माध्यम प्रशासन के लिए विश्वसनीय माना जाता रहा है।
हरिगीत प्रवाह द्वारा साझा समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, बीएलओ को यह निर्देश दिया गया कि डेटा सत्यापन में विलंब न हो और यदि कोई प्रविष्टि संदिग्ध लगे तो उसे दस्तावेज सहित डिजिटल प्रणाली में चिन्हित कर रिपोर्ट किया जाए।
बैठक और दिशा-निर्देश
उप जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि पुनरीक्षण संबंधित कार्य एक निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए। अनकलेक्टेबल और नो मैपिंग श्रेणियों के मतदाताओं की पहचान, संशोधन और मैपिंग प्राथमिकता रहे।
साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई पात्र मतदाता सूची से बाहर न हो। यदि किसी मतदाता के दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, तो उन्हें अतिरिक्त समय प्रदान करने की बात भी कही गई।
हितधारकों पर प्रभाव
मतदाता पुनरीक्षण का सबसे बड़ा प्रभाव आगामी विधानसभा और नगरीय निकाय चुनावों में देखा जाएगा। स्पष्ट और अद्यतित मतदाता सूची चुनाव पारदर्शिता बढ़ाती है।
इन प्रयासों से दो प्रमुख लाभ होंगे:
पहला, गलत प्रविष्टियां हटेंगी
दूसरा, पात्र मतदाता सूची में बने रहेंगे
इसके अतिरिक्त, मतदान के समय भ्रम की स्थिति कम होगी।
निष्कर्ष
भोपाल जिले में चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण प्रशासनिक स्तर पर अत्यंत महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है। डेटा अद्यतन और डिजिटल सत्यापन के बाद आगामी चुनावों में निष्पक्षता की संभावना अधिक मजबूत होगी।
इन प्रक्रियाओं के पूर्ण होने से मतदाता सूची की गुणवत्ता बढ़ेगी और लोकतांत्रिक भागीदारी भी मजबूती पाएगी।
