बिहार में हाल ही में एक राजनीतिक बवाल ने जोर पकड़ लिया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और दिल्ली स्थित बिहार निवास को लेकर नीतीश कुमार की सरकार पर तीखा हमला किया है। यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब यह खबर सामने आई कि दिल्ली में लालू प्रसाद यादव के तत्कालीन मुख्यमंत्री काल में निर्मित बिहार निवास को तोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

दिल्ली स्थित बिहार निवास का निर्माण 1994 में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के द्वारा कराया गया था। यह भवन अपनी भव्यता, मजबूती और ऐतिहासिक महत्व के कारण राज्य के लिए गौरव का प्रतीक माना जाता है। पिछले वर्षों में इस इमारत का सौंदर्यकरण किया गया और लगभग 2 करोड़ रुपये खर्च कर इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया। भवन की संरचना इतनी मजबूत है कि इसे आने वाले 50-60 वर्षों तक सुरक्षित माना जा सकता है। इसके अलावा भवन की ऊंचाई और डिज़ाइन के कारण जल जमाव की समस्या भी नहीं होती।
तेजस्वी यादव की टिप्पणी और आरोप
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपनी फेसबुक पोस्ट और सोशल मीडिया पर सरकार से सवाल उठाया कि यदि भवन पूरी तरह सुरक्षित और भव्य है, तो इसे तोड़ने की क्या आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे कोई तकनीकी या सुरक्षा कारण नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह राजनीतिक ईर्ष्या और लालू परिवार की विरासत मिटाने की साजिश है।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार निवास के पोर्टिको पर लालू प्रसाद यादव का नाम अंकित है। जब भी वहां सरकारी वाहन आते हैं, तो इस नाम को देखकर वर्तमान सरकार में बैठे अधिकारी असहज महसूस करते हैं। यही कारण है कि सरकार इस इमारत को ध्वस्त कर नया भवन बनाना चाहती है, जिसमें अपने पसंदीदा ठेकेदारों के नाम और अपनी छवि का प्रचार किया जा सके।
सरकार पर आर्थिक आरोप
तेजस्वी यादव ने यह भी कहा कि बिहार निवास को तोड़ने और नया भवन बनाने पर अनुमानित खर्च लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक होगा। उन्होंने इसे राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए गंभीर खतरा बताया। बिहार वर्तमान में 3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज में डूबा हुआ है। प्रत्येक राज्यवासी लगभग 25 हजार रुपये का कर्जदार है और राज्य प्रतिदिन 62 करोड़ रुपये और प्रतिवर्ष लगभग 28 हजार करोड़ रुपये केवल कर्ज के ब्याज में खर्च कर रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गरीब राज्य की गाढ़ी कमाई को केवल अपनी राजनीतिक ईर्ष्या मिटाने और नाम चमकाने के लिए बर्बाद करना उचित है। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव के बनाए हुए भवन को सुरक्षित रखने में ही सामाजिक और ऐतिहासिक दृष्टि से समझदारी है।
पुराने बनाम नए बिहार भवन
तेजस्वी यादव ने यह भी तुलना की कि बिहार निवास के अलावा बिहार भवन भी राज्य का महत्वपूर्ण प्रशासनिक भवन है। हालांकि, बिहार भवन पुराना है और कई वर्षों से मौजूद है, लेकिन उस इमारत को कोई हाथ नहीं लगा रहा क्योंकि वहां लालू प्रसाद यादव का नाम अंकित नहीं है। उन्होंने यह तर्क दिया कि सारी खुन्नस और नाराजगी सिर्फ नाम को लेकर है।
तेजस्वी ने कहा कि बिहार निवास को ध्वस्त कर नया भवन बनाने का निर्णय राजनीतिक स्वार्थ और आत्ममुग्धता की परिणति है। वर्तमान सरकार का उद्देश्य केवल अपने नाम का प्रचार करना है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि इतिहास को मिटाना संभव नहीं है और लालू प्रसाद यादव द्वारा सामाजिक न्याय और गरीबों के उत्थान के लिए किए गए कार्य हमेशा बिहार की जनता और इतिहास में जीवित रहेंगे।
साजिश या आवश्यकता?
यह विवाद राजनीतिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है। तेजस्वी यादव का आरोप है कि यह निर्णय तकनीकी नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध और नाम मिटाने की साजिश है। उनकी यह राय है कि यदि किसी कारणवश भवन को तोड़ने का औचित्य है, तो सरकार को जनता के सामने तथ्यात्मक और स्पष्ट कारण देना चाहिए।
तेजस्वी यादव का मानना है कि इतिहास को नष्ट करना और भव्य, मजबूत भवन को जमींदोज करना बिहार की जनता के प्रति अन्याय है। उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव की विरासत को मिटाने का प्रयास केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है, जबकि बिहार निवास अपने ऐतिहासिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण हमेशा सुरक्षित रहना चाहिए।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और भविष्य
तेजस्वी यादव की यह टिप्पणी राज्य में व्यापक चर्चा का विषय बन गई है। विपक्ष ने इसे नीतीश सरकार के खिलाफ गंभीर आरोप के रूप में देखा है। उनके अनुसार, यह कदम सरकार की कुंठित मानसिकता और राजनीतिक ईर्ष्या का प्रतीक है।
भविष्य में यदि यह विवाद और बढ़ता है, तो संभव है कि न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर भी इस पर ध्यान दिया जाएगा। तेजस्वी यादव ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि इमारत को ध्वस्त किया जा सकता है और शिलापट्ट हटाया जा सकता है, लेकिन लालू प्रसाद यादव द्वारा किए गए सामाजिक और गरीब कल्याणकारी कार्य इतिहास और बिहार की जनता के दिलों से नहीं मिटाए जा सकते।
निष्कर्ष
बिहार निवास विवाद केवल एक इमारत का मामला नहीं है। यह राजनीतिक विचारधारा, इतिहास और सत्ता के दांव-पेंच का प्रतीक बन गया है। तेजस्वी यादव ने स्पष्ट किया कि लालू परिवार की विरासत को मिटाने का प्रयास किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। बिहार निवास की भव्यता, मजबूती और ऐतिहासिक महत्व इसे केवल संरक्षण योग्य बनाते हैं।
राज्य में यह विवाद आगे बढ़ने की पूरी संभावना है और आने वाले समय में इसका राजनीतिक और प्रशासनिक असर दोनों पर देखा जाएगा।
