भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई योजनाएं समय-समय पर शुरू होती रही हैं, लेकिन जिन योजनाओं ने लोगों तक वास्तविक लाभ पहुंचाने में सबसे अधिक सफलता अर्जित की है, उनमें आयुष्मान भारत—प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना प्रमुख है। यह योजना विशेषकर उन परिवारों के लिए बनाई गई जिनकी आर्थिक स्थिति सीमित है और गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए बड़े अस्पतालों तक पहुंचना उनके लिए लगभग असंभव होता है। इस योजना का उद्देश्य ऐसा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच तैयार करना है जिससे प्रत्येक पात्र नागरिक को बड़े अस्पतालों में सर्वोत्तम इलाज मिले और आर्थिक रूप से वह प्रभावित न हो।

आज भारत के विभिन्न राज्यों में इस योजना के तहत सक्रिय अभियान चल रहे हैं। इन अभियानों का असर यह हुआ कि देश के कई जिलों में लाखों नागरिकों के कार्ड बन चुके हैं। नागरिकों को योजना का लाभ देने में सरकारी तंत्र लगातार सुधार कर रहा है। सेवा केंद्रों एवं अस्पतालों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति सुविधा से दूर न रह जाए।
मात्र मोबाइल पर दो मिनट में बने कार्ड
आयुष्मान कार्ड बनाने की प्रक्रिया अब पहले से काफी सरल हो गई है। पहले लोगों को सेवा केंद्रों पर लंबी लाइनें लगानी पड़ती थीं, दस्तावेज़ अपलोड करने में परेशानी होती थी और सत्यापन की प्रक्रिया में समय लगता था। अब नई व्यवस्था के तहत केवल QR कोड स्कैन करके आवेदन प्रक्रिया पूरी की जा सकती है। साथ ही आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्वयं भी कार्ड जनरेट किया जा सकता है।
आवेदन करने के बाद लाभार्थी को एक डिजिटल कार्ड प्राप्त होता है जिसे वह अपने मोबाइल में सहेज सकता है। इस कार्ड के आधार पर जब कोई व्यक्ति अस्पताल पहुंचता है, तो वहां चिकित्सक उसकी पात्रता की जांच करते हैं और फिर उपचार की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इस पूरी प्रणाली में कागजी झंझट कम हो गई है और डिजिटल ट्रांसफर से पारदर्शिता भी बनी रहती है।
इलाज की सुविधाएं और 5 लाख तक की सहायता
इस योजना के तहत कैंसर, किडनी, लिवर संबंधी रोग, हृदय रोग, हड्डी रोग, न्यूरोलॉजी, नेफ्रोलॉजी जैसे गंभीर रोगों का इलाज भी शामिल किया गया है। पहले जिन रोगों पर लाखों रुपए खर्च हो जाते थे और गरीब वर्ग परिवार इलाज से बचता था, अब उन्हीं बीमारियों के लिए उपचार की सर्वोत्तम सुविधा उपलब्ध है।
डॉक्टरों के अनुसार इस कार्ड की वजह से ऐसे मरीज भी अस्पतालों में आते हैं जिन्होंने आर्थिक तंगी के कारण उपचार टाल दिया था। यह योजना वास्तव में उन लोगों के लिए जीवन रक्षक बन चुकी है।
देश में कई केस ऐसे सामने आए हैं जिनमें मरीजों को लाखों रुपए का उपचार मिला और परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित रहा। उम्रदराज लोगों को विशेष राहत है क्योंकि उनके उपचार की लागत सामान्यतः अधिक होती है।
पंजीकृत अस्पताल और कैंपों की बढ़ती संख्या
योजना के तहत निजी और सरकारी अस्पतालों को पंजीकृत किया गया है। अलग-अलग जिलों में 100 से अधिक अस्पताल सूची में शामिल होते जा रहे हैं। इन अस्पतालों को योजना की शर्तों के अनुसार काम करना होता है और उपचार के बदले भुगतान सीधे संबंधित अस्पतालों को सरकारी पोर्टल के माध्यम से किया जाता है।
इस योजना में ऑनलाइन क्लेम प्रक्रिया लागू होने से न तो मरीज को कहीं दौड़ना पड़ता है और न ही अस्पताल को कागजी परेशानियों से जूझना पड़ता है।
जमीनी स्तर पर सक्रिय टीमों की भूमिका
ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच बनाने के लिए आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सेविकाएं, पंचायत सहायिका, स्वास्थ्य केंद्रों की टीमें घर-घर जाकर पात्र लोगों को इस योजना के बारे में जागरूक करती हैं। ऐसे कई परिवार हैं जिन्हें कार्ड बनवाने के लिए इंटरनेट का ज्ञान नहीं होता। इन टीमों द्वारा उन्हें सूचना दी जाती है और आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।
सबसे बड़ी बात यह है कि कम साक्षर लोगों के लिए भी प्रक्रिया सरल बनाई गई है। QR स्कैन सिस्टम खास तौर पर इसी कारण लागू किया गया कि मोबाइल रखने वाला कोई भी व्यक्ति आसानी से प्रक्रिया कर सके।
आंकड़ों की उपलब्धियां
कई जिलों में लाखों कार्ड तैयार हो चुके हैं। वृद्ध लाभार्थियों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। 70 से अधिक आयु वालों के कार्ड बनाने पर विशेष प्राथमिकता दी गई है क्योंकि उनके उपचार की आवश्यकता अधिक होती है।
इसी के समानांतर कई अस्पतालों में फील्ड काउंटर बनाए गए हैं जहां प्रतिदिन हजारों कार्ड बन रहे हैं। लोग वहां सिर्फ आधार कार्ड या राशन कार्ड दिखाकर आवेदन पूरा कर सकते हैं।
टोल फ्री सेवा और सहायता केंद्र
कार्ड बनाने में किसी को भी परेशानी आए तो उसके लिए टोल फ्री हेल्पलाइन उपलब्ध है। सहायता केंद्रों पर नागरिक योजना से जुड़े प्रश्न पूछ सकते हैं, दस्तावेज की जानकारी ले सकते हैं और आवेदन की स्थिति भी जांच सकते हैं। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है।
भविष्य में विस्तार और नई सेवाओं की संभावना
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक आने वाले समय में इस योजना से और भी कई रोग उपचारित किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से स्वास्थ्य सुविधाओं का ढांचा मजबूत होगा, खासकर उन क्षेत्रो में जो चिकित्सा में पिछड़े हुए हैं।
डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड लागू होने की दिशा में भी कार्य तेजी से चल रहा है। भविष्य में जब सभी नागरिकों के उपचार का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध हो जाएगा, तो डॉक्टरों को उपचार इतिहास तुरंत मिल सकेगा।
यह कहा जा सकता है कि यह योजना स्वास्थ्य क्रांति के रूप में देश में स्थापित हो चुकी है।
