भोपाल में मेट्रो सेवा शुरू हुए अब एक सप्ताह पूरा हो चुका है। 21 दिसंबर 2025 से आम यात्रियों के लिए शुरू हुई भोपाल मेट्रो ने धीरे-धीरे शहर की दैनिक आवाजाही में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी है। शुरुआती दिनों में सीमित रूट और समय को लेकर सवाल उठे, लेकिन अब मेट्रो को लेकर यात्रियों का भरोसा बढ़ता दिख रहा है।

मेट्रो का संचालन एम्स स्टेशन से सुभाष नगर तक किया जा रहा है, जो शहर के महत्वपूर्ण व्यावसायिक और आवासीय इलाकों को जोड़ता है। सप्ताह के दौरान ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, छात्रों और बुजुर्ग यात्रियों ने मेट्रो को एक सुविधाजनक विकल्प के रूप में अपनाना शुरू किया है।
तय किराए के साथ शुरू हुआ सफर, फ्री राइड नहीं
भोपाल मेट्रो की शुरुआत बिना किसी फ्री ट्रायल के की गई। यात्रियों को पहले दिन से ही पूरा किराया देना पड़ रहा है। दो स्टेशनों तक सफर करने पर 20 रुपये, चार स्टेशनों तक 30 रुपये और पूरे रूट के लिए 40 रुपये किराया तय किया गया है। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि यह किराया शहरी परिवहन की लागत को ध्यान में रखकर तय किया गया है।
समय सीमा सीमित, फिर भी राहत महसूस कर रहे यात्री
मेट्रो फिलहाल सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक ही चलाई जा रही है। इसके बावजूद कई यात्रियों का कहना है कि यह सेवा ट्रैफिक में फंसने से बेहतर विकल्प साबित हो रही है। एम्स से सुभाष नगर तक का सफर, जो सड़क मार्ग से 45 मिनट से एक घंटे तक लग सकता था, अब करीब 25 मिनट में पूरा हो रहा है।
पार्किंग और कनेक्टिविटी बनी बड़ी चुनौती
एक सप्ताह में सबसे बड़ी समस्या के रूप में स्टेशन के आसपास पार्किंग और फीडर सुविधाओं की कमी सामने आई है। जिन यात्रियों का घर स्टेशन से दूर है, उन्हें ऑटो या निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। इससे कुल यात्रा खर्च बढ़ रहा है, हालांकि मेट्रो के अंदर का सफर आरामदायक बताया जा रहा है।
सात साल का इंतजार, पहला चरण अब हकीकत
भोपाल मेट्रो परियोजना की नींव वर्ष 2018 में रखी गई थी। करीब सात साल बाद इसका पहला चरण जमीन पर उतरा है। फिलहाल 6.22 किलोमीटर का हिस्सा चालू किया गया है, जबकि पूरी 16 किलोमीटर की लाइन को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
शहरी भविष्य की दिशा में पहला कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि भोपाल मेट्रो का यह शुरुआती चरण आने वाले वर्षों में शहर के यातायात ढांचे की दिशा तय करेगा। जैसे-जैसे रूट का विस्तार होगा और समय सीमा बढ़ेगी, मेट्रो शहर की जरूरत बनती जाएगी।
