भोपाल, मध्यप्रदेश की राजधानी, पिछले कुछ समय से वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट का सामना कर रही है। शहर के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ता जा रहा है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। हाल ही में जारी किए गए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के लाइव मानिटरिंग आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 98 प्रतिशत शहरों में पीएम 2.5 यानी धूल के सूक्ष्म कणों का स्तर सामान्य से अधिक है। इस सूची में सिंगरौली सबसे प्रदूषित शहर के रूप में सामने आया है, जबकि भोपाल दूसरे स्थान पर दर्ज किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम 2.5 कण बेहद छोटे होते हैं और इन्हें आंखों, नाक और श्वसन तंत्र के माध्यम से शरीर में प्रवेश करने पर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। इन सूक्ष्म कणों के कारण लोगों को सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन, गले में खराश और अन्य श्वसन संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

नगर निगम की टीम ने बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर सक्रिय कदम उठाना शुरू कर दिया है। हाल ही में निगम की सहायक आयुक्त कीर्ति चौहान और जोन नंबर-आठ की टीम ने बिट्टन मार्केट स्थित बापू की कुटिया रेस्टोरेंट का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि रेस्टोरेंट में तंदूर से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है। इसके चलते नगर निगम ने रेस्टोरेंट पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अधिकारियों का कहना है कि तंदूर का धुआं छोटे-छोटे कणों में बंटकर पूरे क्षेत्र में फैलता है और लोगों की श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमित जांच और सख्त नियम लागू करना बेहद जरूरी है। साथ ही शहरवासियों को भी जागरूक होकर अपनी दैनिक आदतों में बदलाव लाने की आवश्यकता है। निजी वाहनों का कम उपयोग, हरित क्षेत्र का विकास, उद्योगों और रेस्टोरेंट्स में धुएं के नियंत्रण के उपाय, और सार्वजनिक परिवहन को प्रोत्साहित करना प्रदूषण को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।
भोपाल के निवासियों के लिए यह समय चेतावनी का है। बढ़ते प्रदूषण के बीच नागरिकों को मास्क का प्रयोग, साफ पानी का सेवन, और अधिकतर घर के अंदर रहने की सलाह दी जा रही है। साथ ही बच्चों, बुजुर्गों और श्वसन रोगियों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। नगर निगम लगातार ऐसे रेस्टोरेंट्स और उद्योगों पर कार्रवाई कर रहा है, जो वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं।
शहर के नागरिक अब उम्मीद कर रहे हैं कि नगर निगम और राज्य सरकार मिलकर वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ठोस और दीर्घकालिक योजनाएं लागू करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जुर्माने और कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि लोगों की जागरूकता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण है।
यह खबर हमें याद दिलाती है कि प्रदूषण सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक को अपने हिस्से का योगदान देना होगा। हर छोटा कदम जैसे पेड़ लगाना, प्लास्टिक कम करना, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करना और धुएं वाले साधनों का नियंत्रण करना, पूरे शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार ला सकता है।
भोपाल के लिए यह चुनौती भरा समय है, लेकिन सही कदम उठाए जाने पर शहर एक बार फिर स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण की ओर लौट सकता है।
