भोपाल रेलवे स्टेशन, जिसे मध्यप्रदेश की राजधानी का प्रमुख परिवहन केंद्र माना जाता है, वहां यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्टेशन परिसर में पार्किंग व्यवस्था संभालने वाले कर्मचारियों पर गुंडागर्दी और मनमानी के आरोप पहले भी लगते रहे हैं, लेकिन हालिया घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आम यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशन पर न्याय और सम्मान के साथ व्यवहार पाना कितना मुश्किल होता जा रहा है।

यह मामला स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक की ओर स्थित पार्किंग क्षेत्र और मालगोदाम से जुड़ा हुआ है, जहां एक यात्री सिर्फ अपने पार्सल की जानकारी लेने पहुंचा था, लेकिन उसे जो अनुभव झेलना पड़ा, उसने रेलवे प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।
स्टेशन पर सामान्य दिन, लेकिन यात्री के लिए बना डरावना अनुभव
घटना वाले दिन युवक अपनी निजी कार से भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचा था। उसका उद्देश्य बेहद साधारण था। उसे स्टेशन के मालगोदाम में आए एक पार्सल के बारे में जानकारी लेनी थी। इसके लिए उसने प्लेटफॉर्म नंबर एक की ओर अपनी कार बाहर की पार्किंग में खड़ी की और पैदल मालगोदाम की ओर बढ़ गया।
युवक के अनुसार उसने तय समय के लिए पार्किंग शुल्क देने की भी तैयारी की थी और किसी तरह के विवाद की कोई वजह नहीं थी। लेकिन स्टेशन की पार्किंग में तैनात कर्मचारी अमित सिंह पवार की नजर जैसे ही उस पर पड़ी, विवाद की शुरुआत हो गई।
पार्किंग कर्मचारी ने रोका रास्ता, शुरू हुई बहस
युवक का आरोप है कि पार्किंग कर्मचारी ने उससे कठोर लहजे में सवाल किया कि वह कहां जा रहा है और कितनी देर के लिए कार खड़ी करेगा। युवक ने शांतिपूर्वक बताया कि उसे मालगोदाम में अपने पार्सल की जानकारी लेनी है और वह थोड़ी देर में लौट आएगा।
इसके बावजूद कर्मचारी ने कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। बात इतनी बढ़ गई कि कर्मचारी ने युवक पर पार्किंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उसे डराने-धमकाने की कोशिश की। युवक के अनुसार उसने जब इसका विरोध किया और शालीनता से बात करने को कहा, तो कर्मचारी का रवैया और आक्रामक हो गया।
झूमाझटकी और हाथापाई के आरोप
आरोप है कि बहस के दौरान पार्किंग कर्मचारी अमित सिंह पवार ने युवक के साथ झूमाझटकी शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक स्टेशन परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई। युवक का कहना है कि उसे जबरन रोका गया और शारीरिक रूप से धक्का-मुक्की की गई।
यह घटना रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थान पर हुई, जहां हर वक्त यात्री, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे मौजूद रहते हैं। ऐसे में इस तरह की गुंडागर्दी न सिर्फ एक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि पूरे स्टेशन की व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।
मालगोदाम तक पहुंचना बना चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम के कारण युवक कुछ समय तक मालगोदाम तक पहुंच ही नहीं पाया। उसका कहना है कि वह मानसिक रूप से परेशान हो गया और उसे डर लगने लगा कि कहीं मामला और न बिगड़ जाए। बाद में आसपास मौजूद कुछ लोगों के हस्तक्षेप से स्थिति थोड़ी शांत हुई, तब जाकर युवक मालगोदाम की ओर जा सका।
हालांकि तब तक उसका समय और मानसिक शांति दोनों खराब हो चुके थे। एक साधारण सा काम, जो कुछ मिनटों में पूरा हो सकता था, वह विवाद और तनाव में बदल गया।
स्टेशन पर पार्किंग व्यवस्था पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
भोपाल रेलवे स्टेशन पर पार्किंग कर्मचारियों की मनमानी कोई नई बात नहीं है। पहले भी कई यात्रियों ने अधिक शुल्क वसूलने, बदतमीजी करने और जबरन वाहन हटवाने जैसे आरोप लगाए हैं। लेकिन इन शिकायतों पर ठोस कार्रवाई न होने के कारण कर्मचारियों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।
यात्रियों का कहना है कि पार्किंग ठेकेदार और उनके कर्मचारी खुद को स्टेशन का मालिक समझने लगते हैं और रेलवे प्रशासन की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार तो विवाद की स्थिति में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद यात्री खुद को असहाय महसूस करते हैं।
रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्टेशन परिसर में तैनात कर्मचारियों का व्यवहार यात्रियों के प्रति कैसा होना चाहिए, यह तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन जब ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह साफ हो जाता है कि निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था कमजोर है।
यात्री यह सवाल पूछ रहे हैं कि अगर स्टेशन पर पार्सल की जानकारी लेने आए आम नागरिक के साथ ऐसा व्यवहार हो सकता है, तो दूर-दराज से आए यात्रियों की सुरक्षा का क्या भरोसा है।
पीड़ित की मांग: हो सख्त कार्रवाई
युवक ने इस पूरे मामले की शिकायत संबंधित अधिकारियों से करने की बात कही है। उसका कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। उसने मांग की है कि पार्किंग कर्मचारियों की भूमिका की जांच हो और दोषी पाए जाने पर सख्त कदम उठाए जाएं।
उसका यह भी कहना है कि रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर यात्रियों को डर के साए में नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल में अपनी जरूरतें पूरी करने का अधिकार होना चाहिए।
यात्रियों में नाराजगी, भरोसे पर चोट
इस घटना के बाद स्टेशन पर मौजूद कई अन्य यात्रियों ने भी नाराजगी जाहिर की। लोगों का कहना है कि वे पहले ही ट्रेनों की देरी, भीड़ और अव्यवस्था से परेशान रहते हैं। ऊपर से अगर पार्किंग और स्टेशन कर्मचारियों का ऐसा व्यवहार झेलना पड़े, तो यात्रा का अनुभव पूरी तरह खराब हो जाता है।
यात्रियों का भरोसा तभी बनेगा जब स्टेशन पर नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से हो और कर्मचारियों को जवाबदेह बनाया जाए।
निष्कर्ष: व्यवस्था सुधार की सख्त जरूरत
भोपाल रेलवे स्टेशन की यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति के साथ हुई बदसलूकी नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की खामी को उजागर करती है। अगर समय रहते पार्किंग व्यवस्था और कर्मचारियों के व्यवहार पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो ऐसी घटनाएं आम होती जाएंगी।
रेलवे स्टेशन यात्रियों के लिए सुविधा और सुरक्षा का प्रतीक होना चाहिए, न कि डर और अव्यवस्था का। अब देखना यह होगा कि इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या भविष्य में यात्रियों को ऐसे अनुभवों से राहत मिल पाएगी।
