वर्तमान वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव बेहद तेज़ी से हो रहे हैं। हर दिन नए आर्थिक उपाय, तकनीकी नवाचार और भू-राजनीतिक तनाव दुनिया को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय व्यापार, मुद्रा नीति और वित्तीय सुरक्षा के मुद्दे प्रमुख हो गए हैं, निवेशकों, आर्थिक विशेषज्ञों और आम जनता के बीच चर्चा की एक नई लहर उठी है।

हाल ही में निवेशक और लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने एक बड़ा दावा किया, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया। कियोसाकी ने कहा कि BRICS देशों ने एक नई गोल्ड-बैक्ड मुद्रा ‘यूनिट’ पेश कर दी है। इस दावे ने कई लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया और इंटरनेट पर इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई। लेकिन क्या वास्तव में ऐसा हुआ है या यह केवल अफवाह है, इसे समझना बेहद जरूरी है।
कियोसाकी का दावा और उनका नजरिया
रॉबर्ट कियोसाकी, जो ‘रिच डैड पुअर डैड’ जैसे विश्वविख्यात वित्तीय पुस्तकों के लेखक हैं, हमेशा से डॉलर और वैश्विक मुद्रा प्रणाली के बारे में अपने सतर्क और कभी-कभी विवादास्पद विचारों के लिए जाने जाते रहे हैं। इस बार उन्होंने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर एक संदेश पोस्ट किया जिसमें उन्होंने लिखा कि BRICS ने ‘UNIT’ नाम की गोल्ड-बैक्ड मुद्रा पेश कर दी है और अब डॉलर को अलविदा कहने का समय है।
कियोसाकी ने अपने संदेश में यह भी चेतावनी दी कि डॉलर रखने वाले निवेशक और बचतकर्ता आने वाले समय में सबसे बड़े संकट का सामना करेंगे। उन्होंने सलाह दी कि सोना, चांदी, बिटकॉइन और एथेरियम जैसी संपत्तियों में निवेश किया जाए, क्योंकि उनकी मान्यता के अनुसार, आने वाले “हाइपरइन्फ्लेशन” के समय यही संपत्तियाँ बचा सकती हैं।
हालांकि, कियोसाकी की यह भविष्यवाणी कई बार विवादास्पद रही है और कई बार उनके पूर्वानुमान गलत भी साबित हुए हैं। फिर भी, उनके दावे का समय इस बार बेहद संवेदनशील था, क्योंकि इसी सप्ताह भारत और रूस के बीच महत्वपूर्ण बैठकें हुई थीं।
वास्तविक स्थिति: BRICS ने कोई नई मुद्रा लॉन्च नहीं की
कियोसाकी के दावे के विपरीत, किसी भी BRICS सदस्य देश—भारत, रूस, चीन, ब्राज़ील या दक्षिण अफ्रीका—ने अभी तक ऐसी किसी मुद्रा की घोषणा नहीं की है। इस विषय पर कई वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि अभी किसी गोल्ड-बैक्ड मुद्रा की वास्तविक योजना नहीं है।
वास्तव में, BRICS देशों के बीच एक संयुक्त मुद्रा की बजाय एक संयुक्त भुगतान तंत्र (Settlement Mechanism) पर चर्चा हो रही है। इसे अभी शोध, परीक्षण और संरचना-डिज़ाइन के चरण में माना जा रहा है। ‘Unit’ नाम केवल एक अवधारणा या प्रारंभिक ड्राफ्ट शब्द है, न कि किसी आधिकारिक मुद्रा का प्रतीक।
इस कदम का उद्देश्य मुख्य रूप से डॉलर पर निर्भरता को कम करना, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचाव करना और व्यापार के दौरान लेन-देन की सुरक्षा बढ़ाना है।
डॉलर प्रणाली के विकल्प पर BRICS की रणनीति
BRICS देशों का वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में हिस्सा बढ़ रहा है। दुनिया की कुल आबादी का लगभग 45% और वैश्विक GDP का लगभग 35% इस समूह में शामिल देशों के पास है। सोने के भंडार के मामले में भी कई BRICS सदस्य देशों का स्थान शीर्ष तीन में है। ऐसे में जब ये देश वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था बनाने का प्रयास करते हैं, तो इसका प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 2024 में कज़ान सम्मेलन में हाथ में एक प्रतीकात्मक BRICS बैंकनोट पकड़े देखा गया था। हालांकि, रूस ने तुरंत स्पष्ट किया कि यह नोट केवल प्रतीकात्मक था और कोई नई मुद्रा लॉन्च होने वाली नहीं है। पुतिन ने यह भी कहा कि डॉलर को हटाना उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन अगर इस्तेमाल रोका गया तो विकल्प ढूँढना जरूरी होगा।
भारत की भूमिका और सतर्कता
भारत का रुख BRICS के इस प्रस्तावित ढांचे पर सतर्क लेकिन तर्कपूर्ण रहा है। भारत चाहता है कि स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़े और डॉलर आधारित प्रतिबंधों से मुक्त प्रणाली स्थापित हो। भारत पहले से ही UAE, रूस, सऊदी अरब और सिंगापुर के साथ स्थानीय मुद्रा में व्यापार कर रहा है।
भारत की यह नीति तकनीकी और विश्वसनीय दृष्टिकोण से बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि कोई भी नई वित्तीय व्यवस्था तभी सफल होगी जब वह व्यवहारिक, सुरक्षित और स्थिर हो।
कियोसाकी की चेतावनियाँ और उनका निवेश दृष्टिकोण
रॉबर्ट कियोसाकी हमेशा से सरकारों की नीतियों, मुद्रास्फीति और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता पर सतर्क रहे हैं। उनका मानना है कि सरकारें जब अत्यधिक मुद्रा छापती हैं, तो मुद्रा की वास्तविक शक्ति कमजोर होती है। इसके अलावा, डॉलर की ओवर-सप्लाई वैश्विक संकट को जन्म दे सकती है।
कियोसाकी ने कई बार भविष्यवाणी की है कि स्टॉक मार्केट क्रैश होगा, बैंकिंग सिस्टम फेल होगा और डॉलर गिरावट के दौर से गुजरेगा। हालांकि, इन भविष्यवाणियों में कुछ सही साबित हुई हैं और कुछ गलत।
विशेषज्ञों की राय: डॉलर अभी भी भरोसेमंद
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर अभी भी सबसे भरोसेमंद और प्रमुख वैश्विक मुद्रा है। विश्व रिज़र्व मुद्रा के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 58% विदेशी मुद्रा भंडार डॉलर में है और 80% अंतरराष्ट्रीय व्यापार डॉलर में होता है। कच्चे तेल की कीमत भी पूरी तरह डॉलर आधारित है।
इसके अलावा, कोई भी BRICS सदस्य देश ऐसा बैंकिंग नेटवर्क, क्लियरिंग सिस्टम या मुद्रा विनिमय तरलता नहीं बना पाया है, जो अमेरिकी प्रणाली का विकल्प हो सके।
गोल्ड-बैक्ड मुद्रा: क्यों है यह कठिन
एक कागज़ की मुद्रा को सोने से जोड़ने के कई आर्थिक और तकनीकी चुनौतीपूर्ण पहलू हैं। प्रत्येक नोट के पीछे बराबर सोना रिज़र्व होना आवश्यक है, जिससे आपूर्ति सीमित हो जाती है और विकास की गति धीमी पड़ सकती है। सरकारें इस स्थिति में मुद्रास्फीति नियंत्रण नहीं कर सकतीं। अमेरिका ने भी 1971 में इस कारण गोल्ड-स्टैण्डर्ड को छोड़ दिया था।
BRICS की संभावित भविष्य की मुद्रा योजना
भविष्य में BRICS संभवतः डिजिटल मुद्रा आधारित ‘Unit’ लाने पर विचार कर सकते हैं। यह मुद्रा ब्लॉकचेन-सेटलमेंट सिस्टम पर आधारित होगी और आंशिक रूप से सोने के रिज़र्व से समर्थित होगी। इस मुद्रा का उपयोग सीमित रूप से अंतर-व्यापार और सरकारी निपटान में ही संभव होगा, न कि आम नागरिक खर्च, किसान की सब्सिडी या घरेलू बैंकिंग में।
इस प्रकार, कियोसाकी की चेतावनी में आधा सच और आधा भ्रम है। डॉलर कमजोर हो रहा है, लेकिन BRICS ने अभी कोई नई गोल्ड-बैक्ड मुद्रा लॉन्च नहीं की है।
निष्कर्ष
रॉबर्ट कियोसाकी का दावा सुर्खियाँ बनाने वाला है, लेकिन वास्तविकता अलग है। BRICS अभी भी एक संयुक्त मुद्रा के लिए प्रारंभिक शोध और डिज़ाइन के चरण में है। भविष्य में बहु-मुद्रा व्यवस्था बन सकती है, जिसमें डॉलर और वैकल्पिक मुद्राओं का मिश्रण होगा। यह केवल मुद्रा का सवाल नहीं है, बल्कि सत्ता, आर्थिक स्वायत्तता और तकनीकी नियंत्रण का मुद्दा है।
