दिल्ली की शांत होती दोपहर में अचानक एक खबर ने ऐसा तूफान खड़ा किया जिसने पूरे शहर और उससे बाहर के इलाकों में हलचल पैदा कर दी। एक प्रतिष्ठित पान मसाला कारोबार से जुड़े परिवार की बहू, दीप्ति चौरसिया, ने मौत को गले लगा लिया। यह खबर पहले तो सामान्य आत्महत्या की तरह सामने आई, लेकिन जैसे-जैसे परिवार की परतें खुलती गईं, एक अलग ही कहानी उभरने लगी। दीप्ति के भाई ऋषभ ने वह बातें सामने रखीं जिन्होंने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया। उनके मुताबिक, उनकी बहन केवल एक दुखी विवाह का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि लगातार मानसिक और भावनात्मक उत्पीड़न झेल रही थीं। इसके अलावा उन्होंने पति के कथित अफेयर के आरोप भी लगाए जो मामले को और उलझा देता है।

एक सामान्य जीवन की कहानी, जो अचानक अनकही पीड़ा में बदल गई
दीप्ति चौरसिया की शादी वर्ष 2010 में हुई थी। शुरुआत में जीवन सामान्य था। लेकिन धीरे-धीरे विवाह उनकी जिंदगी में ऐसे अध्याय जोड़ने लगा, जिनकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। बातचीत और आसपास रहने वालों के अनुसार, दीप्ति अक्सर उदास रहने लगी थीं। उनकी मुस्कान, जो कभी उनकी पहचान थी, धीरे-धीरे कम होती गई। रिश्तेदारों से भी उनकी बातचीत कम हो चुकी थी, और कई बार फोन कॉल पर भी वे सामान्य से अलग लगती थीं।
उनके भाई ऋषभ बताते हैं कि बहन ने कभी खुलकर दुख तो नहीं कहा, लेकिन उनकी आवाज हमेशा किसी बड़े बोझ से दबी हुई लगती थी। आखिरी बार जब ऋषभ ने उनसे बात की, वह तीन दिन पहले की बात थी। उस बातचीत में दीप्ति ने बहुत देर तक चुप्पी साधे रखी। ऋषभ बताते हैं कि वह समझ नहीं सके कि बहन के मन में कौन सी उथल-पुथल चल रही है, लेकिन बाद में यही चुप्पी उन्हें भीतर तक हिला गई।
पति के रिश्ते पर गंभीर आरोप, घर में तनाव की बढ़ती दीवारें
मामले के सबसे संवेदनशील पहलुओं में से एक आरोप यह है कि दीप्ति के पति के किसी और महिला से निकट संबंध थे। यह बात दीप्ति के मन को कितनी चोट पहुँचाती थी, इसका अंदाजा उनके भाई की बातों से लगाया जा सकता है। ऋषभ ने कहा कि उनके वैवाहिक संबंध अच्छे नहीं थे। पति के कथित अफेयर से दीप्ति मानसिक रूप से टूट रही थीं। परिवार में इस बात को लेकर आए दिन विवाद, ताने और आरोप लगते रहते थे।
हालांकि आरोपी पक्ष की ओर से कहा गया कि आरोप निराधार हैं और परिवार किसी भी तरह का उत्पीड़न नहीं करता था। उन्होंने मामले को दुखद लेकिन व्यक्तिगत बताया। इसके बावजूद यह प्रश्न उठता है कि यदि सब कुछ सामान्य था, तो दीप्ति की जीवन यात्रा अचानक इस मोड़ पर क्यों पहुंच गई।
कठोर परवरिश या अत्याचार – सवाल अधूरा, जवाब तलाश में
परिवार पर लगे आरोप केवल पति तक ही सीमित नहीं हैं। दीप्ति के भाई ने कहा कि घर के अन्य सदस्यों का व्यवहार भी उनके प्रति सही नहीं था। वह कहते हैं कि कई बार दीप्ति पर दबाव बनाया जाता था और उन्हें मानसिक रूप से कमजोर किया जाता था। घर में कठोर माहौल था, जिस वजह से दीप्ति की हालत और बिगड़ती गई।
ऋषभ का कहना है कि उन्हें यह भी समझ नहीं आ रहा कि बहन की मौत आत्महत्या है या हत्या। उन्होंने साफ कहा कि वे सिर्फ न्याय चाहते हैं और एक पारदर्शी व निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया और लोगों ने इस मामले में गहरी दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी।
मौत की रात – अनकही बातों के बीच एक अंतिम कदम
दीप्ति की मौत की रात क्या हुआ, इसका अभी स्पष्ट खुलासा नहीं हो पाया है। घर के लोग दावा करते हैं कि उन्होंने अचानक उन्हें बेहोशी की हालत में पाया और तुरंत अस्पताल लेकर गए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। दूसरी ओर, परिवार के कई परिचितों का कहना है कि घर में उस रात कोई बहस हुई थी। पुलिस इस ऐंगल की भी जांच कर रही है।
फॉरेंसिक टीम ने मौके से कई सबूत जुटाए हैं। दीवारों पर कुछ खरोंच जैसे निशान थे, जो सामान्य स्थिति में नहीं मिलते। हालांकि पुलिस ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। यह भी पता चला है कि दीप्ति का फोन पुलिस ने कब्जे में ले लिया है और चैट्स व कॉल रिकॉर्ड की जांच जारी है।
समाज में गूंजता सवाल – क्या महिलाएं अब भी सुरक्षित नहीं हैं
दीप्ति का मामला केवल एक घरेलू विवाद भर नहीं है। यह उस बड़ी तस्वीर का हिस्सा है, जिसमें समाज की अनदेखी पीड़ाएं उजागर होती हैं। जब एक शिक्षित महिला, एक प्रतिष्ठित परिवार में रहकर भी अपनी आवाज नहीं उठा पाती, तो सवाल उठता है कि आम महिला किस हद तक संघर्ष कर रही होगी।
कई लोग इस मामले को समाज की चुप्पी का परिणाम बता रहे हैं। रिश्तों में मजबूरी, अपराधबोध, परिवार की छवि का डर और सामाजिक अपेक्षाओं का बोझ एक महिला की आत्मा को किस तरह कुचलता है, इसका उदाहरण इस घटना में साफ दिखता है।
परिवार की तरफ से सफाई – उन्होंने कहा हम निर्दोष हैं
मुद्दे के तेजी से बढ़ने के बाद आरोपी परिवार ने अपने वकील के माध्यम से कहा कि यह मामला एक दुखद हादसा है और किसी तरह का उत्पीड़न नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने से पहले पूरे मामले की सच्चाई को सामने आने दें।
वकील ने कहा कि परिवार शोक में है और उनकी छवि खराब करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे और सच सामने आने पर सब स्पष्ट हो जाएगा।
लेकिन प्रश्न यही है कि इंसाफ किस दिशा में जाएगा और क्या एक महिला की मौत की वजह को सही मायनों में समझा जा सकेगा।
जांच से जुड़े अधिकारी सतर्क, हर पहलू खंगाला जा रहा है
पुलिस ने सभी संभावित ऐंगल से मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पति से पूछताछ की जा चुकी है और अन्य परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि diwali और किन कारणों से दीप्ति का मनोबल इतना टूट गया कि उन्होंने अपने जीवन की डोर खुद ही तोड़ दी, या क्या कोई और वजह इस घटना के पीछे छिपी है।
सोशल मीडिया पर उठती आवाजें
जैसे ही मामला सामने आया, सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस शुरू हो गई। लोग लिख रहे हैं कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी है। कई लोगों ने कहा कि जब भी कोई महिला इस तरह के हालात में फंसती है, समाज उसे दोषी ठहराने में देर नहीं करता।
कुछ ने लिखा, इस बार समाज को पीड़िता की आवाज बनना चाहिए क्योंकि अक्सर आवाज दबा दी जाती है।
