भोपाल में लंबे समय से प्रतीक्षित मेट्रो संचालन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। राजधानी में मेट्रो ट्रेन को चलाने से पहले सुरक्षा की सबसे अहम और अंतिम परीक्षा गुरुवार सुबह से शुरू हो गई, जब दिल्ली से कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की टीम अचानक भोपाल पहुंची। इस दौरे की अचानक घोषणा ने शहरवासियों और मेट्रो प्रबंधन दोनों में हलचल पैदा कर दी, क्योंकि यह वही निरीक्षण है जिसके बाद यह तय होगा कि मेट्रो को ‘ओके टू रन’ प्रमाणन मिलेगा या नहीं। यदि यह प्रमाणन मिल जाता है तो कुछ ही दिनों में भोपाल में पहली बार मेट्रो चलने लगेगी, जो शहर के परिवहन तंत्र में ऐतिहासिक बदलाव लाएगी।

भोपाल मेट्रो की कहानी: 2019 से अब तक का सफर
भोपाल मेट्रो का पहला चरण वर्ष 2019 में शुरू हुआ था, जिसकी कुल लागत लगभग 7773 करोड़ रुपये है। यह परियोजना शहर में आधुनिक और तेज परिवहन प्रणाली की दिशा में उठाया गया सबसे महत्वाकांक्षी कदम है। हालांकि, कोरोना महामारी ने दो साल तक कार्य को गंभीर रूप से प्रभावित किया। इंजीनियरों की उपलब्धता कम हुई, निर्माण सामग्री की आपूर्ति बाधित हुई, और श्रमिकों की कमी ने प्रगति को धीमा कर दिया। इसके बाद भी परियोजना ने गति पकड़ी, लेकिन कई तकनीकी चुनौतियों और ठेकेदार स्तर के विलंब के कारण तय समयसीमा से कई बार पीछे खिसकी।
आज, जब मेट्रो ट्रेनें ट्रैक पर पूरी तरह तैयार खड़ी हैं, स्टेशन संरचनाएं, सिग्नलिंग सिस्टम, कंट्रोल सेंटर और डिपो सभी लगभग तैयार हैं, तब सुरक्षा परीक्षण—सीएमआरएस निरीक्षण—संचालन की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण शर्त है।
अकस्मात निरीक्षण: सुबह-सुबह डिपो में पहुंची पूरी टीम
गुरुवार सुबह शहरवासियों को उस समय आश्चर्य हुआ जब खबर मिली कि सीएमआरएस टीम बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे सुभाष नगर स्थित मेट्रो डिपो पहुंच गई है। आमतौर पर ऐसे निरीक्षणों की अग्रिम जानकारी होती है, लेकिन इस बार निरीक्षण को अचानक शुरू किया गया, जिसे मेट्रो प्रबंधन और शासन के जल्दी संचालन शुरू करने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है।
सुभाष नगर डिपो में टीम ने ट्रेन संचालन, सुरक्षा प्रोटोकाल, डिपो के अंदर ट्रेन मूवमेंट सिस्टम, रखरखाव व्यवस्था, इमरजेंसी गियर और तकनीकी उपकरणों की गहराई से जांच की। विशेषज्ञों ने मेट्रो कोचों के अंदरूनी तंत्र से लेकर बाहरी सुरक्षा मानकों तक सभी पहलुओं की जांच में कई घंटे लगाए।
ट्रैक कार से किया गया विस्तृत निरीक्षण: ट्रैक की गुणवत्ता पर सबसे अधिक फोकस
डिपो निरीक्षण के बाद टीम ने दोपहर 1 बजे ट्रैक कार में बैठकर मेट्रो कॉरिडोर का निरीक्षण प्रारंभ किया। ट्रैक कार एक विशेष वाहन होती है जिसका उपयोग ट्रैक की तकनीकी स्थिति का आकलन करने में किया जाता है।
इस दौरान टीम ने रेल पटरियों की एलाइनमेंट, वेल्डिंग क्वालिटी, कर्व्स की सुरक्षा, ओवरहेड वायरिंग की स्थिति, पावर सप्लाई सिस्टम और ट्रैक के पास की सुरक्षा क्लियरेंस जैसे बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया।
यह निरीक्षण भोपाल मेट्रो की संचालन अनुमति हासिल करने की प्रक्रिया का तीसरा पड़ाव है। पहले दो निरीक्षणों में कई तकनीकी कमियां पाई गई थीं, जिनमें मुख्य रूप से सिग्नलिंग और कम्युनिकेशन सिस्टम से संबंधित मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा कुछ स्टेशन संरचनाओं पर भी सुधारात्मक कार्य सुझाए गए थे।
इस बार उम्मीद क्यों अधिक है?
सूत्रों के अनुसार, मेट्रो प्रबंधन ने पिछले निरीक्षणों में मिली सभी टिप्पणियों पर तेजी से कार्य किया है। सिग्नलिंग सिस्टम को उन्नत किया गया, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर्स, एस्केलेटर, फायर सिस्टम, कंट्रोल सेंटर और ट्रैक सेफ्टी के सभी मानकों को अपडेट किया गया है। इसीलिए इस बार उम्मीद जताई जा रही है कि संचालन की अनुमति मिलने में कोई बड़ी बाधा नहीं आएगी।
केंद्रीय विद्यालय स्टेशन से लेकर एम्स स्टेशन तक सुरक्षा जांच
पहले दिन के निरीक्षण में टीम ने केंद्रीय विद्यालय स्टेशन पर पांच मिनट तक रुककर स्टेशन सुरक्षा के सभी पहलुओं की समीक्षा की। इसके बाद बोर्ड ऑफिस स्टेशन पर लगभग आधा घंटा बिताया गया, जहां प्लेटफॉर्म व्यवस्थाओं, पब्लिक एड्रेस सिस्टम, एस्केलेटर, लिफ्ट, यात्री प्रवेश व्यवस्था और इमरजेंसी निकास मार्गों की जांच की गई।
एम्स स्टेशन तक पहुंचकर टीम ने ट्रैक और स्टेशन दोनों के संचालन संबंधी इंतजामों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। इस दौरान कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता भी टीम के साथ मौजूद रहे, जो इस निरीक्षण के हर चरण की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
तीन दिवसीय निरीक्षण: 15 नवंबर तक पूरी होगी अंतिम जांच
संवेदनशील और महत्वपूर्ण इस निरीक्षण में टीम कुल तीन दिन शहर में रहेगी।
14 नवंबर को ट्रैक और स्टेशनों का निरीक्षण हुआ।
15 नवंबर को आठ स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा।
और 15 नवंबर को ही परियोजना से जुड़ी फाइलों की समीक्षा की जाएगी। यही वह फाइलें हैं जिनमें सुरक्षा रिपोर्ट, परीक्षण रिपोर्ट, तकनीकी सर्टिफिकेशन और संचालन मानकों की विवरणी शामिल होती है।
अनुमति में देरी पर सवाल, पर एमडी ने साधी चुप्पी
जबकि शहर में मेट्रो संचालन की प्रतीक्षा बढ़ती जा रही है, देरी के कारण आम जनता में असंतोष भी बढ़ता दिख रहा है। इसके बावजूद मेट्रो कंपनी के एमडी एस कृष्ण चैतन्य इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से बच रहे हैं। कई प्रयासों के बावजूद उन्होंने संचालन की संभावित तारीख या देरी के कारणों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
क्या भोपाल मेट्रो दिसंबर से शुरू हो सकती है?
सूत्रों के मुताबिक, यदि सीएमआरएस की ओर से ‘ओके टू रन’ मिल जाता है, तो संचालन एक से दो सप्ताह में शुरू हो सकता है। कुछ अधिकारी दिसंबर के पहले सप्ताह तक मेट्रो स्टार्ट होने की उम्मीद जता रहे हैं। हालांकि अंतिम निर्णय राज्य सरकार और मेट्रो प्रबंधन के हाथ में होगा।
जांच में जल्दबाजी पर उठ रहे सवाल
कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि निरीक्षण अचानक शुरू होने से लगता है कि शासन किसी भी कीमत पर मेट्रो जल्द शुरू करना चाहता है। यह जल्दबाजी कहीं सुरक्षा मानकों में ढील न बन जाए, इस पर भी विचार होना आवश्यक है। मेट्रो ट्रेनें बड़ी और हाई-स्पीड मशीनें हैं, इसलिए सुरक्षा में कोई भी गलती गंभीर परिणाम दे सकती है।
भोपाल के लिए मेट्रो क्यों महत्वपूर्ण है?
भोपाल शहर तेजी से बढ़ती आबादी और यातायात दबाव का सामना कर रहा है। पुराने शहर के तंग मार्ग, नए शहर का फैलता विस्तार और बढ़ते निजी वाहन इस बात की आवश्यकता पैदा करते हैं कि शहर को एक आधुनिक, तेज, सुरक्षित और सस्ती सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मिले। मेट्रो न केवल यात्रा समय कम करेगी, बल्कि प्रदूषण घटाने, यातायात जाम को कम करने और शहर की आर्थिक गतिविधियों को गति देने में भी मदद करेगी।
