हाल ही में चीन की टेक कंपनी यूबीटेक रोबोटिक्स (UBTECH Robotics) ने इंटरनेट पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उनकी ह्यूमनॉइड रोबोट आर्मी दिखाई गई। इस वीडियो को देखने के बाद दुनिया के कई लोग आश्चर्यचकित और चिंतित हो गए। वीडियो में सैकड़ों रोबोट एक साथ कतार में खड़े हैं, अपने बैटरी पैक निकालते और ट्रक में लोड होते दिखाए गए हैं। इस रोबोट आर्मी की क्षमताओं और उनके सटीक संचालन ने तकनीकी दुनिया को रोमांचित किया, जबकि आम लोग और मजदूर वर्ग भयभीत महसूस कर रहे हैं।
यूबीटेक रोबोटिक्स के अनुसार, यह उनकी दूसरी पीढ़ी की रोबोट आर्मी है, जिसे पहली बड़ी डिलीवरी के रूप में लॉन्च किया गया। कंपनी का दावा है कि यह तकनीक उद्योग, सैन्य और लॉजिस्टिक क्षेत्र में नए युग की शुरुआत करेगी।

वीडियो में दिखी रोबोट्स की खासियत
वीडियो एक साफ-सुथरे गोदाम में शूट किया गया है। रोबोट्स पूरी तरह इंसानों की तरह खड़े हैं और एकसाथ समान गति से चल रहे हैं। सबसे पहले वे अपनी पीठ से बैटरी पैक निकालते और फिर उसे वापस डालते हैं। इसके बाद रोबोट्स बैठकर पैर टैप करते हैं और फिर धीरे-धीरे चलना शुरू करते हैं। अंतिम दृश्य में ये रोबोट खुद ट्रक में चढ़ जाते हैं। वीडियो के कैप्शन में लिखा गया है, “March Forward”, यानी आगे बढ़ो।
इस तरह की क्षमताओं ने दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। कुछ लोग इस वीडियो को साइंस-फिक्शन फिल्म जैसी मान रहे हैं, जबकि कुछ ने इसे एआई जनरेटेड वीडियो तक कह दिया।
यूबीटेक रोबोटिक्स की उपलब्धि और तकनीक
यूबीटेक रोबोटिक्स का मुख्यालय चीन के शेनझेन शहर में है। कंपनी का कहना है कि इस डिलीवरी में पहली बार इतने सारे रोबोट्स को एक साथ भेजा गया है। कंपनी ने वीडियो को 360 डिग्री व्यू में शूट किया ताकि रोबोट्स की ताकत और समन्वय को दिखाया जा सके।




रोबोट्स बैटरी खुद संभाल सकते हैं, ट्रक में लोड हो सकते हैं और एक साथ सटीक संचालन कर सकते हैं। यह तकनीक न केवल रोबोटिक्स उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भविष्य में औद्योगिक ऑटोमेशन और सैन्य क्षेत्र में भी नई संभावनाएं खोल सकती है।
ह्यूमनॉइड रोबोट्स का इतिहास और विकास
ह्यूमनॉइड रोबोट्स ऐसे रोबोट होते हैं जो इंसानों की तरह दिखते और काम कर सकते हैं। उन्हें इंसानों के साथ मिलकर काम करने के लिए डिजाइन किया जाता है। पहला ह्यूमनॉइड रोबोट 1973 में जापान की वासेडा यूनिवर्सिटी द्वारा बनाया गया था, जिसका नाम वाबॉट-1 था।
तब से लेकर अब तक रोबोटिक्स में भारी प्रगति हुई है। आज चीन, जापान और अमेरिका जैसी टेक कंपनियां ह्यूमनॉइड रोबोट्स को फैक्ट्री, घर, और ऑफिस में काम करने के लिए विकसित कर रही हैं। रोबोट्स थकते नहीं, सैलरी की आवश्यकता नहीं होती, और उच्च प्रदर्शन के लिए प्रशिक्षित किए जा सकते हैं।
मजदूर और ऑफिस वर्कर्स में डर
हालांकि रोबोट्स की तकनीक रोमांचक है, लेकिन आम जनता और कर्मचारियों के लिए यह चिंता का विषय बन रही है। मजदूर और ऑफिस वर्कर्स डर रहे हैं कि उनकी नौकरियां रोबोट्स छीन सकते हैं।
कंपनियां रोबोट्स को चुन रही हैं क्योंकि वे लगातार काम कर सकते हैं, थकते नहीं, और सैलरी की जरूरत नहीं होती। इसका सबसे बड़ा प्रभाव गरीब और मिडिल क्लास परिवारों पर पड़ेगा। महीने की सैलरी बंद होने से परिवार कैसे चलेगा, यह सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा
चीन की रोबोट आर्मी न केवल तकनीकी चमत्कार है, बल्कि अमेरिका के लिए चिंता का विषय भी बन सकती है। अमेरिका और चीन के बीच तकनीक और सैन्य क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा हमेशा से रही है।
चीन द्वारा बनाई गई इतनी बड़ी रोबोट फोर्स को देखकर अमेरिका को निश्चित रूप से सावधान रहना होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह टेक वॉर का नया अध्याय है। अब यह देखना बाकी है कि अमेरिका इस चुनौती का सामना कैसे करेगा।
भविष्य में संभावित प्रभाव
- औद्योगिक क्षेत्र: रोबोट्स फैक्ट्री में इंसानों की जगह ले सकते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
- सैन्य क्षेत्र: ह्यूमनॉइड रोबोट्स को रणनीतिक मिशन और सुरक्षा कार्यों में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- ऑफिस वर्क और रोजमर्रा की जिंदगी: रोबोट्स घर और ऑफिस में काम करने की क्षमता रखते हैं, जिससे इंसानी श्रम की आवश्यकता कम हो सकती है।
- आर्थिक और सामाजिक प्रभाव: नौकरियों में कमी और सामाजिक असमानता बढ़ सकती है।
इस प्रकार चीन की यह रोबोट आर्मी तकनीकी उन्नति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का नया उदाहरण बन गई है।
