संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक एक बार फिर इस बात का प्रमाण बन गई कि दुनिया की बड़ी शक्तियों के बीच मतभेद अब केवल कूटनीति तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि खुले मंचों पर तीखे शब्दों में सामने आ रहे हैं। इस बैठक में अमेरिका और चीन के बीच हुई जुबानी जंग ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा में धकेल दिया। मुद्दा था वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी की अमेरिका द्वारा की गई गिरफ्तारी, जिसे लेकर चीन ने बेहद कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी।

चीन का सीधा आरोप: अंतरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना
चीन ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र चार्टर और संप्रभुता के मूल सिद्धांतों को कुचलने का आरोप लगाया। बीजिंग का कहना था कि किसी भी देश को यह अधिकार नहीं है कि वह स्वयं को दुनिया का पुलिसमैन समझे और दूसरे संप्रभु राष्ट्रों के नेताओं के खिलाफ एकतरफा कार्रवाई करे। चीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां वैश्विक व्यवस्था को कमजोर करती हैं।
मादुरो दंपती की तत्काल रिहाई की मांग
संयुक्त राष्ट्र में चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने कहा कि अमेरिका को तुरंत मादुरो और उनकी पत्नी को रिहा करना चाहिए। उनके अनुसार, यह कार्रवाई न केवल वेनेजुएला की संप्रभुता का उल्लंघन है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक चिंताओं को भी अनदेखा करने का उदाहरण है।
अमेरिका पर दबंग रवैये का आरोप
सुन लेई ने अमेरिका की नीति को एकतरफा और अवैध करार देते हुए कहा कि वाशिंगटन लंबे समय से अन्य देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता आ रहा है। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण समाधान के सिद्धांतों की अनदेखी और सैन्य या कानूनी दबाव के जरिए अपने हित साधना वैश्विक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।
वेनेजुएला की संप्रभुता पर जोर
चीन ने दोहराया कि वेनेजुएला एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है, जिसे अपनी सरकार चुनने और अपनी राष्ट्रीय गरिमा की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। सुन लेई ने अमेरिका से आग्रह किया कि वह वेनेजुएला की सरकार को उखाड़ फेंकने की नीति को त्यागे और राजनीतिक समाधान के रास्ते पर लौटे।
अमेरिका का जवाब: वैध कानून प्रवर्तन कार्रवाई
अमेरिका ने चीन और अन्य देशों के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने कहा कि यह कोई सैन्य या कूटनीतिक हस्तक्षेप नहीं, बल्कि एक वैध कानून प्रवर्तन कार्रवाई थी। उनके अनुसार, यह कदम अंतरराष्ट्रीय अपराधों से जुड़े मामलों में उठाया गया।
मादुरो की वैधता पर सवाल
अमेरिकी प्रतिनिधि ने दावा किया कि निकोलस मादुरो वैध राष्ट्रपति नहीं हैं और उनके खिलाफ नशीले पदार्थों की तस्करी तथा हथियारों से जुड़े गंभीर आरोप दशकों से लंबित हैं। उन्होंने कहा कि इन आरोपों से जुड़े सबूत अमेरिकी अदालत में सार्वजनिक रूप से पेश किए जाएंगे।
‘नार्को-टेररिज़्म’ से सुरक्षा का तर्क
वाल्ट्ज के अनुसार, यह कार्रवाई अमेरिकी नागरिकों को नार्को-टेररिज़्म से बचाने के लिए जरूरी थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाने का अधिकार है, चाहे इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना ही क्यों न झेलनी पड़े।
रूस का खुला समर्थन चीन को
अमेरिका के रुख के खिलाफ रूस खुलकर चीन के साथ खड़ा हो गया। संयुक्त राष्ट्र में रूसी राजदूत वासिली नेबेन्ज़िया ने अमेरिका की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय डकैती करार दिया। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन ने वेनेजुएला में अराजकता फैलाने का काम किया है।
संसाधनों पर नियंत्रण का आरोप
रूस ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका का असली मकसद वेनेजुएला के विशाल प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना है। नेबेन्ज़िया के अनुसार, इस उद्देश्य के लिए अमेरिका किसी भी हद तक जाने को तैयार है, चाहे उससे किसी देश की स्थिरता ही क्यों न खतरे में पड़ जाए।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव की चिंता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने इस घटनाक्रम पर गंभीर चिंता जताई। अपने लिखित बयान में उन्होंने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई से वेनेजुएला में अस्थिरता और बढ़ सकती है, जिसका असर पूरे लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई क्षेत्र पर पड़ सकता है।
खतरनाक मिसाल की चेतावनी
गुटेरेस ने चेतावनी दी कि यह घटना देशों के बीच संबंधों के संचालन के तरीके के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकती है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की।
कोलंबिया की भूमिका
यह आपात बैठक कोलंबिया के अनुरोध पर बुलाई गई थी, जिसे चीन और रूस का समर्थन मिला। कोलंबिया ने इस मुद्दे को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया और संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
आम नागरिकों पर असर की चिंता
कोलंबिया की संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि लियोनोर ज़ालाबाता टोरेस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय विवादों और शक्ति संघर्षों की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ती है। उन्होंने सभी पक्षों से संवाद और शांतिपूर्ण समाधान का रास्ता अपनाने की अपील की।
सुरक्षा परिषद बना शक्ति संघर्ष का मंच
मादुरो की गिरफ्तारी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को एक बार फिर वैश्विक शक्ति संघर्ष का अखाड़ा बना दिया है। यहां संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और विश्व व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
निष्कर्ष: नई विश्व व्यवस्था की चुनौती
यह घटनाक्रम सिर्फ अमेरिका और वेनेजुएला के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह उस बदलती विश्व व्यवस्था का संकेत है, जहां बड़ी शक्तियां अपने प्रभाव क्षेत्र को लेकर आमने-सामने हैं। चीन का अमेरिका को दिया गया संदेश स्पष्ट है कि दुनिया अब एकतरफा फैसलों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। आने वाले समय में यह टकराव वैश्विक राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
