बॉलीवुड अभिनेत्री सेलिना जेटली बीते कई महीनों से अपने जीवन की सबसे कठिन और भावनात्मक लड़ाई लड़ती नजर आ रही हैं। यह लड़ाई किसी फिल्मी भूमिका या निजी उपलब्धि से जुड़ी नहीं है, बल्कि उनके अपने भाई मेजर विक्रांत जेटली (सेवानिवृत्त) की आज़ादी और सम्मान से जुड़ी है। विक्रांत जेटली को वर्ष 2024 से संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE में नजरबंद रखा गया है। इस घटना ने न केवल एक बहन को भीतर तक झकझोर दिया है, बल्कि एक पूरे फौजी परिवार को सवालों और पीड़ा के बीच खड़ा कर दिया है।

सेलिना जेटली लगातार सोशल मीडिया, कानूनी मंचों और सार्वजनिक अपीलों के जरिए अपने भाई की स्थिति को सामने लाने की कोशिश कर रही हैं। हाल ही में जब अदालत ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह UAE में उनके भाई को कानूनी सहायता उपलब्ध कराए, तब जाकर इस पूरे मामले में एक नई उम्मीद की किरण दिखाई दी। इसी के साथ सेलिना ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करने और अपने भाई को सुरक्षित वापस लाने की अपील की है।
फौजी विरासत और गर्व की भावना
सेलिना जेटली ने अपने परिवार की सैन्य पृष्ठभूमि को लेकर कई बार खुलकर बात की है। उनका परिवार तीन पीढ़ियों से भारतीय सेना से जुड़ा रहा है। उनके दादा 1962 के युद्ध के वेटरन रहे हैं, वहीं उनके पिता ने 1971 के युद्ध में देश के लिए लड़ाई लड़ी। ऐसे परिवार में जन्म लेना उनके लिए हमेशा गर्व की बात रही है। इसी भावना को व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वह स्वयं को केवल एक फौजी की बेटी मानती हैं, असली सेवा और बलिदान तो उनके पूर्वजों और भाई ने किया है।
उनके शब्दों में यह गर्व साफ झलकता है, लेकिन इसके साथ ही एक गहरा दर्द भी जुड़ा है। उनका कहना है कि शायद उनके जीवन में यह लड़ाई लिखी हुई थी, क्योंकि जब परिवार ने हमेशा देश के लिए खड़ा रहना सिखाया हो, तो अन्याय के सामने चुप रहना संभव नहीं होता।
रुंधी आवाज में बहन का दर्द
अपने भाई को लेकर बात करते समय सेलिना कई बार भावुक हो जाती हैं। एक इंटरव्यू के दौरान उनकी आवाज रुंध गई थी और आंखों से आंसू छलक आए थे। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि एक बहन की उस पीड़ा की कहानी है, जो महीनों से अपने भाई की आवाज सुनने के लिए तरस रही है।
सेलिना ने बताया कि उनके भाई के अचानक गायब हो जाने के बाद कई महीनों तक परिवार को कोई जानकारी नहीं मिली। आठ महीने तक उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका। बाद में पता चला कि उन्हें मध्य पूर्व में कहीं हिरासत में रखा गया है। इस अनिश्चितता और डर ने पूरे परिवार को भीतर से तोड़ दिया।
कानूनी मदद की दिशा में पहला ठोस कदम
इस मामले में हाल ही में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब अदालत ने विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह UAE में विक्रांत जेटली को कानूनी सहायता दिलाने में सहयोग करे। इसके बाद यह तय हुआ कि UAE की प्रतिष्ठित कानूनी फर्म खालिद अलमर्री पार्टनर्स एंड एडवोकेट्स इस केस को लड़ेगी। यह फर्म विक्रांत से मुलाकात करेगी और यह जानने की कोशिश करेगी कि उन्हें किस आधार पर नजरबंद रखा गया है।
सेलिना जेटली का कहना है कि यह आदेश उनके लिए बेहद अहम है, क्योंकि इससे मामले में स्पष्टता आएगी और समन्वित कार्रवाई संभव हो सकेगी। लंबे समय से जिस कानूनी प्रतिनिधित्व की कमी महसूस हो रही थी, वह अब जाकर पूरी होती नजर आ रही है।
“मेरा भाई खुद बोल नहीं सकता था”
सेलिना जेटली ने साफ शब्दों में कहा है कि उनका भाई खुद अपनी बात रखने की स्थिति में नहीं था। यही वजह थी कि उन्होंने चुप रहने के बजाय आवाज उठाने का फैसला किया। उनके अनुसार, अगर वह खामोश रहतीं तो इससे उनके भाई की स्थिति और कमजोर हो जाती।
उन्होंने यह भी कहा कि भाई के प्रति उनका प्यार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। यही भावना उन्हें बार-बार खड़े होने और संघर्ष जारी रखने की प्रेरणा देती है, चाहे रास्ता कितना भी थकाने वाला क्यों न हो।
बहन और भाई का मजबूत रिश्ता
सेलिना ने अपने भाई के साथ अपने रिश्ते को बेहद निजी और भावनात्मक बताया है। उन्होंने कहा कि उनके तीन बेटों के बाद विक्रांत ही उनका इकलौता करीबी परिवार है। ऐसे में पीछे हटना या समझौता करना उनके लिए कभी विकल्प नहीं था।
उनका मानना है कि जब जवाब नहीं मिलते, जब हालात अस्पष्ट होते हैं और जब तत्काल राहत की कोई उम्मीद नहीं दिखती, तब भी मजबूती से खड़े रहना ही एकमात्र रास्ता होता है। एक बहन के रूप में अपने भाई के अधिकार और गरिमा की रक्षा करना उनका कर्तव्य है।
भाभी की भूमिका पर उठे सवाल
विक्रांत जेटली भारतीय सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद दुबई चले गए थे। वहां उन्होंने अपनी पत्नी चारुल जेटली के साथ मिलकर एक कंपनी शुरू की थी। हालांकि, इस पूरे मामले में चारुल की भूमिका को लेकर कई सवाल उठे हैं।
सेलिना ने बताया कि उनके भाई को आज, कथित अपहरण के 17 महीने बाद, दिल्ली उच्च न्यायालय में उनकी याचिका के जरिए कानूनी प्रतिनिधित्व मिल पाया है। इस याचिका में उनकी भाभी पार्टी नहीं हैं। सेलिना का कहना है कि भाई के अपहरण के बाद की घटनाओं को लेकर अब भी कई अहम सवाल अनुत्तरित हैं।
भाई की आवाज सुनने की प्रतीक्षा
सेलिना ने अपने एक पोस्ट में बेहद मार्मिक शब्दों में अपने दर्द को व्यक्त किया था। उन्होंने लिखा कि वह अपने भाई की आवाज सुनने का इंतजार कर रही हैं, उन्हें देखने का इंतजार कर रही हैं। उन्हें यह डर सताता है कि इस दौरान उनके साथ क्या हुआ होगा।
उन्होंने यह भी साझा किया कि एक फोन कॉल में उनकी अपने भाई से बात हुई थी। उस कॉल में शब्द बहुत कम थे, लेकिन दर्द बहुत ज्यादा था। विक्रांत को केवल उनका एक ही नंबर याद था। उस छोटी सी बातचीत ने सेलिना के मन में और भी सवाल खड़े कर दिए।
देश के लिए बलिदान और आज की स्थिति
सेलिना ने भावुक होकर बताया कि उनके भाई ने अपनी जवानी, अपना ज्ञान और अपना जीवन देश को समर्पित किया है। उन्होंने तिरंगे के लिए जीया है और खून बहाया है। अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए उन्हें कई चोटें भी आईं। ऐसे व्यक्ति के साथ आज जो हो रहा है, वह केवल एक परिवार का मसला नहीं रह जाता।
उनके अनुसार, यह सवाल अब राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ता है। अगर विदेशों में हमारे सैनिकों और पूर्व सैनिकों के साथ इस तरह की घटनाएं हो रही हैं, तो यह देश के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हमें जवाब मांगने चाहिए और अपने सैनिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर होना चाहिए।
नजरबंदी का कारण और आरोप
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विक्रांत जेटली को जासूसी से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया है। बताया जाता है कि वह 2016 से UAE में रह रहे थे और MATITI ग्रुप नामक कंपनी में कार्यरत थे। यह कंपनी ट्रेडिंग, कंसल्टेंसी और रिस्क मैनेजमेंट सेवाओं से जुड़ी हुई है।
उन पर UAE की राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर से जुड़े मामलों में शामिल होने का आरोप है। हालांकि, इस केस से जुड़ी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं हुई है और कई पहलुओं पर स्पष्टता का इंतजार है।
एक बहन की अपील और उम्मीद
सेलिना जेटली की यह लड़ाई सिर्फ अपने भाई के लिए नहीं है, बल्कि उन सभी सैनिकों और उनके परिवारों के लिए है, जो देश की सेवा करने के बाद भी असुरक्षा और अनिश्चितता का सामना करते हैं। उनकी अपील में दर्द भी है, गर्व भी और उम्मीद भी।
वह मानती हैं कि न्याय देर से मिल सकता है, लेकिन अगर आवाज बुलंद रहे तो सच सामने आता है। उनके लिए यह लड़ाई आसान नहीं है, लेकिन एक फौजी परिवार से आने के कारण हार मानना उन्होंने कभी सीखा ही नहीं।
