देश में साइबर अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के बीच, लोगों को ठगी और धोखाधड़ी का सामना करना पड़ रहा है। इसी कड़ी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हाल ही में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क पकड़ा है। इस कार्रवाई में 17 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया, जिनमें चार विदेशी नागरिक शामिल हैं। जांच में पता चला कि यह गिरोह फर्जी लोन, नकली निवेश योजनाओं, झूठे नौकरी प्रस्ताव और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों को करोड़ों रुपये का शिकार बना रहा था।

साइबर ठगी का नेटवर्क और संचालन
CBI की जांच में सामने आया कि यह नेटवर्क बेहद संगठित था और इसके संचालन के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा था। गिरोह ने अपनी पहचान छिपाने के लिए Google विज्ञापन, क्लाउड सर्वर, बल्क एसएमएस, सिम-बॉक्स मैसेजिंग सिस्टम और फिनटेक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, उन्होंने सैकड़ों फर्जी बैंक खाते बनाए और 111 फर्जी कंपनियों का जाल बिछाया, जिनमें नकली निदेशक, जाली दस्तावेज और फर्जी पते शामिल थे।
इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन किया गया। फाइनेंशियल रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि केवल एक बैंक खाते में ही कम समय में 152 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई थी। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि विदेशी नागरिक सीधे इस नेटवर्क का संचालन कर रहे थे और भारतीय ठगों के माध्यम से स्थानीय लेन-देन करवा रहे थे।
गिरफ्तारी और आरोपपत्र
इस कार्रवाई के तहत सीबीआई ने अक्टूबर में गिरोह के तीन प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया। चार्जशीट में बताया गया कि ये आरोपी फर्जी लोन ऑफर, नकली निवेश योजनाओं, पोंजी स्कीम, मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM), झूठे नौकरी प्रस्ताव और फर्जी मोबाइल ऐप के माध्यम से लोगों को फंसाते थे।
जांच में यह भी सामने आया कि दो भारतीय आरोपियों की एक UPI ID अगस्त 2025 तक विदेशी लोकेशन से सक्रिय रही, जिससे यह साबित होता है कि विदेशी नागरिक वास्तविक समय में लेन-देन और नेटवर्क की निगरानी कर रहे थे।
विदेश से जुड़े आरोपी
सीबीआई ने विदेशी नागरिकों की पहचान जू यी, हुआन लियू, वेइजियान लियू और गुआनहुआ वांग के रूप में की है। आरोप है कि ये लोग 2020 से भारत में फर्जी कंपनियों के गठन और साइबर ठगी की योजना बना रहे थे। उनके नेतृत्व में यह नेटवर्क डिजिटल माध्यमों के जरिए लोगों से बड़ी ठगी कर रहा था।
छापेमारी और जब्ती
सीबीआई ने इस पूरे ऑपरेशन के तहत कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश, झारखंड और हरियाणा में कुल 27 स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान डिजिटल उपकरण, वित्तीय रिकॉर्ड, महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य प्रमाण जब्त किए गए। फोरेंसिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि विदेशी नागरिक सीधे इस पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे और भारतीय ठग उनकी मदद कर रहे थे।
साइबर फ्रॉड का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
इस तरह के साइबर फ्रॉड से न केवल आम जनता प्रभावित होती है, बल्कि अर्थव्यवस्था और डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं। फर्जी निवेश योजनाओं और नकली नौकरी प्रस्तावों के जरिए आम लोगों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। कई लोग अपने जीवन की बचत और निवेश खो चुके हैं। इसके अलावा, इस तरह के नेटवर्क की सक्रियता से डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर भरोसा भी कम होता है।
ऑपरेशन चक्र-V: उद्देश्य और महत्व
CBI ने इसे ऑपरेशन चक्र-V का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य संगठित और अंतरराष्ट्रीय साइबर आर्थिक अपराधों पर रोक लगाना है। इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि साइबर अपराधियों की किसी भी स्तर पर सक्रियता को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ऐसे नेटवर्क को नष्ट किया जा सकता है।
भविष्य की चुनौतियां
भविष्य में ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों की संख्या और भी बढ़ सकती है। डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग के कारण लोग अधिक संवेदनशील हो रहे हैं। ऐसे में साइबर सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सक्षम और सतर्क रहने की आवश्यकता है। इसके अलावा, लोगों को भी डिजिटल लेन-देन और ऑनलाइन प्रस्तावों के प्रति सतर्क रहना होगा।
