सर्दियों का मौसम आते ही शहरों में हवा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव दिखने लगता है। इस बार भोपाल समेत मध्यप्रदेश के शहरों में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। राजधानी भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, अरेरा कॉलोनी में AQI 300, कलेक्टोरेट क्षेत्र यानी पुराने भोपाल में 307, और टीटी नगर में 336 दर्ज किया गया है। यह स्तर स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है।

महीन कण और स्वास्थ्य पर प्रभाव
वायु प्रदूषण में उपस्थित महीन कण (PM2.5 और PM10) शरीर में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। ये कण फेफड़ों तक पहुंचकर सांस लेने में समस्या पैदा करते हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक जहरीली हवा के संपर्क में रहने से दिमाग की नसें सिकुड़ सकती हैं, ब्लड फ्लो रुकने का खतरा बढ़ जाता है, और हृदय तथा मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
किसान, वाहन धुंआ, फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआँ और सर्दियों में घरों में जलाए जाने वाले कोयला, लकड़ी और पत्तियों का धुआँ शहर की हवा को जहरीला बनाता है। इस मौसम में विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की बीमारियों से ग्रस्त लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
भोपाल के विभिन्न क्षेत्रों की स्थिति
भोपाल के प्रमुख क्षेत्रों में प्रदूषण की गंभीरता अलग-अलग दर्ज की गई है।
- अरेरा कॉलोनी: यहाँ AQI 300 दर्ज किया गया, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है।
- कलेक्टोरेट क्षेत्र: पुराने भोपाल में AQI 307, सांस की समस्या वाले लोगों के लिए बेहद खतरनाक।
- टीटी नगर: 336 AQI, सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र, स्वास्थ्य संबंधी आपातकालीन स्थिति के संकेत।
विशेषज्ञों का कहना है कि 300+ AQI वाले क्षेत्रों में लोगों को घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए, और यदि बाहर जाना अनिवार्य हो तो एन-95 मास्क का उपयोग करना चाहिए।
प्रदूषण का कारण और सर्दियों का प्रभाव
सर्दियों में तापमान कम होने के कारण वायु में मौजूद प्रदूषक कण नीचे जमते हैं। सुबह और शाम के समय तापमान के गिरने से हवा स्थिर रहती है, और जहरीले कणों का स्तर बढ़ जाता है।
भोपाल में भी ठंडी हवाओं की कमी और शहर के वायु मार्गों में रुकावट के कारण वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। यह स्थिति हृदय रोग, अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं को जन्म देती है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
शहर के पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यदि नागरिकों और प्रशासन ने संयुक्त प्रयास नहीं किया तो अगले कुछ वर्षों में शहर की हवा और भी जहरीली हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि:
- वाहनों के धुआँ पर नियंत्रण
- उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण पर सख्ती
- घरों में जलाए जाने वाले ईंधन की मात्रा कम करना
- हरित पट्टी और पौधारोपण बढ़ाना
ये उपाय हवा की गुणवत्ता में सुधार ला सकते हैं।
लोगों की प्रतिक्रिया और जीवन शैली में बदलाव
भोपाल के नागरिक सर्दियों में हवा की खराब गुणवत्ता से चिंतित हैं। स्कूलों में बच्चों को सुबह और शाम के समय बाहर जाने से मना किया जा रहा है। नागरिकों ने सोशल मीडिया पर भी चेतावनी दी है कि लोग मास्क पहनें और ज्यादा समय खुली हवा में न बिताएं।
कुछ परिवारों ने एयर प्यूरिफायर और इंडोर प्लांट्स का सहारा लिया है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य के लिए घर के अंदर हवा को शुद्ध रखना भी आवश्यक है।
निष्कर्ष
भोपाल में सर्दियों के मौसम में प्रदूषण का स्तर भयावह हो गया है। महीन कणों के शरीर में प्रवेश करने से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। नागरिकों, प्रशासन और उद्योगों को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है ताकि हवा की गुणवत्ता में सुधार हो और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस समय मास्क पहनना, घर में शुद्ध हवा बनाए रखना और बाहर अनावश्यक समय बिताने से बचना स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
