भोपाल शहर के विकास की रफ्तार एक बार फिर तेज होती दिखाई दे रही है। लंबे समय से प्रतीक्षित मेट्रो रेल परियोजना का काम अब वह गति पकड़ चुका है जिसकी शहर को जरूरत थी। राजधानी के बैरसिया रोड पर स्थित करोंद क्षेत्र में मेट्रो की ऑरेंज लाइन के निर्माण कार्य का दूसरा चरण युद्धस्तर पर जारी है। पिछले कई महीनों से यहां सड़क के बीचोंबीच लगे बेरिकेड्स के कारण आवागमन बेहद प्रभावित था। रोजाना हजारों वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, और लगातार चल रहे निर्माण कार्य की वजह से जाम आम हो चुका था। स्थानीय निवासियों से लेकर व्यापारियों और नियमित यातायात करने वालों तक, सभी के लिए यह समस्या परेशानी का प्रमुख कारण बनी हुई थी।

लेकिन अब तस्वीर बदलने लगी है। सुभाष नगर से करोंद चौराहे तक जो हिस्सा ऑरेंज लाइन के दूसरे चरण में शामिल है, वहां पिलर निर्माण लगभग पूरा हो चुका है और अब इन पिलरों पर गर्डर रखने का काम गति पकड़ चुका है। करोंद स्थित केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान यानी सीआईएई के सामने यह प्रक्रिया सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है। यहां आठ से अधिक पिलर पर काम पूरा होकर अब गर्डर लॉन्चिंग की तैयारी की जा चुकी है। सुरक्षा कारणों के चलते गर्डर लगाने का कार्य देर रात को किया जा रहा है ताकि दिन में होने वाले भारी यातायात पर इसका असर न पड़े।
गर्डर लांच करने की प्रक्रिया अत्यंत तकनीकी और संवेदनशील होती है। भारी वजन वाले गर्डर को हाईटेक मशीनों की मदद से पिलरों पर सही संतुलन के साथ स्थापित किया जाता है। इसके लिए इंजीनियरों और साइट पर मौजूद विशेषज्ञों की टीम मिलकर रात-दिन लगातार काम कर रही है। जैसे ही यह गर्डर स्थापना पूरी हो जाएगी, सड़क के बीच बनाए गए अस्थायी बेरिकेड्स हटाए जा सकेंगे, जिससे करोंद और बैरसिया रोड के आसपास के इलाकों को रोजमर्रा के जाम से बड़ी राहत मिलेगी। यह बदलाव शहर के लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण जैसा है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके सदस्य प्रतिदिन इसी मार्ग से स्कूल, काम या व्यवसाय के लिए गुजरते हैं।
करीब डेढ़ साल से इस क्षेत्र में मेट्रो लाइन बिछाने का कार्य चल रहा है। घनी आबादी और अधिक यातायात वाले इस इलाके में निर्माण कार्य करते समय सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। बड़े वाहनों की आवाजाही, छोटे दुकानदारों की गतिविधियाँ, सड़क किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा और आम जनता के दैनिक जीवन में न्यूनतम व्यवधान को देखते हुए कार्य को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाया जा रहा है। यही वजह है कि पिलर निर्माण और अब गर्डर लांचिंग को रात के समय प्राथमिकता दी जा रही है।
यह क्षेत्र भोपाल के उत्तरी हिस्से के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। करोंद चौराहा, जहां कई प्रमुख मार्ग एक-दूसरे से मिलते हैं, शहर के सबसे व्यस्त चौकों में से एक है। यहां से बैरसिया, राजगढ़ और अन्य कई क्षेत्रों तक लोगों का लगातार आना-जाना लगा रहता है। मेट्रो लाइन के तैयार होने के बाद न केवल यहां का यातायात सुगम होगा बल्कि भविष्य में हजारों लोगों को एक सुरक्षित और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन विकल्प उपलब्ध होगा। यातायात की समस्या कम होने से सड़क दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी और लोगों का समय बचेगा।
ऑरेंज लाइन का यह हिस्सा पूरा होने के बाद शहर की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। मेट्रो से जुड़ने वाले क्षेत्रों में तेजी से विकास होगा। नए बाजार, दुकाने, ऑफिस और आवासीय परियोजनाओं की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। करोंद क्षेत्र, जो अब तक ट्रैफिक जाम और अव्यवस्था की वजह से परेशान था, मेट्रो के शुरू होने के बाद एक सुगम और व्यवस्थित मार्ग के रूप में उभर सकता है।
मेट्रो परियोजना से मिलने वाले लाभ केवल यातायात तक सीमित नहीं रहेंगे। यह शहर के पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगी। निजी वाहनों की कम होती संख्या व वायु प्रदूषण में कमी जैसे फायदे भविष्य में शहर की जीवनशैली को बेहतर बनाएंगे। आधुनिक शहरी ढांचे की दिशा में यह एक उत्साहजनक कदम है।
शहर के लोग बीते कई महीनों से इस काम के पूरा होने का इंतजार कर रहे थे। अब जब पिलर तैयार होकर गर्डर लॉन्चिंग की स्थिति में पहुंच चुके हैं, तो उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में करोंद से जुड़े इस पूरे मार्ग पर यातायात सुचारू होने लगेगा। मेट्रो का यह चरण पूरा होने के बाद बाकी हिस्सों पर भी इसी गति से काम आगे बढ़ेगा और जल्द ही भोपाल की मेट्रो रेल सेवा एक वास्तविकता बनकर शहर के लोगों के जीवन में समाहित हो जाएगी।
