राजधानी भोपाल में इन दिनों एक ऐसा साइबर अपराध तेजी से फैल रहा है, जिसने शहर के नागरिकों और सुरक्षा एजेंसियों को गहरी चिंता में डाल दिया है। इंटरनेट की दुनिया में तेजी से बढ़ती सक्रियता के बीच अब सेक्सटॉर्शन का खतरा एक नए और जटिल रूप में सामने आने लगा है। साइबर अपराधियों द्वारा वीडियो कॉल, नकली प्रोफाइल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन संबंधों के नाम पर लोगों को फंसाने की घटनाएं पिछले महीनों में कई गुना बढ़ चुकी हैं। इसी बढ़ती गतिविधि को देखते हुए साइबर क्राइम पुलिस ने शहर के नागरिकों के लिए तत्काल चेतावनी जारी की है और लोगों से कहा है कि वे किसी भी प्रकार की ऑनलाइन बातचीत में अत्यधिक सजग रहें।

भोपाल की साइबर यूनिट ने यह स्वीकार किया है कि पिछले महीनों में उन्हें रिकॉर्ड संख्या में शिकायतें प्राप्त हुई हैं। खासकर युवाओं, नौकरीपेशा लोगों और सोशल मीडिया पर सक्रिय उपयोगकर्ताओं को निशाना बनाने के मामले अधिक सामने आए हैं। अपराधियों का तरीका बहुत परिष्कृत हो चुका है और वे भरोसा जीतने के लिए न केवल मनोवैज्ञानिक युक्तियों का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि तकनीक का उपयोग कर पीड़ितों की स्थिति को कमजोर कर देते हैं।
पुलिस ने बताया कि शहर के कई लोग पहले ही इन गिरोहों का शिकार बन चुके हैं और उनके निजी वीडियो या फोटो को सार्वजनिक करने की धमकी देकर उनसे बड़ी रकम की मांग की गई है। कई बार अपराधी परिवार और दोस्तों को भेजने की धमकी देकर पीड़ित को मानसिक रूप से इतना तोड़ देते हैं कि वह ब्लैकमेलर की हर मांगी गई शर्त पूरी कर देता है। बढ़ते मामलों ने इस पूरे घटनाक्रम को एक गंभीर सामाजिक समस्या का रूप दे दिया है।
सेक्सटॉर्शन की परछाई: ऑनलाइन दुनिया की गहरी खामोशी में उभरता भयानक चेहरा
सेक्सटॉर्शन केवल एक साइबर अपराध नहीं, बल्कि कई बार यह भावनात्मक शोषण और मानसिक प्रताड़ना का रूप भी ले लेता है। इसका मूल तरीका साधारण दिखता है लेकिन उसका असर बेहद जटिल और खतरनाक होता है। अपराधी पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर फेसबुक, इंस्टाग्राम, डेटिंग ऐप्स या व्हाट्सऐप के जरिए पीड़ित के जीवन में प्रवेश करते हैं। वे पहले परिचय बनाते हैं, फिर बातचीत और उसके बाद अंतरंग वीडियो कॉल का जाल बिछाया जाता है।
अपराधी वीडियो कॉल के दौरान पीड़ित को ऐसी स्थिति में ले आते हैं जहां वह असहज और असुरक्षित महसूस करने लगे। इस दौरान अपराधी स्क्रीन रिकॉर्डर या अन्य सॉफ्टवेयर की मदद से वीडियो बना लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है असली खेल, जिसमें पीड़ित से आर्थिक लाभ उठाने की कोशिश की जाती है। धमकियों और डर का इस्तेमाल कर उन्हें मानसिक रूप से कमजोर कर दिया जाता है।
भोपाल में क्यों तेजी से बढ़ रहे ऐसे मामले?
शहर के साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण इंटरनेट का बढ़ता उपयोग, अकेलापन, ऑनलाइन समाज का विस्तार, आधुनिक जीवनशैली, और डिजिटल जागरूकता की कमी है। कई लोग अनजान प्रोफाइल के पीछे छिपे अपराधियों की पहचान समझ नहीं पाते और बातचीत को एक सामान्य परिचय समझकर आगे बढ़ाते रहते हैं। दूसरी ओर अपराधियों ने अपने तरीके इतने विकसित कर लिए हैं कि वे पीड़ितों को वास्तविक व्यक्तियों जैसा विश्वास दिलाने में सफल हो जाते हैं।
भोपाल जैसे मध्य शहर में जहां पढ़ने, काम करने और रहने के लिए बड़ी संख्या में युवा लोग मौजूद हैं, वहां ऐसे मामलों का बढ़ना स्वाभाविक है। एक और कारण यह है कि अपराधी शहर-विशेष को भी टारगेट करते हैं, जहां उन्हें लगता है कि लोग तकनीकी रूप से कम जागरूक और आसानी से दबाव में आ जाने वाले हो सकते हैं।
पुलिस की बढ़ती चौकसी और नागरिकों से अपील
साइबर क्राइम विभाग ने अपनी चेतावनी में साफ तौर पर बताया है कि किसी भी नागरिक को अनजान वीडियो कॉल, संदिग्ध मैसेज, अजीब प्रोफाइल तस्वीरों या अचानक की गई फ्रेंड रिक्वेस्ट पर तत्काल सतर्क हो जाना चाहिए। पुलिस ने यह भी कहा है कि यदि कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन धमकियों का सामना कर रहा है तो वह तुरंत शिकायत दर्ज करवाए। कई लोग डर या शर्म की वजह से शिकायत नहीं करते, जिससे अपराधियों के हौसले और बढ़ जाते हैं।
पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि कई गिरोह इन घटनाओं के पीछे काम कर रहे हैं और उनकी गतिविधियां शहर और राज्य से परे अन्य राज्यों से भी संचालित हो सकती हैं। ऐसे में अपराधियों तक पहुंचने के लिए तकनीक, डिजिटल फोरेंसिक और अंतरराज्यीय सहयोग की भी आवश्यकता है।
मनोवैज्ञानिक प्रभाव: पीड़ितों के मन में गहरी चोट
कई मामलों में देखा गया है कि सेक्सटॉर्शन से पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन जीने में कठिनाई महसूस करने लगता है। अपराधियों द्वारा दी जाने वाली धमकियां और भय का माहौल उनके भीतर अवसाद, चिंता और सामाजिक डर पैदा कर देता है। विशेषकर युवा लोग, जो अपने परिवार से कुछ बातें छिपाकर चलते हैं, इस स्थिति में और अधिक अकेले पड़ जाते हैं। इस मानसिक बोझ को संभालना उनके लिए मुश्किल हो जाता है। पुलिस रिपोर्ट बताती है कि ऐसे मामलों में कई लोग आर्थिक रूप से भी टूट जाते हैं, क्योंकि ब्लैकमेलर कई बार एक बार पैसे मिलने के बाद बार-बार नई मांगें करने लगते हैं। इस तरह अपराध का चक्र चलता रहता है।
जागरूकता की आवश्यकता: घर-परिवार में संवाद जरूरी
पुलिस ने यह भी कहा है कि केवल चेतावनी जारी कर देना ही समाधान नहीं है। समाज को खुद भी इस विषय पर संवाद शुरू करना होगा। परिवारों को अपने बच्चों से इस विषय में बात करनी चाहिए, क्योंकि बहुत से युवा डर के कारण घर वालों को अपनी स्थिति बता ही नहीं पाते। इस विषय पर स्कूलों, कॉलेजों और संस्थानों में भी जागरूकता कार्यक्रम होने चाहिए ताकि युवाओं को पहले ही समझाया जा सके कि डिजिटल दुनिया में कदम रखते समय किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है।
शिकायत कहां करें
भोपाल साइबर क्राइम हेल्पलाइन: 9479990636
राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन: 1930
ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: cybercrime.gov.in
भविष्य की दिशा
भोपाल में बढ़ते सेक्सटॉर्शन मामलों ने एक नई सामाजिक और डिजिटल चुनौती खड़ी कर दी है। पुलिस लगातार इस पर काम कर रही है, लेकिन वास्तविक समाधान केवल उसी दिन होगा जब लोग खुद जागरूक होंगे, सतर्क रहेंगे और अपराधियों को किसी भी प्रकार का मौका ही नहीं देंगे। डिजिटल दुनिया जितनी विशाल है, उतनी ही जोखिमपूर्ण भी। ऐसे में सावधानी ही सुरक्षा है।
