भोपाल की औद्योगिक दुनिया में सोमवार की सुबह एक ऐसी खबर गूंज उठी जिसने व्यापारिक जगत में हलचल पैदा कर दी। गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक प्रतिष्ठित प्लास्टिक फर्नीचर निर्माण कंपनी से करोड़ों रुपये की मशीनरी बेचे जाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि ये मशीनें कंपनी के मालिक की गैरमौजूदगी में, वह भी उनके विदेश दौरे पर होने के दौरान चोरी-छुपे बेची गईं। और इससे भी विचलित करने वाली बात यह है कि यह पूरा काम किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि कंपनी की महिला पार्टनर—जो रिश्ते में कारोबारी की भाभी लगती हैं—ने किया।

जैसे-जैसे यह मामला सामने आया, व्यापारिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं। उद्योग जगत में इस घटना को विश्वासघात और आंतरिक धोखाधड़ी की बड़ी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया है।
कहानी की शुरुआत: विदेश में थे कारोबारी विजय साधवानी, अचानक मिला चौंकाने वाला सच
विजय साधवानी, जो लालघाटी स्थित पंचवटी कॉलोनी के निवासी हैं, बीते दिनों कुछ सप्ताह के लिए विदेश दौरे पर गए थे। यह यात्रा पहले से तय थी और कंपनी का संचालन उनकी गैरमौजूदगी में उनकी पार्टनर और रिश्ते की भाभी सुहानी साधवानी, तथा उनके भाई राहुल साधवानी (कंपनी मैनेजर) देख रहे थे।
विजय को उम्मीद थी कि उनकी अनुपस्थिति में कंपनी सुचारू रूप से चलती रहेगी, क्योंकि वह अपने रिश्तेदारों—अपने ही परिवार—पर भरोसा करते थे। लेकिन विदेश में रहते हुए उन्हें एक जानकारी मिली, जिसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी।
उन्हें खबर मिली कि उनकी अपनी ही कंपनी की महंगी इंडस्ट्रियल मशीनें, जिनकी कुल कीमत लगभग चार करोड़ रुपये थी, इंदौर की एक फर्म को बेच दी गई हैं। न सिर्फ बेची गईं बल्कि लेन-देन उनकी अनुमति के बिना हुआ।
एक पल में सब कुछ उल्टा-पुल्टा हो गया। विजय तुरंत भारत लौटे और पूरी स्थिति को समझने की कोशिश में जुट गए।
फैक्ट्री की हालत देखकर मालिक रहे दंग — मशीनें गायब, कर्मचारी मौन
भारत लौटते ही विजय ने गोविंदपुरा स्थित एएस इंडस्ट्रीज़ की फैक्ट्री का रुख किया। यह कंपनी प्लास्टिक के फर्नीचर के निर्माण में मध्य प्रदेश की प्रमुख इकाइयों में गिनी जाती है। जब वे फैक्ट्री पहुंचे, तो उन्हें वहां जो दिखाई दिया, उसे देखकर वे स्तब्ध रह गए।
जहां पहले भारी-भरकम प्लास्टिक इंजेक्शन मोल्डिंग मशीनें, कटिंग लाइनें और हाई-प्रेशर मोल्डिंग सिस्टम खड़े रहे करते थे, वहां अब खाली जगह दिख रही थी। वह उपकरण, जिनकी आवाज़ से फैक्ट्री की मशीनरी गूंजती रहती थी, पूरी तरह से नदारद थे। सभी महंगी मशीनें किसी तरह गायब हो चुकी थीं।
जब विजय ने कर्मचारियों और स्टाफ से पूछताछ की, तो उन्होंने घबराहट में सिर्फ इतना कहा:
“मैडम ने सामान बेच दिया था। ट्रकों में लोड करवा दिया गया था।”
यह सुनते ही विजय को एक क्षण के लिए विश्वास ही नहीं हुआ कि उनकी अपनी पार्टनर—उनकी ही भाभी—ऐसा कर सकती हैं।
कैसे हुई करोड़ों की मशीनों की बिक्री? पूरी कहानी सामने आई
जांच में पता चला कि सुहानी साधवानी ने इंदौर की एक फर्म से संपर्क किया था।
फर्म को बताया गया कि कंपनी मशीनें अपग्रेड कर रही है और पुरानी मशीनें बेच रही है।
सुहानी ने:
- खुद मूल्य तय किया,
- डील पक्की की
- और मशीनें फैक्ट्री से उठवा भी दीं
यह पूरा खेल बिना किसी दस्तावेज पर विजय के हस्ताक्षर के हुआ था।
लेन-देन का पैसा भी कंपनी के आधिकारिक खाते में जमा नहीं हुआ।
यह स्पष्ट था कि यह सिर्फ एक व्यावसायिक निर्णय नहीं बल्कि एक गंभीर विश्वासघात था।
महिला पार्टनर की भूमिका: रिश्ते की आड़ में चल रहा था खेल?
सुहानी साधवानी रिश्ते में विजय की भाभी लगती हैं। कंपनी की साझेदारी इसी पारिवारिक विश्वास पर आधारित थी।
रिश्तों के आधार पर:
- उन्हें कंपनी के कई अधिकार दिए गए थे
- फैक्ट्री की गतिविधियों की अनुमति थी
- स्टाफ पर उनका नियंत्रण था
लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि इसी विश्वास का गलत फायदा उठाया गया।
कंपनी में काम करने वाले कुछ कर्मियों ने बताया कि सुहानी कई दिनों से मशीनों के मूल्यांकन करवाने में लगी थीं और इंदौर की फर्म से फोन पर लगातार बातचीत हो रही थी। लेकिन कोई भी यह बात विजय को नहीं बता पाया।
पुलिस जांच कहाँ पहुंची? FIR के बाद क्या हुआ आगे
विजय साधवानी ने तुरंत अशोकागार्डन थाने में लिखित शिकायत दर्ज करवाई।
शिकायत मिलते ही पुलिस सक्रिय हुई और सुहानी साधवानी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया।
पुलिस के मुताबिक़:
- यह मामला धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और संपत्ति के गैरकानूनी निपटान से संबंधित है
- फर्म का दस्तावेजी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है
- इंदौर फर्म से भी संपर्क किया जा रहा है
- मशीनों को जब्त करने की भी तैयारी है
पुलिस का परीक्षण यह भी है कि:
- मशीनें किस मूल्य पर बिकीं?
- पैसा कहां गया?
- क्या अन्य कर्मचारी या मैनेजर राहुल भी शामिल थे?
जांच में कई अहम सुराग मिले हैं, लेकिन अभी पुलिस ने पूरे विवरण सार्वजनिक नहीं किए हैं।
व्यवसायिक जगत में बढ़ी चिंताएं — पार्टनरशिप पर उठे सवाल
घटना के बाद भोपाल के व्यापारिक समुदाय में यह विषय तीखी बहस का मुद्दा बन गया है। कई उद्योगपति कह रहे हैं कि:
- पार्टनरशिप में ट्रस्ट की भूमिका बहुत बड़ी होती है
- वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता जरूरी है
- रिश्तेदारी और बिजनेस अक्सर टकराते हैं
कई व्यापारी यह भी कह रहे हैं कि यह घटना दूसरों के लिए सीख है कि व्यापार में “भावनाओं से ज्यादा कागज़” बोलते हैं।
परिवार में तनाव: रिश्ते और व्यापार के बीच गहराती खाई
यह घटना सिर्फ व्यापारिक विवाद नहीं, बल्कि पारिवारिक मतभेद का भी रूप ले चुकी है।
एक तरफ विजय साधवानी इस घटना को विश्वासघात बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सुहानी साधवानी अभी तक खुलकर सामने नहीं आई हैं।
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार दोनों परिवारों के बीच संवाद टूट चुका है।
कानूनी मोर्चा: क्या सुहानी को गिरफ्तारी का सामना करना पड़ेगा?
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि:
- पार्टनरशिप कानून में बिना अनुमति संपत्ति बेचना अपराध है
- खासकर जब वह करोड़ों की कीमत की हो
- IPC की कई धाराएं लागू हो सकती हैं
इसमें शामिल हैं:
- धारा 406 — आपराधिक विश्वासघात
- धारा 420 — धोखाधड़ी
- धारा 409 — विश्वस्त पद का दुरुपयोग
- धारा 120B — आपराधिक साजिश
यदि दोष सिद्ध हुआ तो यह मामला गंभीर सजा तक जा सकता है।
निष्कर्ष: भोपाल की उद्योग दुनिया के लिए बड़ा सबक
यह कहानी सिर्फ एक कंपनी की मशीनें बिकने की नहीं, बल्कि विश्वास टूटने की कहानी है।
यह हर व्यापारी के लिए चेतावनी भी है कि:
- व्यापार में पारदर्शिता जरूरी है
- रिश्तों पर आधारित व्यापार जोखिमभरा हो सकता है
- लिखित अनुमतियों का महत्व अत्यधिक है
यह घटना आने वाले दिनों में लंबी कानूनी लड़ाई का रूप ले सकती है।
