दिल्ली-NCR की हवा इन दिनों फिर से दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में खड़ी है। नवंबर आते ही हवा में धुएं, धूल और जहरीले कणों की मात्रा इतनी बढ़ गई कि हवा सांस लेने लायक तक नहीं रह गई। AQI 400 के पार निकल चुका है, जो किसी भी शहर के लिए ‘बहुत गंभीर’ स्तर माना जाता है। डॉक्टर, पर्यावरण विज्ञानी और सरकारी तंत्र सभी चेतावनी की स्थिति में हैं। इसी गंभीर परिदृश्य में ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP का चौथा और सबसे कड़ा स्तर GRAP-4 लागू करने की चर्चा जोर पकड़ चुकी है।
GRAP-4 का नाम सुनते ही लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है—क्या कुछ बंद होगा? दिल्ली की ज़िंदगी कैसे रुकेगी? क्या स्कूल बंद होंगे? क्या सड़कें सुनसान हो जाएंगी?

यह रिपोर्ट आपको पूरी तरह विस्तार से बताएगी कि राजधानी दिल्ली पर GRAP-4 लागू होने पर शहर किस तरह ठहर सा जाएगा और यह प्रणाली आखिर किस तरह प्रदूषण से निपटने में मदद करती है।
GRAP क्या है? क्यों बनाया गया यह सख्त सिस्टम
दिल्ली का प्रदूषण कोई नया मुद्दा नहीं। हर साल अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से लेकर जनवरी तक दिल्ली प्रदूषण की आगोश में आ जाती है। इसी गंभीर संकट को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट और पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (EPCA) ने कुछ साल पहले एक एक्शन प्लान बनाने का निर्देश दिया था।
इस प्लान का नाम है GRAP — Graded Response Action Plan, जिसका उद्देश्य है प्रदूषण के विभिन्न स्तरों के अनुसार “क्रमवार प्रतिक्रिया” देना। यह एक प्रकार का ऑटो-ट्रिगर है, जिसमें जैसे ही प्रदूषण बढ़ता जाता है, वैसे-वैसे प्रतिबंध भी बढ़ते जाते हैं।
यह चार स्तरों में बंटा हुआ है—
- GRAP-1: जब AQI 201–300
- GRAP-2: जब AQI 301–400
- GRAP-3: जब AQI 401–450
- GRAP-4: जब AQI 450 से ऊपर
GRAP-4 सबसे कठोर स्तर है, जिसमें राजधानी की कई गतिविधियाँ लगभग ठहर जाती हैं।
GRAP-3 की वर्तमान स्थिति: दिल्ली में पहले से लागू सख्तियां
फिलहाल दिल्ली-NCR में GRAP-3 लागू है क्योंकि AQI 400 के पार पहुंच चुका है।
इस स्तर के लागू होने से शहर का निर्माण काम रुक जाता है, हवा में धूल उड़ाने वाले सभी कार्य बंद हो जाते हैं, कई तरह के वाहनों पर प्रतिबंध लग जाता है, और स्कूलों को हाइब्रिड या ऑनलाइन मोड पर रखने की सलाह दी जाती है।
यानी शहर पहले ही एक कड़े नियंत्रण के अंदर है, लेकिन अब हवा इतनी खराब हो चुकी है कि GRAP-4 लागू होने का खतरा बढ़ गया है।
GRAP-4 कब लागू किया जाता है?
GRAP-4 तब लगाया जाता है जब दिल्ली का AQI 450 के पार निकल जाए।
यह स्तर हवा की उस स्थिति को दर्शाता है जब वह सिर्फ खराब नहीं, बल्कि सीधा स्वास्थ्य पर प्रहार करने लगती है। यह वह समय होता है जब
- सांस लेने में तकलीफ
- आँखों में जलन
- फेफड़ों की जकड़न
- दिल के मरीजों का जोखिम
- गले में जलन और खांसी
एकदम बढ़ जाते हैं।
इस स्तर पर हवा में PM2.5 और PM10 की मात्रा इतनी अधिक हो जाती है कि कुछ ही घंटे बाहर रहने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
GRAP-4 लागू होने पर दिल्ली में क्या-क्या होगा बंद?
अब बात उस सवाल की जो हर किसी के मन में है—”अगर GRAP-4 लगा तो क्या होगा?”
यहाँ से शुरू होती है दिल्ली की असली कहानी।
GRAP-4 लगते ही कई बड़े फैसले तुरंत अमल में आते हैं। शहर का ढांचा अचानक धीमा पड़ जाता है, सड़कें खाली होने लगती हैं, और लोगों का जीवन घर की चारदीवारी में सिमट जाता है।
सभी डीजल ट्रकों की एंट्री पर रोक
GRAP-4 का सबसे कड़ा नियम यही है।
दिल्ली बॉर्डर पर लगे बैरिकेड्स से किसी भी प्रकार के
- डीजल ट्रक
- कमर्शियल वाहन
- भारी मालवाहक वाहन
को प्रवेश नहीं दिया जाता।
केवल आवश्यक वस्तुएँ जैसे—
- दूध
- फल-सब्जियाँ
- दवाइयाँ
- मेडिकल सप्लाई
को ले जाने वाले वाहनों को ही अनुमति मिलती है।
यह कदम एक बड़ा झटका होता है, क्योंकि दिल्ली-NCR में रोज़ाना हजारों ट्रक प्रवेश करते हैं। उनके रुकने से न केवल सड़कें हल्की हो जाती हैं बल्कि प्रदूषण के बड़े स्रोतों में एक तुरन्त कमी आती है।
निर्माण कार्य पूरी तरह ठप
अगर आपको शहर के किसी हिस्से में मेट्रो साइट, flyover निर्माण, बिल्डिंग निर्माण या किसी प्रकार का इन्फ्रा प्रोजेक्ट दिख रहा है, तो GRAP-4 लागू होते ही वह सब कुछ बंद हो जाएगा।
भारी मशीनों, कंक्रीट मिक्सर, डस्ट-जनरेटिंग मशीनरी और ट्रकों से निकलने वाली धूल हवा को असहनीय बनाती है। इसलिए इस स्तर पर निर्माण कार्यों को पूरी तरह बंद करना अनिवार्य होता है।
स्कूल बंद करने की सिफारिश
GRAP-4 लगते ही सरकार को तुरंत सलाह दी जाती है कि
- स्कूल पूरी तरह बंद किए जाएँ
- सभी शिक्षण संस्थान
- ऑनलाइन मोड
- हाइब्रिड क्लासेस
में चले जाएँ।
बच्चे प्रदूषण के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है।
वर्क फ्रॉम होम की सिफारिश
GRAP-4 केवल सरकारी संस्थानों ही नहीं, बल्कि निजी कंपनियों को भी निर्देश देता है कि
- चाहे जितना संभव हो
- कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम दिया जाए।
यह कदम न केवल सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाता है, बल्कि प्रदूषण को फैलाने वाले पार्टिकुलेट मैटर को भी कम करता है।
सड़कों पर चलने वाले पुराने वाहन बैन
पुराने पेट्रोल और डीज़ल वाहनों का चलना लगभग असंभव हो जाता है।
- BS-3 पेट्रोल कारें
- BS-4 डीज़ल कारें
GRAP-4 में दिल्ली में नहीं चल सकतीं।
यह नियम लाखों लोगों को प्रभावित करता है, लेकिन यह सख्ती प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाती है।
RMC प्लांट, स्टोन क्रशर, डिमोलिशन पर पूर्ण रोक
ये ऐसे उद्योग हैं जो मिनटों में हवा को जहरीला कर सकते हैं।
छोटी लापरवाही भी एक पूरे इलाके का AQI बिगाड़ देती है।
इसलिए GRAP-4 में इन पर सीधा प्रतिबंध होता है।
प्रदूषण नियंत्रित करने वाली मशीनरी का 24×7 संचालन
सरकार को यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है कि
- फॉगिंग मशीनें
- एंटी-स्मॉग गन
- वाटर स्प्रिंकलर्स
- एयर प्यूरीफिकेशन टावर
लगातार चलते रहें।
यह शहर के कई इलाकों में सुबह-शाम स्प्रिंकलर्स के रूप में दिखाई देता है।
दिल्ली की हवा क्यों पहुंच रही है GRAP-4 स्तर पर?
दिल्ली का प्रदूषण कई कारणों से एक साथ बढ़ता है—
- पराली का धुआं
- वाहन प्रदूषण
- निर्माण की धूल
- उद्योगों का धुआं
- सर्द मौसम में हवा की कम गति
इन सभी कारकों के एक साथ सक्रिय होने पर दिल्ली की हवा खतरनाक हो जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों का कहना है कि AQI 400–450 के बीच भी कई लोग
- सांस फूलने
- सीने में दर्द
- आंखों में जलन
- दमा के दौरे
का सामना करने लगते हैं।
450 के पार यह घातक हो जाता है। इसलिए GRAP-4 को “स्वास्थ्य आपातकाल” जैसा माना जाता है।
निष्कर्ष: GRAP-4 लागू होगा तो दिल्ली रुक जाएगी — लेकिन स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा
प्रदूषण रोकना आसान नहीं, लेकिन रुकना जरूरी है।
GRAP-4 कोई सजा नहीं, बल्कि शहर को जीवित रखने का तरीका है।
जब हवा जहर बन जाए, तो रफ्तार धीमी करना ही विकल्प है।
