बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया और खासकर व्हाट्सऐप ग्रुपों में एक चर्चा बड़े पैमाने पर फैल रही है, जिसने लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की चिंता बढ़ा दी है. वायरल संदेश में दावा किया जा रहा है कि वित्त अधिनियम 2025 के तहत केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले लाभों को खत्म कर दिया है, जिनमें महंगाई भत्ता, वेतन आयोग संशोधन और पेंशन शामिल हैं. यह दावा इतनी तेजी से फैला कि तमाम कर्मचारी, सेवानिवृत्त अधिकारी और उनके परिवार असमंजस की स्थिति में आ गए. सरकार पर दबाव बढ़ा और जनसामान्य के बीच भ्रम की स्थिति बनी.

वायरल संदेश का दावा क्या था
व्हाट्सऐप और फेसबुक पर यह संदेश खूब घूम रहा था कि फाइनेंस एक्ट 2025 आने के बाद कोई भी केंद्रीय कर्मचारी रिटायर होने के बाद डीए में बढ़ोतरी या पेंशन लाभ का पात्र नहीं रहेगा. संदेश के अनुसार सरकार ने सभी पोस्ट-रिटायरमेंट बेनिफिट्स खत्म कर दिए हैं और यह नियम 2025 से लागू हो गया है. दावा इतना पुख्ता अंदाज में लिखा गया था कि सामान्य व्यक्ति भ्रमित हो सकता था. कई जगह स्क्रीनशॉट्स भी लगाए गए, जिसमें ‘Finance Act 2025’ का हवाला दिया गया था.
PIB की एंट्री: सरकार ने फैलाई गलतफहमी दूर
फेक न्यूज जब आम कर्मचारी समुदाय को व्यापक रूप से प्रभावित करने लगी, तब प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो यानी PIB Fact Check ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की. PIB ने बताया कि वायरल संदेश पूरी तरह मनगढ़ंत, भ्रामक और गलत है. न सरकार ने पेंशन खत्म की है और न ही डीए वृद्धि रोकी है. वित्त अधिनियम 2025 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो सामान्य रिटायर सरकारी कर्मचारियों के लाभों को प्रभावित करता हो. PIB ने सार्वजनिक रूप से ट्वीट कर घोषणा की कि यह अफवाह किसी व्यक्ति या समूह द्वारा फैलाए जाने की कोशिश है.
पेंशन और डीए बंद होने का दावा क्यों फैला
इस पर ध्यान देना जरूरी है कि अफवाहें अचानक पैदा नहीं होतीं, उसके पीछे कोई न कोई वास्तविक घटना जरूर होती है. इस मामले में भी ऐसा ही हुआ. हाल में सीसीएस पेंशन नियम 2021 के नियम 37 में संशोधन किया गया था. इसी संशोधन के नाम पर कुछ लोगों ने पूरे मामले को गलत तरीके से पेश किया और भ्रम फैलाया कि सभी कर्मचारियों की पेंशन बंद हो जाएगी. संशोधन वास्तव में किसके लिए था, यह आम जनता नहीं समझ पाई और इसका परिणाम हुआ फेक न्यूज का वायरल होना.
नियम 37 में बदलाव: असल में क्या बदला
नए संशोधन के अनुसार, यदि कोई सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम यानी PSU कर्मचारी बाद में सरकारी सेवा में शामिल होता है और फिर गलत आचरण या गंभीर आरोपों के चलते नौकरी से बर्खास्त कर दिया जाता है, तो उसे भविष्य में पेंशन या अन्य रिटायरमेंट लाभ नहीं मिलेंगे. पहले ऐसी स्थिति में भी पेंशन लाभ जारी रहते थे, जिससे कई मामलों में बर्खास्त कर्मचारी भी पेंशन प्राप्त करते थे. सरकार ने इसी प्रावधान में बदलाव किया है और इसे अधिक कड़ा बना दिया है. यानी यह बदलाव सिर्फ उन कर्मचारियों पर लागू है जिन्हें अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार या किसी गंभीर अपराध के कारण नौकरी से निकाला गया है. यह सामान्य रिटायर होने वाले कर्मचारी पर लागू नहीं होता.
क्यों किया गया यह बदलाव
सरकार का तर्क है कि पेंशन और रिटायरमेंट लाभ सम्मान और ईमानदारी के साथ की गई सेवा का पुरस्कार हैं. ऐसे कर्मचारी जिन्हें गंभीर दोषों के चलते सेवा से बाहर किया जाता है, वे इन लाभों के अधिकारी नहीं होने चाहिए. नए नियम इसी सोच के साथ लाए गए हैं. इसका उद्देश्य सरकारी सेवाओं में ईमानदारी और अनुशासन को बढ़ावा देना है. नियम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले बर्खास्त कर्मचारी भी पेंशन लेते थे, जिससे कई बार विवाद उत्पन्न होते थे.
क्या इसका असर वर्तमान कर्मचारियों पर पड़ेगा
PIB ने स्पष्ट किया है कि सामान्य और ईमानदारी से सेवा करने वाले कर्मचारी और रिटायर लोग इस संशोधन से किसी भी रूप में प्रभावित नहीं होंगे. उनके डीए, पेंशन, मेडिकल लाभ और वेतन आयोग से जुड़े सभी फायदे पहले जैसे ही जारी रहेंगे. वित्त अधिनियम 2025 में कहीं भी पेंशन रोकने या डीए खत्म करने का उल्लेख नहीं है.
डीए बढ़ोतरी पर भी अफवाहों का असर
अक्सर देखा जाता है कि जब भी डीए वृद्धि की तारीख पास आती है, तब किसी न किसी माध्यम से भ्रम फैलाने की कोशिश होती है. इस बार भी वायरल संदेश में दावा किया गया कि आने वाली डीए वृद्धि अब लागू नहीं होगी. जबकि सरकार हर छह महीने में डीए रिवीजन की पारंपरिक नीति जारी रखती है. पेंशनर्स को भी डीए का लाभ मिलता है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया.
कर्मचारियों की प्रतिक्रिया कैसी रही
जब अफवाह फैली तो कई लोग परेशान हो गए. सोशल मीडिया पर कई रिटायर अधिकारियों ने अपनी चिंता व्यक्त की. कुछ ने कहा कि यह संदेश देखकर उनके परिवार के लोग भी चिंतित हो गए थे. इसी बीच, कर्मचारी संघों ने सरकार से तत्काल बयान जारी करने की मांग की. जैसे ही PIB ने फैक्ट चेक जारी किया, कर्मचारी समुदाय ने राहत की सांस ली.
फेक न्यूज का बढ़ता खतरा
यह मामला एक उदाहरण है कि किस तरह गलत जानकारी सोशल मीडिया पर तेज रफ्तार से फैलती है. खासकर व्हाट्सऐप जैसे प्लेटफॉर्म पर जहां जानकारी बिना स्रोत के भी विश्वसनीय मान ली जाती है. सरकारी घोषणाओं और नीतियों से जुड़ी फेक न्यूज का दायरा लगातार बढ़ रहा है, जिससे आम नागरिक भ्रमित होते हैं. सरकार बार-बार आग्रह करती है कि किसी भी आधिकारिक सूचना को केवल विश्वसनीय और सरकारी स्रोतों से ही मानें.
क्या होगा भविष्य में
हालिया प्रावधानों से स्पष्ट है कि सरकार सेवाओं में अनुशासन और ईमानदारी को और मजबूत करना चाहती है. पेंशन जैसे लाभों को विशेषाधिकार माना जाता है, न कि अधिकार. भविष्य में भी ऐसे नियम सामने आ सकते हैं जो गंभीर लापरवाही या अपराध में दोषी कर्मचारियों पर सख्त हों. लेकिन सामान्य कर्मचारी और रिटायर अधिकारी इससे अप्रभावित रहेंगे.
निष्कर्ष
पूरे मामले को देखने के बाद यह स्पष्ट है कि सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें फर्जी थीं. सरकार ने न तो पेंशन और न ही डीए लाभ बंद किए हैं. बदलाव केवल बर्खास्त कर्मचारियों पर लागू है. इसलिए किसी भी संदेश को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना बेहद जरूरी है.
