भोपाल के रातीबड़ क्षेत्र में स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से दो नाबालिग छात्रों के अचानक लापता होने की खबर ने पूरे इलाके में चिंता का माहौल बना दिया है। यह मामला तब सामने आया जब विद्यालय प्रशासन ने छात्रों की अनुशासनहीनता के कारण प्रिंसिपल की फटकार दी। दोनों छात्र वर्तमान में नौवीं कक्षा के विद्यार्थी हैं और उन्होंने कक्षा छठवीं से इस प्रतिष्ठित विद्यालय में आवासीय शिक्षा ग्रहण की है।

विद्यालय की नियमावली के अनुसार, छात्र अपने व्यक्तिगत अनुशासन और शैक्षणिक प्रतिबद्धताओं के प्रति उत्तरदायी होते हैं। लेकिन शुक्रवार को शिक्षकों ने देखा कि दोनों छात्र अपनी पढ़ाई और नियमित गतिविधियों में लापरवाही कर रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप प्रिंसिपल ने छात्रों को अनुशासनात्मक चेतावनी दी। इस फटकार के बाद छात्रों ने तत्काल हॉस्टल से भागने का निर्णय लिया।
शिक्षकों और स्टाफ ने तुरंत खोजबीन शुरू की, लेकिन छात्र पहले ही विद्यालय परिसर से बाहर निकल चुके थे। छात्रों के अभिभावकों को भी इसकी जानकारी दी गई और उनकी चिंता चरम पर पहुंच गई। रातीबड़ थाना में दोनों छात्रों की गुमशुदगी दर्ज कराई गई है। पुलिस ने तत्काल प्रभाव से आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान शुरू किया और CCTV फुटेज की मदद से पता लगाया कि दोनों छात्र नीलबड़ क्षेत्र तक गए थे।
स्थानीय लोग और पड़ोसी भी इस मामले में सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की घटना विद्यालय के लिए दुर्लभ है क्योंकि नवोदय विद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। स्कूल प्रशासन ने कहा कि छात्र जल्द से जल्द सुरक्षित लौटें, इसके लिए सभी संसाधन और प्रयास लगाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि किशोरावस्था में यह सामान्य है कि बच्चे कभी-कभी अनुशासनात्मक दबावों के कारण तनाव महसूस करते हैं और अप्रत्याशित निर्णय ले लेते हैं। हालांकि, इस मामले में छात्र सुरक्षित लौटें, यह सबसे महत्वपूर्ण है।
पुलिस द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि आसपास के सभी क्षेत्रों के CCTV फुटेज की जांच की जा रही है। पुलिस टीम ने नीलबड़ के आस-पास की दुकानों, बस स्टॉप और रेलवे स्टेशन की निगरानी भी तेज कर दी है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी छात्र की तलाश में जानकारी साझा की जा रही है।
विद्यालय प्रशासन ने माता-पिता से अनुरोध किया है कि वे बच्चों से नियमित संपर्क बनाए रखें और उन्हें मानसिक समर्थन दें। शिक्षकों ने भी कहा कि छात्र अपने निर्णय पर पश्चाताप महसूस कर सकते हैं और उन्हें सुरक्षित वापस लाना प्राथमिकता है।
इस घटना ने पूरे इलाके में सुरक्षा और बच्चों की मानसिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के साथ संवाद की कमी और अत्यधिक अनुशासन कभी-कभी इस तरह की घटनाओं को जन्म दे सकता है। इसलिए माता-पिता और स्कूल दोनों को मिलकर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।
अंततः, यह घटना न केवल छात्रों और उनके परिवारों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह स्कूल प्रशासन, स्थानीय पुलिस और समुदाय के लिए भी एक चेतावनी है कि किशोरों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर सतत निगरानी जरूरी है। सभी प्रयास इस बात पर केंद्रित हैं कि बच्चे जल्द से जल्द सुरक्षित रूप से अपने घर और विद्यालय लौटें।
