मानव मस्तिष्क शरीर की उस संरचना का केंद्र है, जिसकी कार्यशैली शरीर के लगभग हर हिस्से को नियंत्रित करती है। सोचने समझने से लेकर चलने-फिरने, देखने-सुनने, बोलने और संतुलन बनाने तक, हर प्रक्रिया का संचालन इसी केंद्र से होता है। ऐसे में जब दिमाग की नस फट जाए या मस्तिष्क में रक्तस्राव शुरू हो जाए, तब स्थिति अचानक अत्यंत गंभीर रूप ले लेती है। यह स्थिति अक्सर अचानक जन्म लेती है, परंतु इसके पहले शरीर कई संकेत देता है जिन्हें हल्के में लेना भारी गलती साबित हो सकती है।\

ब्रेन हैमरेज दरअसल एक ऐसी चिकित्सा परिस्थिति है, जिसमें मस्तिष्क की किसी नस में रक्त प्रवाह असामान्य रूप से फटने, रिसने या क्षतिग्रस्त होने के कारण रक्त मस्तिष्क ऊतकों से गुजरने लगता है। यही रक्त जब आसपास जमा होने लगता है, तब मस्तिष्क पर दबाव बढ़ता है और मरीज की स्थिति कुछ ही मिनटों में बिगड़ सकती है। यह उसी क्षण जीवन-मृत्यु का प्रश्न भी बन जाती है।
वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि यदि शुरुआती लक्षणों को पहचाना जाए और तुरंत उपचार शुरू हो, तो कई गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है।
शरीर पहले से चेतावनी देता है, पहचान जरूरी है
जब मस्तिष्क में रक्त प्रवाह असामान्य रूप से प्रभावित होता है, तब शरीर कई तरीकों से संकेत देने लगता है। सामान्य व्यक्ति अक्सर इन संकेतों को नजरअंदाज कर देता है, क्योंकि यह लक्षण आम दिनचर्या की तकलीफों से मिलते-जुलते होते हैं। चिकित्सक कहते हैं कि ब्रेन हैमरेज अचानक नहीं होता। शरीर पहले से कुछ बदलाव करता है, जिन्हें पहचानना सुरक्षा कवच बन सकता है।
अचानक उत्पन्न होने वाला तीव्र सिरदर्द
यदि किसी व्यक्ति को अचानक ऐसा सिरदर्द होता है, जिसका स्वरूप पुराने सिरदर्द जैसे माइग्रेन या तनाव जनित सिरदर्द से अलग हो, तो यह संकेत हो सकता है कि दिमाग में दबाव तेजी से बढ़ रहा है। कई मरीज बताते हैं कि यह सिरदर्द ऐसा प्रतीत होता है मानो सिर के अंदर कुछ फट रहा हो।
यह सिरदर्द अचानक आता है, तीव्र होता है, दवाओं से जल्दी नहीं सुधरता और इसके साथ अक्सर अन्य लक्षण भी जुड़ते हैं।
घूमना, चक्कर और संतुलन बिगड़ना
दिमाग में जब रक्त पहुंचाने वाली नाड़ी प्रभावित होती है, तो व्यक्ति अचानक चलते-चलते लड़खड़ा सकता है। जमीन अस्थिर लगने लगती है, जैसे पैर किसी मजबूत सतह पर नहीं हों। आंखों के सामने अंधेरा छा जाने की स्थिति भी बन सकती है।
कई लोग इस अवस्था को कमजोरी या थकान समझकर विश्राम कर लेते हैं, जबकि यह स्थिति गंभीर दिमागी समस्या का संकेत हो सकती है।
शरीर का किसी भाग का सुन्न या निष्क्रिय हो जाना
ब्रेन हैमरेज से पहले कुछ व्यक्तियों में एक ओर के हाथ या पैर में सुन्नपन महसूस होना शुरू होता है। यह स्थिति अत्यंत आवश्यक संकेत है क्योंकि मस्तिष्क का वही हिस्सा, जहां रक्तस्राव हो रहा होता है, उसी ओर की नसें प्रतिक्रिया देनी बंद कर देती हैं।
यह सुन्नपन हल्का भी हो सकता है या ऐसी कमजोरी में बदल सकता है, जिसमें व्यक्ति स्वयं को खड़ा करने में भी असमर्थ हो जाता है।
बोलने में कठिनाई और शब्द व्यवस्थित न निकल पाना
मस्तिष्क का वह भाग जो भाषा समझने और शब्द बोलने का संचालन करता है, यदि दबाव में आता है, तो वाणी प्रभावित होना शुरू हो जाती है। मरीज अपने शब्दों को नहीं जोड़ पाता, वाक्य बोलते समय शब्द उलट-पुलट हो जाते हैं और कभी-कभी व्यक्ति स्वयं को अभिव्यक्त करने में असमर्थ हो जाता है।
चिकित्सक बताते हैं कि भाषा-संबंधी बाधाएं अक्सर स्ट्रोक और ब्रेन हैमरेज दोनों के शुरुआती संकेत होते हैं। ऐसा होने पर स्थिति को मामूली समझना भयंकर भूल है।
मतली, उल्टी और भोजन पचाने में परेशानी
जब मस्तिष्क का दबाव बढ़ता है, तो उसका असर सीधे शारीरिक संतुलन और पाचन क्रिया पर पड़ता है। मरीज बिना किसी कारण उल्टी करने लगता है, वह कमजोरी के साथ चक्कर महसूस करता है, और कई बार यह समस्या लंबे समय तक जारी रहती है। यह सामान्य पेट खराब होने की स्थिति जैसा लग सकता है, लेकिन अगर इसके साथ सिरदर्द, सुन्नपन या बोलने में कठिनाई जुड़ जाए तो यह गंभीर संकट का संकेत है।
मानसिक भ्रम, मतिभ्रम, प्रतिक्रिया धीमी पड़ना
कभी-कभी मरीज अपने आसपास हो रही परिस्थितियों को समझ नहीं पाता, उसे लगता है कि सब कुछ बदल रहा है। वह बातों का अर्थ स्पष्ट नहीं कर पाता, स्मृति कमजोर होने लगती है, और कभी-कभी उसे ऐसी चीजें दिखाई देने लगती हैं जो वास्तव में नहीं होतीं। यह सब दिमाग पर पड़ रहे लगातार दबाव का परिणाम है।
अचानक दौरा पड़ना
ऐसे मरीज जिन्हें पहले मिर्गी की समस्या नहीं होती, कुछ मामलों में ब्रेन हैमरेज की शुरुआत के दौरान दौरे आने लगते हैं। यह स्थिति मस्तिष्क की गतिविधि के असामान्य उतार-चढ़ाव के कारण होती है। यह तत्काल चिकित्सा आपातकाल है और तुरंत अस्पताल पहुंचना चाहिए।
ऐसी परिस्थिति में क्या करना चाहिए
यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो उन्हें सामान्य कमजोरी, गैस-अपच या थकान समझकर नजरअंदाज करने की गलती नहीं करनी चाहिए। तुरंत चिकित्सक से जांच करवाना ही सुरक्षित उपाय है। समय पर सीटी स्कैन, एमआरआई या न्यूरो-इमेजिंग करवाने से वास्तविक कारण स्पष्ट हो जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि ब्रेन हैमरेज में हर मिनट नुकसान बढ़ाता रहता है। इसलिए उपचार जितनी जल्दी शुरू हो, मस्तिष्क उतना ही संरक्षित रह सकता है।
जोखिम कारक जिन्हें जानना आवश्यक है
दिमाग की नस फटने का खतरा कुछ लोगों में अधिक होता है। उच्च रक्तचाप, मोटापा, अत्यधिक तनाव, शराब का अधिक सेवन, धूम्रपान, पुरानी मधुमेह, अत्यधिक कोलेस्ट्रॉल और अनुवांशिक कारण इस जोखिम को बढ़ा देते हैं। लंबे समय तक रक्तचाप का असंतुलित रहना नसों पर निरंतर दबाव डालता है और समय के साथ वे कमजोर पड़ सकती हैं।
ध्यान रखने योग्य सावधानियां
विशेषज्ञ मानते हैं कि दिमाग की नस के टूटने का खतरा केवल आपातकाल से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसके पीछे जीवनशैली का योगदान होता है। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, मध्यम व्यायाम, नियंत्रित रक्तचाप, पौष्टिक भोजन, मानसिक तनाव कम करना और पर्याप्त नींद जिम्मेदारी से अपनाई जाए तो जोखिम कम हो जाता है।
अस्वीकरण
यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी प्रदान करता है। यह किसी प्रकार की व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, लक्षण या चिकित्सा निर्णय के लिए प्रमाणित चिकित्सक से परामर्श करना अनिवार्य है।
