एशियाई भू–राजनीति का वातावरण इन दिनों लगातार संवेदनशील बना हुआ है। कभी ताइवान क्षेत्र में चीन का दबाव देखा जाता है तो कभी दक्षिण या पूर्वी समुद्री इलाकों में अमेरिकी, दक्षिण कोरियाई और जापानी सैन्य निगरानी बढ़ जाती है। इसी संवेदनशील दौर के बीच दक्षिण कोरिया की वायु सीमा के नज़दीक एक ऐसी घटना घटित हुई, जिसने पूरे क्षेत्र को सतर्क कर दिया। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों की निगाहें इस घटना पर केंद्रित हो गईं, जब एक ही सुबह चीनी और रूसी लड़ाकू विमानों ने कोरियाई एयर डिफेंस पहचान ज़ोन में प्रवेश किया।

दक्षिण कोरिया में इसे गंभीर सुरक्षा संकेत माना गया, हालांकि परिस्थिति बाद में नियंत्रण में रही। परंतु इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि दुनिया का यह हिस्सा केवल औपचारिक संवादों पर नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष सैन्य समीकरणों पर भी आधारित है।
क्या है एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन
एयर डिफेंस पहचान क्षेत्र वह हवाई दायरा होता है, जिसमें प्रवेश करने वाले किसी भी देश के विमान को अपनी पहचान बतानी होती है। यह किसी देश की वास्तविक हवाई सीमा नहीं होती, लेकिन उस सीमा से पहले का सुरक्षा दायरा माना जाता है। यहाँ पहचान हेतु सूचना देना सुरक्षा मानकों का हिस्सा है।
दक्षिण कोरिया ने अपने इस क्षेत्र को कई दशक पूर्व स्थापित किया था ताकि अप्रत्याशित स्थिति में समय रहते सैन्य तैयारी संभव हो सके। जब कोई विमान इस क्षेत्र में अचानक दिखे, तो संबंधित देश को त्वरित कदम उठाने होते हैं।
घटना की शुरुआत
रिपोर्ट के अनुसार घटना सुबह लगभग दस बजे की बताई गई। रडार निगरानी प्रणाली पर कुछ उड़ानें दिखाई दीं, जो असामान्य मार्ग अपनाए हुए थीं। पुष्टिकरण होने पर पता चला कि कुल सात रूसी और दो चीनी विमान इस पहचान क्षेत्र में दाखिल हो चुके थे। शुरुआत में यह भी खबर आई कि संख्या 11 तक पहुंच गई थी, लेकिन बाद में आधिकारिक पुष्टि इसके थोड़ा कम होने की मिली।
दक्षिण कोरिया ने तुरंत अपनी वायु सेना को अलर्ट मोड में डाल दिया। सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह आवश्यक कदम था, क्योंकि किसी भी सैन्य उड़ान की मंशा अस्पष्ट रहने पर प्रतिकारात्मक तैयारी जरूरी हो जाती है।
लड़ाकू जेट की तैनाती और निगरानी
जैसे ही विमानों का संकेत स्पष्ट हुआ, तुरंत दक्षिण कोरियाई सेना ने अपने लड़ाकू विमान हवा में भेज दिए। यह कार्रवाई केवल प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि प्रतिरक्षा रणनीति का हिस्सा थी। दक्षिण कोरिया ने विमानों की दिशा, ऊंचाई, समय और उनकी उड़ान अवधि का अध्ययन किया।
सैन्य सूत्रों के अनुसार यह विमानों का प्रवेश सीधे कोरियाई मुख्य वायु सीमा में नहीं था, बल्कि केवल पहचान जोन तक सीमित रहा। इसके बावजूद इसे सामान्य घटना नहीं माना गया, क्योंकि यह बार–बार होने लगा है।
रिपोर्टों से यह भी पता चला कि संयुक्त निगरानी विमान लगभग एक घंटे तक इस क्षेत्र में रहे। फिर धीरे-धीरे वे तटीय हवाई इलाके की ओर मुड़ गए और क्षेत्र से बाहर निकल गए।
पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया
दक्षिण कोरियाई सैन्य नेतृत्व ने अत्यंत संतुलित प्रतिक्रिया रखी। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि विमान बिना अनुमति इस क्षेत्र में आए थे, लेकिन किसी सीधी सीमा का अतिक्रमण नहीं हुआ।
साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि रूस और चीन संयुक्त रूप से अभ्यास करते हैं और यह पहले भी वर्ष में एक-दो बार हुआ है।
जापान के सुरक्षा विशेषज्ञों ने अलग दृष्टिकोण रखा। उनका कहना था कि यह क्षेत्रीय शक्ति प्रदर्शन जैसा प्रतीत होता है, जिससे कुछ देशों पर प्रत्यक्ष दबाव बन सके। ताइवान से संबंधित तनाव भी इससे अलग नहीं देखा जा सकता।
घटना का सामरिक अर्थ
यह घटना केवल एक प्रवेश नहीं, बल्कि सामरिक संकेत भी है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि:
एक, रूस अपनी एशियाई उपस्थिति बनाए रखना चाहता है।
दो, चीन लगातार समुद्री-हवाई क्षेत्रों में अपनी सक्रियता बढ़ा रहा है।
तीन, कोरिया और उसके सहयोगी देशों को सतत सतर्क रहना होगा।
चार, सैन्य अभ्यास के नाम पर भी संदेश दिए जाते हैं।
विश्लेषक मानते हैं कि रूस-चीन की यह कूटनीतिक साझेदारी एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नई सुरक्षा डिजाइन तैयार कर रही है। ऐसे में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान का सहयोगी ढांचा भी अधिक जागरूक होगा।
कोरिया की चिंता क्यों बढ़ती है
दक्षिण कोरिया का इतिहास संघर्षों से भरा रहा है। उत्तरी कोरिया के साथ चल रहे दशकों पुराने तनाव के कारण उसकी रणनीतिक दृष्टि अलग रूप ले चुकी है। एक ओर उत्तर कोरिया मिसाइल परीक्षण करता रहता है, दूसरी ओर चीन-रूस जैसे देशों की संयुक्त सक्रियता उसे अतिरिक्त रणनीति बनाने पर मजबूर करती है।
यदि किसी दिशा से अचानक आधिकारिक सीमा का उल्लंघन हो जाए, तो समय की कमी सबसे बड़ी चुनौती साबित होती है। यही कारण है कि किसी भी देश के प्रवेश को तुरंत गंभीरता से लिया जाता है।
परिस्थिति का शांत निष्कर्ष
ध्यान देने योग्य बात यह रही कि इस बार कोई प्रत्यक्ष टकराव नहीं हुआ। विमान उतने समय में ही बाहर निकल गए, जितना समय एक बार निगरानी के लिए पर्याप्त हो। कोरिया ने उन्हें केवल ‘चिह्नित’ किया और ‘दूरी बनाए रखने’ की चेतावनी दी।
लेकिन इस घटना से यह पता चलता है कि हवाई निगरानी और रक्षा सतत रूप से सक्रिय है। आकाश, समुद्र और साइबर नेटवर्क — तीनों ही सुरक्षा हिस्सों में प्रत्युत्तर क्षमता का होना अब अनिवार्य है।
