भोपाल में आयोजित एक प्रतिष्ठित शूटिंग प्रतियोगिता के बाद देश की सबसे बड़ी निशानेबाजी संस्था नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया अचानक कानूनी घेरे में आ गई है। खेल जगत में अनुशासन, नियमों और सुरक्षा मानकों की मिसाल मानी जाने वाली इस संस्था पर गंभीर आरोप लगे हैं, जिनका सीधा संबंध देश के आर्म्स कानून और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा है। भोपाल पुलिस ने NRAI के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जिससे खेल प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और शूटिंग समुदाय में हलचल मच गई है।

यह मामला केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि पुलिस और जांच एजेंसियां इसे एक संभावित प्रणालीगत चूक के रूप में देख रही हैं। शुरुआती जांच में सामने आया है कि भोपाल में आयोजित शूटिंग प्रतियोगिता के दौरान कई निशानेबाजों को कारतूस उपलब्ध कराए गए, लेकिन इन कारतूसों की प्रविष्टि उनके वैध शस्त्र लाइसेंस में दर्ज नहीं की गई। यह सीधे तौर पर आर्म्स एक्ट का उल्लंघन है, क्योंकि भारत में हथियार और गोला-बारूद के उपयोग, वितरण और रिकॉर्ड को लेकर बेहद सख्त कानून लागू हैं।
भोपाल पुलिस के अनुसार, प्रतियोगिता के दौरान सुरक्षा मानकों के तहत कुछ नामी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शूटर्स के हथियारों और दस्तावेजों की नियमित जांच की जा रही थी। इसी दौरान संयुक्त जांच टीम को कुछ दस्तावेजों में विसंगतियां दिखाई दीं। जब इन शूटर्स के शस्त्र लाइसेंस और इस्तेमाल किए गए कारतूसों की संख्या का मिलान किया गया, तो आंकड़ों में स्पष्ट अंतर पाया गया। जांच में यह बात सामने आई कि शूटर असलम परवेज और सुलेम अली खान ने प्रतियोगिता के दौरान जितने कारतूसों का उपयोग किया, वह उनके लाइसेंस में दर्ज अनुमत सीमा से कहीं अधिक था।
जब पुलिस ने इस संबंध में शूटर्स से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि अतिरिक्त कारतूस उन्हें शूटिंग रेंज पर ही उपलब्ध कराए गए थे। यह खुलासा जांच की दिशा को पूरी तरह बदल देने वाला था। जांच आगे बढ़ने पर यह स्पष्ट हुआ कि ये कारतूस नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन उनकी कोई आधिकारिक प्रविष्टि संबंधित शस्त्र लाइसेंस में नहीं की गई थी। यहीं से पूरे मामले का असली चेहरा सामने आया।
भारत में आर्म्स एक्ट के तहत किसी भी व्यक्ति या संस्था को गोला-बारूद देने, बेचने या उपलब्ध कराने की प्रक्रिया बेहद स्पष्ट है। नियमों के अनुसार, यदि किसी शूटर को प्रतियोगिता के लिए अतिरिक्त कारतूस दिए जाते हैं, तो उसकी विधिवत एंट्री शस्त्र लाइसेंस में करना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि हथियार और कारतूस का उपयोग केवल वैध और नियंत्रित परिस्थितियों में ही हो। लेकिन इस मामले में जांच एजेंसियों का कहना है कि NRAI ने इन नियमों की अनदेखी की।
कानूनी दृष्टि से इस मामले को बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि कारतूस का अवैध या अनियंत्रित वितरण केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। आर्म्स एक्ट के तहत, जिस संस्था या व्यक्ति द्वारा कारतूस वितरित किए जाते हैं, उसे व्यवहारिक रूप से एक ‘डीलर’ के समान जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे में नियमों का पालन करना और हर लेनदेन का रिकॉर्ड रखना उसकी कानूनी जिम्मेदारी होती है।
संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर भोपाल पुलिस ने नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 25(1)(बी)(1) और धारा 30 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत दोष सिद्ध होने पर कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह केवल औपचारिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी।
जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यह चूक केवल भोपाल की एक प्रतियोगिता तक सीमित थी या फिर इससे पहले आयोजित अन्य प्रतियोगिताओं में भी इसी तरह नियमों की अनदेखी की गई। इसके लिए NRAI द्वारा आयोजित बीते वर्षों की प्रतियोगिताओं के रिकॉर्ड, कारतूस वितरण से जुड़े दस्तावेज और शूटरों के लाइसेंस विवरण खंगाले जा रहे हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि यह एक नियमित प्रथा रही है, तो मामला और भी गंभीर हो सकता है।
इस घटनाक्रम ने खेल प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। निशानेबाजी जैसे खेल में, जहां हथियार और गोला-बारूद का सीधा इस्तेमाल होता है, वहां नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन सर्वोपरि माना जाता है। खिलाड़ियों की सुरक्षा के साथ-साथ आम नागरिकों की सुरक्षा भी इन नियमों से जुड़ी होती है। ऐसे में देश की शीर्ष शूटिंग संस्था पर इस तरह के आरोप लगना चिंता का विषय है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी असर पड़ सकता है। NRAI न केवल घरेलू प्रतियोगिताओं का संचालन करती है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और भारतीय शूटर्स के वैश्विक प्रतिनिधित्व में भी उसकी अहम भूमिका होती है। ऐसे में नियमों की अनदेखी के आरोप संस्था की साख को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच प्रारंभिक चरण में है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। NRAI से भी इस मामले में जवाब मांगा जाएगा और सभी पक्षों को सुना जाएगा। हालांकि, यह साफ है कि आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों में कानून किसी भी स्तर पर ढील नहीं देता, चाहे मामला कितनी ही बड़ी संस्था से क्यों न जुड़ा हो।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या खेल आयोजनों में सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं को लेकर पर्याप्त सतर्कता बरती जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले की जांच किस दिशा में जाती है और इसके क्या नतीजे सामने आते हैं, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।
