भोपाल शहर में बुधवार की शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। शहर के व्यस्त इलाके में हुए इस हादसे में 12वीं कक्षा के छात्र आतिफ की जान चली गई। घटना के बाद स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई और पुलिस द्वारा तत्काल कार्रवाई की मांग तेज हो गई। गुरुवार को इस मामले में आरोपी बिल्डर नितिन मूलानी को न्यायालय में पेश किया गया, जिसके बाद शाम तक उसकी जमानत मंजूर हो गई। जमानत के आदेश के बाद मृतक के परिवार ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि आरोपी को सख्त दंड मिलेगा।

हादसे की स्थिति और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें
यह हादसा शहर के व्यस्त मार्ग पर हुआ, जहां ट्रैफिक का दबाव सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रहता है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि फॉरच्यून कार तेज रफ्तार में आई और सड़क पार कर रहे छात्र को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि छात्र कई फीट दूर जा गिरा। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार से पहले ही उसकी मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों में से कुछ लोगों ने बताया कि दुर्घटना के बाद वाहन चालक वहां से हट गया और वाहन बाद में बरामद किया गया।
घटना स्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि कार की गति देखकर ऐसा लग रहा था कि चालक वाहन को नियंत्रित स्थिति में नहीं चला रहा था। कुछ नागरिकों ने यह भी कहा कि हादसे वाली सड़क पर स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग पहले भी हो चुकी थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। यह स्थिति शहरों के उन स्थानों जैसी है, जहां उच्च ट्रैफिक घनत्व के बावजूद सुरक्षा व्यवस्था अक्सर कमजोर रहती है।
जांच प्रक्रिया को लेकर विवाद
मामले की जांच शुरू होने के बाद मृतक छात्र के परिजनों और उनके अधिवक्ता ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि पुलिस ने मामले में ऐसी धाराएं लगाई जो गंभीरता नहीं दर्शातीं और इसी कारण आरोपी जमानत पा गया। यह आरोप विशेष रूप से इसलिए तीखा हो गया क्योंकि हादसे में मृतक स्कूल जाने वाला छात्र था, जिसकी उम्र अभी उस अवस्था में थी जहां भविष्य की शिक्षा और करियर विकसित होने वाला था।
मृतक के पिता, जिन्होंने इस घटना के बाद कई सवाल उठाए, ने कहा कि उन्हें पूरी उम्मीद थी कि आरोपी को कम से कम न्यायालय द्वारा हिरासत में रखा जाएगा। उनका कहना है कि उनके बेटे की मौत के बाद परिवार बिखर गया है। उनकी यह अपेक्षा थी कि आरोपी को दंड मिले ताकि संदेश जाए कि किसी भी व्यक्ति की जान लेने वाले दुष्कर्म को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
कानूनी बहस
परिजनों के वकील ने बयान दिया कि पुलिस ने घटनास्थल की परिस्थितियों और टक्कर की गंभीरता के बावजूद कमजोर आरोप लगाए। उनका कहना है कि इतने गंभीर मामले में कठोर आपराधिक धाराएं लगाई जानी चाहिए थीं। उन्होंने यह भी कहा कि वाहन चालक एक प्रभावशाली परिवार से है और इस कारण जांच की निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
आम तौर पर ऐसे मामलों में पुलिस IPC की धारा 304-A (लापरवाही से मृत्यु), 279 (लापरवाही से वाहन चलाना) और संबंधित मोटर व्हीकल एक्ट की धाराएं लगाती है। लेकिन मामले की संरचना और वाहन की रफ्तार को देखते हुए वकील का यह भी कहना है कि इसे मात्र लापरवाही नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य माना जाना चाहिए।
दूसरी ओर, आरोपी पक्ष से पहले दिन कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप जमानत अर्ज़ी दायर की गई और अदालत ने उसे स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने यह कहते हुए अनुमति दी कि जांच जारी रहेगी और आरोपी को समय-समय पर जांच में सम्मिलित होकर सहयोग देना होगा।
जनता की प्रतिक्रिया
यह हादसा सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और कई लोगों ने इस बारे में टिप्पणी करते हुए न्याय की मांग की। कई नागरिकों ने कहा कि शहर के कई इलाकों में तेज रफ्तार वाहन चलाना आम हो चुका है और नियमों का पालन कम होता जा रहा है।
कई अभिभावकों ने चिंता जताई कि उनके बच्चे रोज़ स्कूल जाते और लौटते हैं, और इस तरह के हादसे उनके लिए भय का कारण बनते जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि स्कूलों के आसपास, मुख्य बाजारों पर, बस-स्टॉप के नजदीक, तथा भीड़-भाड़ वाले इलाकों में पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन का दायित्व है। लेकिन जरूरत के मुताबिक गति-नियंत्रण, सीसीटीवी कवरेज और पुलिस पेट्रोलिंग बहुत सीमित है।
हादसे का सामाजिक प्रभाव
पूरे क्षेत्र में इस सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील घटना का गहरा प्रभाव हुआ। लोग यह कहने लगे कि शिक्षा के महत्व, युवा पीढ़ी की सुरक्षा और सड़क अनुशासन पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
एक छात्र की मृत्यु, वह भी तब जब वह अपनी पढ़ाई की दिशा तय करने के महत्वपूर्ण दौर में था, समाज को यह याद दिलाती है कि विकास के साथ सुरक्षा का ध्यान न रखा जाए तो आर्थिक और तकनीकी प्रगति से भी बड़ा नुकसान देखना पड़ता है।
आरोपी की पृष्ठभूमि
आरोपी नितिन मूलानी निर्माण व्यवसाय से जुड़े हैं और क्षेत्र में उनका प्रभाव माना जाता है। शहर के कई लोग उन्हें पहचानते हैं और उनके कारोबारी संपर्कों की चर्चा होती रहती है। यही बात इस मामले को संवेदनशील बनाती है क्योंकि जब आरोपी आर्थिक रूप से स्थापित हो तो आम लोगों को अक्सर जांच पर संदेह होने लगता है।
मृतक छात्र आतिफ का परिवार एक मध्यमवर्गीय पृष्ठभूमि से है। परिवार ने खुलकर कहा कि उन पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है और वे चाहते हैं कि किसी भी प्रभाव या दबाव के बिना मामले की जांच हो।
आने वाले दिन
अब पुलिस पर सभी की नजरें हैं कि वह जांच को किस गति से आगे बढ़ाती है। कई लोगों ने यह मांग की है कि जांच दूसरी टीम या उच्च स्तरीय अधिकारी की निगरानी में हो। यह भी कहा जा रहा है कि यदि पुलिस ने शुरू में ही गंभीर धाराएं लगा दी होतीं तो शायद कानूनी प्रक्रिया अलग होती।
शहर में यह घटना सड़क सुरक्षा, प्रशासनिक जिम्मेदारी और न्याय-प्रक्रिया जैसे मुद्दों के केंद्र में आ गई है। आने वाले समय में अदालत दोबारा मामले की सुनवाई करेगी और संभव है कि नए तथ्यों के आधार पर कानूनी स्थिति बदले।
