मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हाल के दिनों में अपराधियों की गुंडई चरम पर पहुंच गई है। केवल चार दिनों में पांच बड़ी वारदातें सामने आई हैं, जिनमें से तीन में कोई गिरफ्तारी नहीं हो पाई और बाकी दो मामलों में भी पूरी तरह से आरोपी पकड़े नहीं गए। इस स्थिति ने शहर में कानून व्यवस्था की गंभीर कमी को उजागर कर दिया है।
पुलिस अधिकारियों ने इस विफलता का ठीकरा बल की कमी पर फोड़ते हुए बताया कि 22 लाख आबादी वाले शहर में केवल 3500 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इनमें लगभग 600 जवान वीआईपी ड्यूटी में लगे हुए हैं। वहीं, शहर में 10 सबसे अधिक संवेदनशील थाने हैं, जहां आधे से भी कम पुलिसबल ही उपलब्ध है।

नाइट पेट्रोलिंग और CCTV सिस्टम की कमजोरियाँ
भोपाल में रात की गश्त की स्थिति बेहद चिंताजनक है। केवल चार जोनों में 250 पुलिसकर्मी ही रात भर गश्त कर सकते हैं। डायल-112 और चार्ली टीम में 150 जवान नाइट ड्यूटी पर तैनात हैं।
शहर का CCTV नेटवर्क भी अब काम नहीं कर रहा है। खराब कैमरों के कारण अपराधियों की पहचान करना मुश्किल हो गया है। पुलिस के खुफिया तंत्र की कार्यप्रणाली भी प्रभावहीन साबित हो रही है, जिससे अपराधी योजनाबद्ध तरीके से वारदात कर आसानी से फरार हो जाते हैं।
हाल की प्रमुख घटनाएँ
पहली वारदात (मिसरोद):
कैफे पर देर शाम नकाबपोशों का हमला। 20 से ज्यादा बदमाश तलवार और डंडों से लैस थे, लेकिन पुलिस ने सिर्फ पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
दूसरी वारदात (गांधीनगर):
राजा भोज परिसर में छह बदमाशों ने दो कारों और दो मोटरसाइकिल में तोड़फोड़ की। पुलिस ने आरोपियों का जुलूस निकाला।
तीसरी वारदात (छोला मंदिर):
एक युवक को निर्वस्त्र कर 40 मिनट तक पीटा गया। दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, बाकी की तलाश जारी।
चौथी वारदात (रोहित नगर):
कवर्ड कैंपस में 18-20 बदमाशों ने चार युवकों पर हमला किया। सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
पांचवीं वारदात (जाटखेड़ी):
पॉश कॉलोनी में रॉड से कार पर हमला किया गया। आरोपी फरार हैं।
पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया
भोपाल पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने सभी अधिकारियों की बैठक लेकर स्थिति की समीक्षा की। इसमें सभी राजपत्रित अधिकारी, डीसीपी, एसीपी और थाना प्रभारी शामिल हुए।
बैठक में नाइट पेट्रोलिंग, पेंडिंग मामले, महिला अपराध, सीएम हेल्पलाइन शिकायतें और वारंटी तामीली पर विशेष ध्यान दिया गया। पुलिस आयुक्त ने सामान्य नागरिकों में भरोसा बढ़ाने के लिए पैदल गश्त बढ़ाने और थानों पर नंबर लिखवाने के निर्देश दिए।
साथ ही स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थानों में नशा विरोधी जागरूकता अभियान चलाने और ऑपरेशन मुस्कान के तहत महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षा उपाय सिखाने पर जोर दिया गया।
सुरक्षा उपाय और भविष्य की रणनीति
भोपाल में पुलिस बल की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। चारों जोन में नाइट गश्त के लिए जवानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। साथ ही CCTV निगरानी को अपडेट किया जाएगा और खुफिया तंत्र को सक्रिय बनाने के लिए तकनीकी और प्रशिक्षण उपाय लागू किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहर में कानून और सुरक्षा को प्रभावी बनाने के लिए सामाजिक जागरूकता, पुलिस की पैदल गश्त और तकनीकी उपायों का संयोजन आवश्यक है। यदि यह किया जाता है, तो अपराधियों में भय उत्पन्न होगा और नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी।
निष्कर्ष
भोपाल में अपराधियों की बढ़ती गतिविधियों ने यह दर्शाया कि केवल पुलिस बल की संख्या पर्याप्त नहीं है। पुलिस प्रशासन, तकनीकी सुधार, गश्त और नागरिक जागरूकता के संयोजन से ही लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखा जा सकता है।
नगरवासियों और महिला सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है कि पुलिस लगातार सक्रिय रहे, नाइट पेट्रोलिंग सशक्त हो और शहर में कानून का डर कायम हो।
