मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर बजट सत्र से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठी है। शहर में चल रहे बुनियादी ढांचे के कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अब अगले बजट पर निर्भर हैं। खासतौर पर भोपाल मेट्रो के दो प्रमुख रूट और शहर की सड़कों के निर्माण को लेकर नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की नजरें आगामी वित्तीय प्रावधानों पर टिकी हुई हैं। पिछले वर्ष मिले बजट ने कई योजनाओं को कागज से जमीन पर उतारने का रास्ता दिखाया था, लेकिन कुछ कार्य अब भी अधूरे हैं। ऐसे में इस बार बजट से नई रफ्तार मिलने की उम्मीद की जा रही है।

भोपाल मेट्रो: शहर की परिवहन व्यवस्था में बदलाव का आधार
भोपाल में मेट्रो परियोजना को शहर के भविष्य की परिवहन व्यवस्था का आधार माना जा रहा है। बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव और विस्तारित हो रहे शहरी दायरे को देखते हुए मेट्रो को दीर्घकालिक समाधान के रूप में तैयार किया जा रहा है। फिलहाल शहर में दो प्रमुख रूट पर काम जारी है, जिनके लिए आगामी बजट में प्रावधान की संभावना जताई जा रही है।
ऑरेंज लाइन के फेज-2 का रूट सुभाषनगर से करोंद के बीच प्रस्तावित है। यह मार्ग शहर के घनी आबादी वाले और व्यावसायिक रूप से सक्रिय इलाकों को जोड़ेगा। सुभाषनगर रेलवे स्टेशन क्षेत्र से लेकर करोंद तक की कनेक्टिविटी बेहतर होने से रोजाना हजारों यात्रियों को लाभ मिलेगा। यह रूट उत्तर दिशा की ओर बढ़ते शहरी विस्तार को सार्वजनिक परिवहन से जोड़ने का काम करेगा।
दूसरी ओर ब्लू लाइन भदभदा से रत्नागिरी तक प्रस्तावित है। यह मार्ग शहर के दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम हिस्सों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। भदभदा क्षेत्र पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, जबकि रत्नागिरी और उससे जुड़े इलाके तेजी से विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्र हैं। इन दोनों को मेट्रो नेटवर्क से जोड़ना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया गया निर्णय माना जा रहा है।
पिछले बजट का असर और 425 करोड़ की राशि
पिछले बजट में भोपाल को 425 करोड़ रुपए का प्रावधान मिला था। इस राशि ने कई परियोजनाओं को गति दी। मेट्रो कार्यों के साथ-साथ शहर के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने के लिए भी धन आवंटित किया गया। बजट प्रावधान के बाद प्रशासनिक स्तर पर कई योजनाओं की स्वीकृति और निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ी।
शहरवासियों को उम्मीद है कि जिस तरह पिछले वर्ष वित्तीय सहायता मिली थी, उसी तरह इस बार भी मेट्रो के दोनों रूट को आवश्यक फंडिंग दी जाएगी। मेट्रो परियोजना बहुस्तरीय और दीर्घकालिक निवेश की मांग करती है। ट्रैक बिछाने, स्टेशन निर्माण, विद्युत प्रणाली, सिग्नलिंग और सुरक्षा मानकों के लिए निरंतर धन की आवश्यकता होती है।
41 सड़कों और 3 फ्लाईओवर को मिली थी मंजूरी
पिछले बजट में केवल मेट्रो ही नहीं, बल्कि शहर की सड़कों के व्यापक सुधार का भी खाका तैयार किया गया था। 41 सड़कों के निर्माण और उन्नयन को मंजूरी मिली थी। इसके अलावा तीन फ्लाईओवर के निर्माण का भी प्रावधान किया गया था। यह निर्णय ट्रैफिक जाम कम करने और शहर के भीतर आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से लिया गया था।
इन सड़कों और फ्लाईओवर परियोजनाओं की अनुमानित लागत 447.21 करोड़ रुपए आंकी गई थी। शहर के लगभग हर इलाके और ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों के निर्माण के लिए बजट में टोकन राशि रखी गई थी। टोकन राशि का मतलब यह था कि प्रारंभिक स्वीकृति और प्रक्रिया शुरू की जा सके, जबकि पूर्ण राशि चरणबद्ध तरीके से जारी की जानी थी।
इस पहल का उद्देश्य केवल मुख्य सड़कों का विकास नहीं, बल्कि आंतरिक और ग्रामीण संपर्क मार्गों को भी मजबूत करना था। राजधानी होने के कारण भोपाल में रोजाना आसपास के जिलों और गांवों से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। बेहतर सड़क नेटवर्क से न केवल ट्रैफिक सुगमता बढ़ती है, बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बल मिलता है।
अधूरे काम और प्रशासनिक चुनौतियां
हालांकि पिछले बजट में कई परियोजनाओं को स्वीकृति मिली, लेकिन सभी काम समय पर शुरू नहीं हो सके। शैतान सिंह तिराहे से कोलार मेन रोड को जोड़ने वाली सड़क का निर्माण प्रस्तावित था, जो ट्रैफिक दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभा सकता था। इसी तरह बावड़िया क्षेत्र में प्रस्तावित नए आरओबी की एप्रोच रोड बनाने का भी प्रावधान था।
एक साल बीत जाने के बावजूद ये कार्य शुरू नहीं हो पाए। इसके पीछे भूमि अधिग्रहण, तकनीकी स्वीकृतियां, निविदा प्रक्रिया या अन्य प्रशासनिक कारण हो सकते हैं। शहरवासियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि स्वीकृति के बाद भी काम जमीन पर क्यों नहीं उतर पा रहा। ऐसे में आगामी बजट से न केवल नई योजनाओं की उम्मीद है, बल्कि लंबित परियोजनाओं को गति देने की भी अपेक्षा है।
ग्रामीण और शहरी संतुलन की जरूरत
भोपाल का विस्तार अब केवल शहरी सीमा तक सीमित नहीं रहा। आसपास के ग्रामीण क्षेत्र तेजी से शहर का हिस्सा बन रहे हैं। पिछले बजट में ग्रामीण संपर्क मार्गों के लिए भी टोकन राशि रखी गई थी। इसका उद्देश्य था कि राजधानी से जुड़े गांवों की सड़कें भी मजबूत हों और विकास का लाभ केवल मुख्य शहर तक सीमित न रहे।
यदि इस बार भी ग्रामीण और परिधीय क्षेत्रों के लिए पर्याप्त प्रावधान किया जाता है, तो इससे संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा। बेहतर सड़कें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच को आसान बनाती हैं।
खेल और स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर भी उम्मीदें
बजट केवल सड़कों और मेट्रो तक सीमित नहीं होता। भोपाल में खेल और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों को लेकर भी अपेक्षाएं हैं। पिछले बजटों में इन दोनों क्षेत्रों को वित्तीय समर्थन मिला था। राजधानी में खेल अधोसंरचना को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर निवेश आवश्यक है।
खेल सुविधाओं के विकास से युवाओं को अवसर मिलते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाएं उभरती हैं। वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश से सरकारी अस्पतालों की क्षमता बढ़ती है और आम नागरिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिलती हैं। कोविड के बाद स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की जरूरत और भी स्पष्ट हो गई है।
शहर की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
मेट्रो और सड़क परियोजनाएं केवल यातायात सुधार का माध्यम नहीं होतीं, बल्कि ये शहर की अर्थव्यवस्था को भी गति देती हैं। निर्माण कार्यों से रोजगार सृजन होता है, रियल एस्टेट को बढ़ावा मिलता है और निवेश का माहौल बेहतर होता है। जिन क्षेत्रों में मेट्रो स्टेशन प्रस्तावित होते हैं, वहां व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने लगती हैं।
भोपाल जैसे शहर में, जहां सरकारी कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और निजी उद्योगों की उपस्थिति है, बेहतर परिवहन और सड़क नेटवर्क निवेश आकर्षित करने में सहायक हो सकता है।
आगे की राह
आगामी बजट से यह तय होगा कि भोपाल के विकास की गति कितनी तेज होगी। मेट्रो के दोनों रूट के लिए पर्याप्त धनराशि मिलती है या नहीं, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। साथ ही पिछली बार स्वीकृत सड़कों और फ्लाईओवर परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।
शहर के नागरिकों की अपेक्षा है कि विकास योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि तय समयसीमा में पूरी हों। यदि मेट्रो, सड़क, खेल और स्वास्थ्य क्षेत्र में संतुलित और प्रभावी निवेश किया जाता है, तो भोपाल आने वाले वर्षों में एक आधुनिक और सुव्यवस्थित राजधानी के रूप में उभर सकता है।
