स्वास्थ्य सेवाओं की दुनिया में यह बात अब निर्विवाद हो चुकी है कि किसी भी रोग का प्रभावी और सुरक्षित उपचार तभी संभव है, जब उसकी पहचान समय पर, सटीक और वैज्ञानिक ढंग से की जाए। आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में डायग्नोस्टिक सेवाएं केवल एक सहायक इकाई नहीं रहीं, बल्कि वे उपचार प्रक्रिया की आधारशिला बन चुकी हैं। इसी मूल भावना को केंद्र में रखकर इंदौर में काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 का भव्य शुभारंभ हुआ, जिसने देशभर के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

यह आयोजन केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत में डायग्नोस्टिक पेशेंट सेफ्टी, गुणवत्ता मानकीकरण और भविष्य की स्वास्थ्य रणनीतियों पर राष्ट्रीय स्तर का गंभीर संवाद है।
इंदौर बना राष्ट्रीय मंथन का केंद्र
24 जनवरी 2026 को मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में लोकमाता देवी अहिल्या सभागृह, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय परिसर में काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 की शुरुआत हुई। दो दिवसीय इस राष्ट्रीय सम्मेलन ने इंदौर को अस्थायी रूप से भारत की डायग्नोस्टिक राजधानी में बदल दिया। देश के कोने-कोने से आए स्वास्थ्य पेशेवर, प्रयोगशाला विशेषज्ञ, अकादमिक प्रतिनिधि और विद्यार्थी यहां एक साझा उद्देश्य के साथ एकत्र हुए—मरीजों की सुरक्षा और जांच की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देना।
यह पहली बार है जब मध्यप्रदेश में डायग्नोस्टिक पेशेंट सेफ्टी को केंद्र में रखकर इस स्तर का राष्ट्रीय आयोजन हुआ है, जिससे राज्य के स्वास्थ्य परिदृश्य को भी नई पहचान मिली।
काहो और डायग्नोस्टिकॉन की अवधारणा
काहो अर्थात Consortium of Accredited Healthcare Organizations वर्षों से भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। अस्पतालों, लैब्स और स्वास्थ्य संस्थानों को मान्यता, प्रशिक्षण और गुणवत्ता संस्कृति से जोड़ना काहो का प्रमुख उद्देश्य रहा है। डायग्नोस्टिकॉन 2026 इसी दृष्टि का विस्तार है, जहां जांच सेवाओं को मरीज-केंद्रित, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
यह सम्मेलन इस विश्वास पर आधारित है कि गुणवत्ता केवल प्रमाणपत्रों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह रोजमर्रा की प्रक्रियाओं और पेशेवर व्यवहार का हिस्सा बननी चाहिए।
अभूतपूर्व सहभागिता: 1500 से अधिक विशेषज्ञ एक मंच पर
काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धि इसकी विशाल और विविध सहभागिता रही। देशभर से 1500 से अधिक हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स ने इस सम्मेलन में भाग लिया। इनमें पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, मॉलिक्यूलर बायोलॉजिस्ट, लैब मैनेजर, क्वालिटी एक्सपर्ट, अस्पताल प्रशासक और मेडिकल छात्र शामिल थे।
यह सहभागिता इस बात का प्रमाण है कि डायग्नोस्टिक गुणवत्ता अब केवल विशेषज्ञों का विषय नहीं रह गई, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की सामूहिक जिम्मेदारी बन चुकी है।
उद्घाटन समारोह और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में इंदौर के लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सही जांच के बिना सही इलाज की कल्पना नहीं की जा सकती। उनके अनुसार डायग्नोस्टिक सेवाओं की विश्वसनीयता सीधे मरीज के जीवन से जुड़ी होती है, इसलिए इस क्षेत्र में गुणवत्ता और जवाबदेही अत्यंत आवश्यक है।
मध्यप्रदेश के माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ला ने वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने अपने संदेश में बताया कि लगभग 70 प्रतिशत चिकित्सीय निर्णय डायग्नोस्टिक रिपोर्ट्स पर आधारित होते हैं, ऐसे में जांच में छोटी-सी चूक भी मरीज के लिए गंभीर परिणाम ला सकती है।
क्यूसीआई और काहो के बीच ऐतिहासिक समझौता
सम्मेलन के पहले दिन एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया और काहो के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह एमओयू देशभर में डायग्नोस्टिक सेवाओं के मानकीकरण, प्रशिक्षण और गुणवत्ता सुधार के लिए मील का पत्थर माना जा रहा है।
क्यूसीआई के अध्यक्ष डॉ. जक्षय शाह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने वीडियो संदेश के माध्यम से इस पहल की सराहना की और पेशेंट सेफ्टी को स्वास्थ्य व्यवस्था का मूल आधार बताया।
उद्घाटन वक्तव्य और सम्मेलन की आत्मा
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. विनिता कोठारी, सेक्रेटरी, काहो डायग्नोस्टिक डिवीजन एवं फाउंडर-डायरेक्टर, सेंट्रल लैब इंदौर के उद्घाटन वक्तव्य से हुई। उन्होंने सम्मेलन को ज्ञान साझा करने के मंच से आगे बढ़कर एक साझा जिम्मेदारी का आंदोलन बताया।
उनका कहना था कि यदि हर प्रतिभागी यहां से सीखी गई गुणवत्ता की सोच को अपने संस्थान तक ले जाता है, तो यही इस आयोजन की सबसे बड़ी सफलता होगी।
इसके पश्चात काहो डायग्नोस्टिक डिवीजन की चेयरमैन डॉ. अपर्णा जयराम ने सम्मेलन की रूपरेखा, उद्देश्यों और अपेक्षित परिणामों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
दीप प्रज्वलन और गरिमामयी मंच
सम्मेलन का औपचारिक शुभारंभ दीप प्रज्वलन समारोह के साथ हुआ, जिसमें स्वास्थ्य और अकादमिक जगत की कई प्रतिष्ठित हस्तियां मंच पर उपस्थित रहीं। काहो के पैट्रन डॉ. वेंकटेश थुप्पिली, एनएबीएल-क्यूसीआई के चेयरपर्सन डॉ. संदीप शाह, काहो के प्रेसिडेंट डॉ. विजय अग्रवाल, सेक्रेटरी जनरल डॉ. लल्लू जोसेफ, वाइस प्रेसिडेंट्स डॉ. शंकर सेनगुप्ता और डॉ. अशोक रत्न सहित अनेक विशेषज्ञों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की।
13 सत्रों में डायग्नोस्टिक भविष्य पर मंथन
सम्मेलन के पहले दिन 13 गहन तकनीकी और विचारात्मक सत्र आयोजित किए गए। उद्घाटन सत्र का विषय था “डायग्नोस्टिक्स में पेशेंट सेफ्टी 2026: सही जांच से सुरक्षित इलाज तक”। इस सत्र में अनुभवी विशेषज्ञों ने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे मानकीकृत प्रक्रियाएं मरीजों के भरोसे को मजबूत बनाती हैं।
अन्य सत्रों में लैब लीडरशिप, मानसिक स्वास्थ्य, कैंसर डायग्नोस्टिक्स, बायोमार्कर्स, पर्यावरण-अनुकूल लैब्स, सीआरआईएसपीआर तकनीक, मॉलिक्यूलर टेस्टिंग, माइक्रोबायोलॉजी, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट, ब्लड सेफ्टी, ऑटोमेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इन सत्रों ने यह स्पष्ट किया कि भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था तकनीक, गुणवत्ता और नैतिकता के संतुलन पर आधारित होगी।
अकादमिक और युवा पेशेवरों की भागीदारी
डायग्नोस्टिकॉन 2026 में बड़ी संख्या में मेडिकल और पैरामेडिकल छात्रों की भागीदारी ने यह दिखाया कि युवा पीढ़ी भी गुणवत्ता और पेशेंट सेफ्टी को लेकर जागरूक है। विशेषज्ञों ने छात्रों को न केवल तकनीकी ज्ञान दिया, बल्कि उन्हें जिम्मेदार स्वास्थ्य पेशेवर बनने के लिए प्रेरित किया।
काहो की प्रतिबद्धता और भविष्य की दिशा
सम्मेलन के दौरान यह दोहराया गया कि काहो देशभर के अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर्स को पेशेंट सेफ्टी से जुड़ी ट्रेनिंग निःशुल्क उपलब्ध कराएगा। 1600 से अधिक रजिस्ट्रेशन इस बात का संकेत हैं कि यह मंच राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव डालने की क्षमता रखता है।
एमपी मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी के फाउंडर वाइस चांसलर डॉ. डी. पी. लोकवानी ने इस पहल को विकसित भारत की दिशा में एक मजबूत कदम बताया।
निष्कर्ष: एक सम्मेलन, दूरगामी प्रभाव
काहो डायग्नोस्टिकॉन 2026 का पहला दिन यह स्पष्ट संदेश देता है कि भारत की स्वास्थ्य प्रणाली अब केवल इलाज तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि वह सुरक्षित, सटीक और मरीज-केंद्रित जांच को अपनी प्राथमिकता बना रही है। इंदौर से शुरू हुआ यह राष्ट्रीय संवाद आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित करेगा।
