दिसंबर का महीना आते ही दुनिया के ज्यादातर देशों में उत्सवों की शुरुआत हो जाती है। सड़कों पर रंग-बिरंगी रोशनी, बाजारों में सजावट, चर्चों में प्रार्थनाएं और घरों में खुशियों का माहौल देखने को मिलता है। क्रिसमस सिर्फ ईसाई समुदाय का पर्व नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक उत्सव बन चुका है, जिसे अलग-अलग संस्कृतियों और देशों में अपने-अपने तरीके से मनाया जाता है। लेकिन इसी दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं, जहां क्रिसमस मनाना न केवल सामाजिक रूप से अस्वीकार्य है, बल्कि कानूनन अपराध भी माना जाता है।

इन देशों में क्रिसमस ट्री लगाना, सांता क्लॉस की वेशभूषा पहनना, सार्वजनिक रूप से बधाई देना या किसी तरह का जश्न मनाना जेल, जुर्माना या उससे भी कठोर सजा का कारण बन सकता है। इन पाबंदियों के पीछे धार्मिक कानून, राजनीतिक विचारधाराएं, सुरक्षा कारण और सांस्कृतिक नियंत्रण जैसे कई कारण हैं।
क्रिसमस पर प्रतिबंध का यह विषय केवल त्योहारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक अधिकार और मानवाधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। आइए जानते हैं दुनिया के उन पांच देशों के बारे में, जहां क्रिसमस मनाना प्रतिबंधित है और इसके पीछे क्या कारण हैं।
ब्रुनेई में शरिया कानून और क्रिसमस पर रोक
दक्षिण-पूर्व एशिया में स्थित ब्रुनेई एक छोटा लेकिन बेहद समृद्ध देश है। यहां शरिया कानून पूरी सख्ती से लागू है। इस्लामी कानून के तहत गैर-इस्लामी धार्मिक आयोजनों को सार्वजनिक रूप से मनाने पर रोक है। क्रिसमस भी इन्हीं प्रतिबंधों के दायरे में आता है।
ब्रुनेई में क्रिसमस को निजी स्तर पर मनाने की अनुमति है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर सजावट, सांता क्लॉस की पोशाक, क्रिसमस गाने या किसी भी तरह का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित है। सरकार का तर्क है कि इस तरह के आयोजन मुस्लिम आबादी को भ्रमित कर सकते हैं और इस्लामी मूल्यों पर असर डाल सकते हैं।
अगर कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसे भारी जुर्माना या पांच साल तक की जेल हो सकती है। इस कारण यहां रहने वाले ईसाई समुदाय को बेहद सतर्कता के साथ अपने त्योहार सीमित दायरे में मनाने पड़ते हैं।
सोमालिया में सुरक्षा और धार्मिक कारण
अफ्रीका का देश सोमालिया लंबे समय से आतंकवाद और अस्थिरता से जूझ रहा है। यहां अल-शबाब जैसे आतंकी संगठनों का प्रभाव रहा है, जो किसी भी गैर-इस्लामी गतिविधि का सख्त विरोध करते हैं।
सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए क्रिसमस और नए साल के सार्वजनिक जश्न पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के आयोजन आतंकी हमलों का निशाना बन सकते हैं और इससे जन सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
सोमालिया में ईसाई समुदाय की संख्या बेहद कम है और वे अपनी धार्मिक पहचान सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने से डरते हैं। यहां क्रिसमस मनाना न केवल प्रतिबंधित है, बल्कि जान जोखिम में डालने जैसा भी माना जाता है।
उत्तर कोरिया में तानाशाही और धर्म पर नियंत्रण
उत्तर कोरिया दुनिया के सबसे सख्त और बंद देशों में से एक है। यहां सरकार किसी भी धार्मिक गतिविधि को राज्य के खिलाफ मानती है। क्रिसमस को पश्चिमी संस्कृति और ईसाई धर्म से जोड़कर देखा जाता है, जिसे शासन पूरी तरह नकारता है।
उत्तर कोरिया में क्रिसमस मनाने पर कारावास, श्रम शिविर या कठोर सजा दी जा सकती है। यहां तक कि क्रिसमस गाने सुनना, बाइबिल रखना या चर्च से जुड़ी किसी भी गतिविधि में शामिल होना अपराध माना जाता है।
सरकार चाहती है कि लोग केवल शासक परिवार की विचारधारा का पालन करें। इसी कारण क्रिसमस जैसे त्योहार यहां पूरी तरह प्रतिबंधित हैं और आम लोगों के लिए यह एक खतरनाक विषय बन चुका है।
सऊदी अरब में सार्वजनिक उत्सव पर सख्ती
हाल के वर्षों में सऊदी अरब ने कई सामाजिक सुधार किए हैं, लेकिन धार्मिक मामलों में अब भी सख्ती बरकरार है। क्रिसमस को सार्वजनिक रूप से मनाने की अनुमति यहां नहीं है।
सऊदी अरब में क्रिसमस ट्री, सजावट, सांता क्लॉस की वेशभूषा या क्रिसमस से जुड़े सामान बेचने पर लंबे समय तक प्रतिबंध रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में कुछ ढील देखने को मिली है, लेकिन सार्वजनिक रूप से उत्सव मनाना अब भी संवेदनशील विषय माना जाता है।
ईसाई समुदाय यहां निजी स्तर पर सीमित तरीके से त्योहार मना सकता है, लेकिन किसी भी तरह का सार्वजनिक प्रदर्शन विवाद और कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
अफगानिस्तान में तालिबान शासन और पाबंदी
तालिबान के शासन के बाद अफगानिस्तान में धार्मिक स्वतंत्रता पर कड़ा नियंत्रण है। यहां केवल इस्लामी त्योहारों को मान्यता दी जाती है। क्रिसमस जैसे गैर-इस्लामी पर्वों पर पूर्ण प्रतिबंध है।
अफगानिस्तान में क्रिसमस मनाने की कल्पना भी जोखिम भरी हो सकती है। सार्वजनिक रूप से ऐसा करने पर गंभीर दंड दिया जा सकता है। ईसाई समुदाय यहां लगभग अदृश्य है और अपने विश्वास को गुप्त रूप से भी व्यक्त करने से डरता है।
क्यों लगाए जाते हैं क्रिसमस पर प्रतिबंध
इन देशों में क्रिसमस पर प्रतिबंध केवल धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक कारणों से भी जुड़े हैं। कई सरकारें इसे पश्चिमी प्रभाव मानती हैं, जिससे उनकी सांस्कृतिक पहचान और सत्ता को खतरा महसूस होता है।
कुछ जगहों पर सुरक्षा को कारण बताया जाता है, तो कहीं धार्मिक शुद्धता बनाए रखने का तर्क दिया जाता है। इन सभी कारणों के बीच आम नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता सीमित हो जाती है।
दुनिया का विरोधाभास
एक तरफ दुनिया के कई हिस्सों में क्रिसमस खुशी, शांति और भाईचारे का प्रतीक है, वहीं दूसरी ओर कुछ देशों में यही त्योहार डर और सजा का कारण बन जाता है। यह विरोधाभास वैश्विक मानवाधिकार बहस का अहम हिस्सा बन चुका है।
