दिल्ली में लाल किले के पास हुआ ब्लास्ट अब सिर्फ एक आतंकी घटना भर नहीं रह गया है, बल्कि एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा बन चुका है जिसने महीनों तक अपनी विचारधारा, अपने टेलीग्राम चैनल्स, डार्क वेब ग्रुप्स और आईएसआईएस–अलकायदा से प्रभावित कंटेंट के जरिए एक युवा को आत्मघाती हमलावर बनने की ओर धकेला।
उमर नबी—कश्मीर का रहने वाला वही युवक, जिसका नाम कुछ महीनों पहले तक किसी ने नहीं सुना था। लेकिन ब्लास्ट की रात वह अचानक भारत की सुरक्षा एजेंसियों की सबसे बड़ी चिंता बनकर उभरा। उसका मोबाइल फोन बरामद होने के बाद जो सच सामने आया, उसने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या यह सिर्फ एक व्यक्ति की कट्टरपंथी सोच थी या किसी बड़े मॉड्यूल की तैयारी?

यह रिपोर्ट उसी कहानी का विस्तार है, उसी खौफनाक सफर का दस्तावेज है जिसमें एक युवा डॉक्टर से आत्मघाती हमलावर बनने को तैयार आतंकवादी का बदलता मानसिक संतुलन, मकसद, उसकी डिजिटल गतिविधियाँ और उसके आखिरी दिनों की हरकतें शामिल हैं।
उमर नबी: घर से ब्लास्ट साइट तक की अंतिम यात्रा
दिल्ली पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के अनुसार, उमर नबी ब्लास्ट की घटना से ठीक पहले कश्मीर में अपने घर गया था। वह अपने परिवार से ऐसे मिला जैसे सब कुछ सामान्य हो। उसने घरवालों को ज़रा भी आभास नहीं होने दिया कि वह आने वाले दिनों में क्या करने जा रहा है। घर से निकलते समय उसने अपने भाई को अपना मोबाइल फोन दिया। फोन देते हुए उसने सिर्फ एक वाक्य कहा—
“यदि मेरी कोई खबर आए, तो घबराना मत।”
एक सामान्य परिवार के लिए यह वाक्य अपने आप में एक चेतावनी था, पर भाई ने सोचा कि यह किसी मनमुटाव, किसी पढ़ाई के दबाव, या नौकरी की चिंता की वजह से कहा गया होगा। किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह एक ‘फिदायीन’ बन चुके युवक की आखिरी संदेश जैसी बात थी। कुछ ही समय बाद दिल्ली में ब्लास्ट हुआ—और संदेह की सुई सबसे पहले उसी पर गई।
मोबाइल फोन ने खोले कई खतरनाक राज़
जब जांच टीम ने उमर का फोन बरामद किया, तो उसमें कुछ ऐसे राज़ छिपे थे जिनसे सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत विशेष टीम गठित की। फोन में जो मिला, वह इस प्रकार का था—
- आईएसआईएस के आत्मघाती हमले वाले वीडियो
- अलकायदा के शहीद वीडियो
- धर्म के नाम पर हिंसा को सही ठहराने वाली सामग्री
- ‘जन्नत’ के नाम पर खुद को उकसाने वाली पोस्ट
- डार्क वेब नेटवर्क से जुड़े लिंक
- गोपनीय चैट और वॉइस नोट्स
- ब्लास्ट तकनीक से जुड़ी फाइलें और डाउनलोड्स
इन सबने यह पुष्टि कर दी कि उमर नबी न सिर्फ कट्टरपंथी विचारधारा में डूब चुका था, बल्कि वह लंबे समय से ‘फिदायीन हमले’ की कल्पना कर रहा था।
कैसे कट्टरपंथ की गिरफ्त में आया उमर नबी
उमर का जीवन पहले बिल्कुल सामान्य था। मेडिकल बैकग्राउंड, पढ़ाई में रुचि, परिवार से गहरा लगाव—सब कुछ सामान्य। लेकिन जिस तरह सोशल मीडिया ने कई युवाओं को प्रभावित किया है, उमर भी उसी चपेट में आ गया। जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार—
- वह Telegram से जुड़े कई ऐसे चैनल्स का सदस्य था जिन्हें भारत में पहले भी बंद किया जा चुका था।
- उसे Jihadi Literature में रुचि हो गई थी।
- वह ISIS की डॉक्यूमेंट्रीज़ देखता था।
- उसे ‘फिदायीन ही असली मुजाहिद’ वाले कॉन्टेंट से प्रभावित किया गया।
- वह धीरे-धीरे खुद को ‘Chosen One’ समझने लगा।
ऐसे कंटेंट ने उसकी सोच को पूरी तरह बदल दिया और वह अपने जीवन, परिवार और भविष्य के प्रति उदासीन होता चला गया।
मोबाइल में मिले खतरनाक वीडियो: क्यों मानता था फिदायीन हमला “सबसे अच्छा काम”?
जांच में सामने आया है कि उमर नबी के फोन में दर्जनों वीडियो थे जिनमें—
- आतंकियों के हमले
- आत्मघाती हमलावरों के ‘Farewell Messages’
- बम बांधकर हमला करने की ‘Tutorial Videos’
- मध्य-पूर्व में ISIS हमलों के डॉक्यूमेंटेशन
- ‘जन्नत की गारंटी’ बताने वाले वीडियो
इन्हीं सामग्रियों ने उसके दिमाग में यह धारणा बैठा दी कि ‘धर्म की राह में खुद को और दूसरों को मार देना’ कोई बड़ा पुण्य का काम है।
फोन में एक नोट भी मिला जिसमें लिखा था— “मैं जब जाऊंगा, तो अकेला नहीं जाऊंगा। मेरे साथ कई दुश्मन भी जाएंगे।”
यह वाक्य उसकी मानसिक स्थिति और खतरनाक मंशा को पूरी तरह उजागर करता है|
आईएसआईएस और अलकायदा की विचारधारा के बीच झूलता हुआ एक कट्टरपंथी
दिल्ली पुलिस का मानना है कि उमर न सिर्फ आईएसआईएस से प्रभावित था, बल्कि अलकायदा की पुस्तकें और प्रेस रिलीज़ भी पढ़ता था उसके फोन में मिली सामग्री में—
- Ayman Al-Zawahiri की ऑडियो क्लिप्स
- ISIS के अबु बकर अल-बगदादी की स्पीच
- अलकायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) के संदेश
- आत्मघाती हमलों की ‘मोटिवेशनल लिस्ट’
शामिल थीं।
उसके ग्रुप्स में यह चर्चा भी मिली कि भारत के बड़े शहर किसी भी ‘Symbolic Attack’ के लिए टारगेट होने चाहिए।
उमर नबी और उसके साथी: मुजम्मिल के साथ अनबन का सच
जांच टीम ने यह पुष्टि की है कि उमर नबी पहले एक मॉड्यूल के साथ काम कर रहा था जिसमें मुजम्मिल नाम का एक युवक भी था।
दोनों मिलकर एक बड़े हमले की तैयारी कर रहे थे। लेकिन कुछ समय बाद—
- विचारों में मतभेद
- पैसे की समस्या
- नेतृत्व को लेकर विवाद
- ‘कौन हमला करेगा’ इस पर खींचतान
इन मुद्दों के कारण दोनों के बीच अनबन हो गई।
इसके बाद उमर ने अकेले हमला करने का फैसला कर लिया। वह चाहता था कि हमला इतना बड़ा हो कि दुनिया का ध्यान भारत पर जाए। उसकी यही मंशा उसे ब्लास्ट के स्थान तक ले गई।
ब्लास्ट की रात: क्या हुआ था लाल किले के आस-पास?
18 नवंबर की रात दिल्ली का लाल किला पर्यटकों से भरा हुआ था। अचानक एक तेज धमाका हुआ। कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और कमांडो यूनिट तुरंत हरकत में आई।
जांच में पाया गया—
- धमाका लो-इंटेंसिटी था
- यह एक ‘टेस्ट रन’ या ‘ट्रायल ब्लास्ट’ जैसा था
- हमलावर का मुख्य योजना इससे कहीं बड़ी थी
- शायद वह खुद को भी उड़ाने वाला था
लेकिन किसी कारणवश उसकी योजना पूर्ण नहीं हो सकी।
ब्लास्ट के कुछ घंटों बाद उस पर शक गहरा गया और उसकी तलाश शुरू कर दी गई।
सुरक्षा एजेंसियों का दावा – “यह 9/11 जैसी बड़ी साजिश बन सकती थी”
जांच एजेंसियों के अनुसार—
- उमर नबी 9/11 जैसे हमलों को देखता और उनमें ‘Heroism’ महसूस करता था
- उसे आत्मघाती हमले को धर्म का सर्वोत्तम कार्य बताया गया था
- वह ‘Mass Casualty Attack’ की तैयारी में था
यदि उसका मकसद सफल होता, तो वह दिल्ली को दहला देने वाला हमला कर सकता था।
समाज, परिवार और देश के लिए यह चेतावनी क्यों है?
उमर जैसे मामले सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक चेतावनी हैं।
यह दिखाता है—
- कट्टरपंथ कितना तेज़ी से फैल रहा है
- सोशल मीडिया कैसे किसी को प्रभावित कर सकता है
- डार्क वेब और एन्क्रिप्टेड ऐप्स कितने खतरनाक बन चुके हैं
- युवाओं को मानसिक, वैचारिक और धार्मिक रूप से कैसे फंसाया जा रहा है
सरकार अब इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर और सख्ती की तैयारी कर रही है।
जांच अभी जारी – कई नेटवर्क्स पर रेड, कई संदिग्ध गिरफ्तार
जांच टीम लगातार—
- कश्मीर
- दिल्ली
- उत्तर प्रदेश
- हरियाणा
- पश्चिम बंगाल
में छापेमारी कर रही है। पता लगाया जा रहा है—
- उमर किसके संपर्क में था
- ब्लास्ट सामग्री कहां से ली
- फंडिंग किसने की
- उसका मुख्य मास्टरमाइंड कौन है
कुछ गिरफ्तारियाँ पहले ही हो चुकी हैं।
निष्कर्ष: यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी चेतावनी है
दिल्ली में हुआ ब्लास्ट यह दिखाता है कि आतंक सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा। डिजिटल कट्टरपंथ, सोशल मीडिया ब्रेनवॉशिंग, और धार्मिक उन्माद युवाओं को खतरनाक रास्तों की ओर धकेल रहा है।
उमर नबी की कहानी एक दर्दनाक उदाहरण है कि कैसे एक पढ़ा-लिखा युवक भी गलत विचारधारा का शिकार हो सकता है। यह घटना भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती है—लेकिन इससे बड़ी चुनौती समाज के सामने है कि ऐसी मानसिकता को कैसे रोका जाए।
