राजधानी भोपाल के नगरीय क्षेत्रों में लगातार सामने आ रही वाहन चोरी और नकबजनी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में थाना अयोध्यानगर पुलिस ने एक महत्वपूर्ण और सराहनीय सफलता हासिल करते हुए तीन ऐसे शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया है, जो लंबे समय से शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में चोरी और नकबजनी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने न केवल चार अलग-अलग आपराधिक घटनाओं का खुलासा किया, बल्कि चोरी गया कीमती सामान और तीन मोटरसाइकिलें भी बरामद कीं, जिनकी कुल कीमत लगभग साढ़े चार लाख रुपये आंकी गई है।

यह पूरी कार्रवाई पुलिस आयुक्त भोपाल श्री हरिनारायणचारी मिश्र (आईपीएस) और अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री अवधेश गोस्वामी (आईपीएस) के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप की गई। वरिष्ठ अधिकारियों का उद्देश्य साफ था कि शहर में संपत्ति संबंधी अपराधों पर रोक लगाई जाए और अपराधियों से शत-प्रतिशत बरामदगी सुनिश्चित की जाए।
जोन-02 में पुलिस की रणनीतिक कार्रवाई
पुलिस उपायुक्त जोन-02 श्री विवेक सिंह (आईपीएस) के सतत निर्देशन में अति पुलिस उपायुक्त श्री गौतम सोलंकी के पर्यवेक्षण तथा सहायक पुलिस आयुक्त एम.पी. नगर संभाग श्री मनीष भारद्वाज (आईपीएस) के मार्गदर्शन में यह पूरी कार्रवाई अंजाम दी गई। थाना प्रभारी निरीक्षक महेश लिल्हारे के नेतृत्व में गठित पुलिस टीमों ने तकनीकी विश्लेषण, सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच और मुखबिर तंत्र की मदद से इन शातिर अपराधियों तक पहुंच बनाई।
फरियादी की शिकायत से शुरू हुई जांच
इस पूरे मामले की शुरुआत 21 जनवरी 2026 को हुई, जब फरियादी प्रशांत तिवारी थाना अयोध्यानगर पहुंचे और चोरी की एक गंभीर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। फरियादी के अनुसार उनकी कंपनी का कार्य अयोध्यानगर स्थित सुरम्य परिसर के पास, क्वीन मेरी स्कूल के सामने चल रहा था। सड़क किनारे बने अस्थायी स्टोर रूम में निर्माण कार्य से जुड़ा सामान रखा गया था। इसी स्टोर रूम से रोड किनारे चैंबर में लगाए जाने वाले धातु के बड़े-बड़े कैप चोरी हो गए।
इन धातु के कैपों का वजन लगभग 500 किलोग्राम के आसपास बताया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि चोरी की यह घटना किसी सामान्य व्यक्ति द्वारा नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से की गई थी। फरियादी की शिकायत पर थाना अयोध्यानगर में अपराध क्रमांक 36/2026 धारा 303(2) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई।
सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के क्षेत्रों में लगे लगभग सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज के विश्लेषण के दौरान संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां सामने आईं। इन फुटेजों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों का हुलिया चिन्हित किया और तकनीकी सहायता के साथ-साथ मुखबिरों को भी सक्रिय किया गया।
लगातार प्रयासों के बाद पुलिस को सूचना मिली कि संदिग्ध आरोपी अयोध्यानगर फेस-5 के पुलिया के पास देखे गए हैं। सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मौके से तीनों आरोपियों को दबोच लिया।
गिरफ्तारी और चोरी की घटनाओं का खुलासा
पुलिस पूछताछ में तीनों आरोपियों ने न केवल अयोध्यानगर क्षेत्र की नकबजनी की घटना स्वीकार की, बल्कि पिपलानी और हबीबगंज थाना क्षेत्रों में की गई वाहन चोरी की घटनाओं का भी खुलासा किया। आरोपियों के कब्जे से चोरी गए चैंबर के चार बड़े धातु के कैप और तीन मोटरसाइकिलें बरामद की गईं।
बरामद मोटरसाइकिलों में दो हीरो स्प्लेंडर और एक होंडा साइन शामिल है। पुलिस के अनुसार यह सभी वाहन अलग-अलग थाना क्षेत्रों से चोरी किए गए थे। बरामद समस्त मशरूके की कुल कीमत लगभग 4 लाख 50 हजार रुपये आंकी गई है।
डिलीवरी बॉय की आड़ में अपराध
जांच के दौरान एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि आरोपी रेपीडो और जोमेटो जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों में डिलीवरी बॉय के रूप में काम करते थे। डिलीवरी के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों में घूमते हुए वे सुनसान स्थानों की रेकी करते थे। मौका मिलते ही वे चोरी और नकबजनी की वारदातों को अंजाम देते थे।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने डिलीवरी का काम इसलिए चुना था ताकि उनकी गतिविधियों पर किसी को शक न हो और वे आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान तक घूम सकें।
नशे और महंगे शौक बने अपराध की वजह
पूछताछ में यह भी सामने आया कि तीनों आरोपी नशे के आदी हैं। नशे की लत और महंगे शौक पूरे करने के लिए वे लगातार चोरी और नकबजनी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे थे। आसान पैसे की लालच में उन्होंने अपराध को ही अपना जरिया बना लिया था।
आरोपी नंबर एक: राजा पाल
पहला आरोपी राजा पाल पिता महेंद्र पाल, उम्र 22 वर्ष है। वह सिद्ध नगर, इसरो के पास, थाना सूखीसेविया भोपाल का निवासी है। शिक्षा के स्तर पर वह बीकॉम पास है और पेशे से जोमेटो डिलीवरी बॉय के रूप में काम करता था।
राजा पाल का आपराधिक रिकॉर्ड लंबा है। उसके खिलाफ भोपाल के विभिन्न थाना क्षेत्रों में मारपीट, धमकी, चोरी, आर्म्स एक्ट और बीएनएस की धाराओं के तहत कुल 14 अपराध दर्ज हैं। इनमें अयोध्यानगर, गौतम नगर, हनुमानगंज, अशोकागार्डन, छोलामंदिर, पिपलानी और हबीबगंज थाना क्षेत्र शामिल हैं।
आरोपी नंबर दो: कुनाल उर्फ यश प्रधान
दूसरा आरोपी कुनाल उर्फ यश प्रधान पिता दिलबहादुर, उम्र 21 वर्ष है। वह ईडब्ल्यूएस 299 फेस-5 अयोध्यानगर भोपाल का निवासी है। उसकी शिक्षा 10वीं तक है और वह रेपीडो चालक के रूप में काम करता था।
कुनाल के खिलाफ भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। अयोध्यानगर, बागसेवनिया, पिपलानी, छोलामंदिर और हबीबगंज थाना क्षेत्रों में चोरी, नकबजनी और बीएनएस की धाराओं के तहत उसके विरुद्ध कुल 7 अपराध दर्ज हैं।
आरोपी नंबर तीन: राहुल बाल्मीकी उर्फ अजय
तीसरा आरोपी राहुल बाल्मीकी उर्फ अजय पिता जगन्नाथ बाल्मीकी, उम्र 25 वर्ष है। वह जीनियस स्कूल के पास, कल्याण नगर, थाना छोला मंदिर भोपाल का निवासी है। उसकी शिक्षा 8वीं तक है और वह हाउस कीपिंग का काम करता था।
राहुल का आपराधिक रिकॉर्ड भी गंभीर है। उसके खिलाफ वर्ष 2017 में सूखीसेवनिया थाना क्षेत्र में अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज रहा है। इसके अलावा हबीबगंज, पिपलानी और अयोध्यानगर थाना क्षेत्रों में भी बीएनएस के तहत उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज हैं।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस पूरे अभियान में थाना प्रभारी निरीक्षक महेश लिल्हारे के साथ-साथ उपनिरीक्षक सुदील देशमुख, प्रधान आरक्षक अमित व्यास, बृजेश सिंह, राजेंद्र राजपूत, अतुल सिंह सहित बड़ी संख्या में आरक्षक और साइबर सेल के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीसीटीवी विश्लेषण, तकनीकी सहायता और सतत निगरानी के चलते ही यह सफलता संभव हो सकी।
आम नागरिकों में सुरक्षा का भरोसा
इस कार्रवाई के बाद अयोध्यानगर और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों ने राहत की सांस ली है। लगातार हो रही चोरी और नकबजनी की घटनाओं से लोगों में जो असुरक्षा की भावना थी, उस पर अब अंकुश लगता नजर आ रहा है। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि शहर में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है और ऐसी कार्रवाइयां आगे भी जारी रहेंगी।
भविष्य में और सख्ती के संकेत
पुलिस प्रशासन का कहना है कि आदतन अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी निगरानी रखी जा रही है। तकनीक और मुखबिर तंत्र के बेहतर उपयोग से संपत्ति संबंधी अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा। यह कार्रवाई उसी दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।
