भारत के विमानन क्षेत्र में इस समय जिस तरह की उथल-पुथल दिखाई दे रही है, वह लंबे समय से नहीं देखी गई थी। देश की सबसे बड़ी और सबसे व्यस्त एयरलाइन के रूप में जानी जाने वाली इंडिगो इस समय एक बड़े संचालन संकट से गुजर रही है, और इस संकट ने न केवल एयरलाइन की कार्यप्रणाली को प्रभावित किया है, बल्कि लाखों यात्रियों की योजनाओं और यात्रा अनुभवों को भी गहराई से प्रभावित किया है। इसी घटनाक्रम के बीच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय, डीजीसीए ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरे विमानन क्षेत्र में हलचल पैदा कर दी है। यह कदम महज प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि उस व्यापक चिंतन का हिस्सा है जिसमें भारत का विमानन नियामक तंत्र अब अधिक कठोर और अधिक सक्रिय भूमिका निभाता दिखाई देता है।

इस पूरे विवाद की जड़ में इंडिगो की वह स्थिति है जिसमें पिछले कुछ सप्ताहों से एयरलाइन अपने निर्धारित उड़ानों का बड़ा हिस्सा समय पर संचालित नहीं कर पा रही थी। इसी महीने की शुरुआत में अचानक कई हजार उड़ानें रद्द होने की घटनाएं सामने आने लगीं। ये रद्दीकरण केवल एक शहर या एक मार्ग तक सीमित नहीं थे, बल्कि देश भर में इसके असर दिखे। मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता सहित लगभग हर प्रमुख हवाईअड्डे पर यात्री घंटों तक लाइन में खड़े रहे, कुछ को जानकारी नहीं मिल पाई, जबकि कई यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानें भी बेहद देर से उपलब्ध हुईं। एयरलाइन की इस अस्थिरता ने भारत में हवाई यात्रा के भरोसेमंद विकल्प के रूप में मौजूद इंडिगो की छवि पर सीधा असर डाला।
ऐसे समय में जब एक एयरलाइन अपनी उड़ान सेवा को बनाए रखने के संघर्ष से गुजर रही हो, नियामक संस्थाओं की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। डीजीसीए ने ठीक इसी भूमिका का निर्वाह करते हुए इंडिगो की आंतरिक व्यवस्था, ऑपरेशनल प्रबंधन और सुरक्षा मानकों की समीक्षा शुरू कर दी थी। यह समीक्षा कई स्तरों पर की गई और कई चरणों में की गई। इसी प्रक्रिया के दौरान डीजीसीए को कई कमियां मिलीं, जिनमें सबसे गंभीर वे थीं जो एयरलाइन की सुरक्षा और संचालन निगरानी से जुड़ी थीं।
डीजीसीए ने पाया कि चार फ्लाइट ऑपरेशन इंस्पेक्टर, जो इंडिगो की उड़ानों की सुरक्षा, क्रू प्रबंधन, ऑपरेशनल अनुपालन और निगरानी जैसे अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण कामों के लिए जिम्मेदार थे, वे अपने कार्यों में अपेक्षित सावधानी और जिम्मेदारी का पालन नहीं कर रहे थे। नियामक संस्था ने यह माना कि इन अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही इंडिगो में उपेक्षा का माहौल बना और एयरलाइन की संचालन क्षमता में लगातार गिरावट आई। इसी आधार पर डीजीसीए ने इन चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
यह निर्णय अचानक नहीं लिया गया बल्कि पूरी जांच-पड़ताल और आंतरिक मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद इस निष्कर्ष पर पहुंचा गया कि हाल की स्थिति केवल एयरलाइन के अंदरूनी प्रबंधन की गलती नहीं बल्कि उन अधिकारियों की विफलता भी है जिनके कंधों पर संचालन की निगरानी की जिम्मेदारी थी। डीजीसीए की इस कार्रवाई का संदेश बहुत स्पष्ट है कि एयरलाइन चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, सुरक्षा और संचालन मानकों में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इंडिगो संकट की शुरुआत उस समय हुई जब एयरलाइन ने अचानक हजारों उड़ानों को रद्द कर दिया। पहले इन रद्दीकरणों का कारण तकनीकी बताकर स्थिति को संभालने की कोशिश की गई, लेकिन जल्द ही स्पष्ट हो गया कि समस्या उससे कहीं अधिक गहरी है। बताया जा रहा है कि एयरलाइन को क्रू शेड्यूलिंग, पायलट उपलब्धता, और टेक्निकल स्टाफ के प्रबंधन में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कई उड़ानें बिना पर्याप्त क्रू के थीं, कुछ मामलों में आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रियाएं पूरी नहीं थीं, तो कहीं निगरानी की कमी के कारण उड़ानें तय समय पर संचालित नहीं हो पा रहीं थीं। इन सबका असर धीरे-धीरे पूरे संचालन पर पड़ा और अंततः एयरलाइन बड़े संकट में घिर गई।
यात्रियों के लिए यह स्थिति बेहद त्रासदायी रही। हवाई अड्डों पर यात्रियों की लंबी लाइनें, काउंटरों पर धीमी प्रक्रिया, और सबसे बढ़कर सूचना की कमी ने स्थिति को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। कई यात्री देश के एक कोने से दूसरे कोने तक जाने के लिए इंडिगो पर निर्भर थे, पर अचानक उड़ानें रद्द होने के कारण यात्राएं बाधित हो गईं। कुछ को आवश्यक दौरे रद्द करने पड़े, तो कुछ को अत्यधिक आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। एयरलाइन पर दबाव बढ़ा और इसके बाद डीजीसीए को हस्तक्षेप करना पड़ा।
स्थिति को नियंत्रित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि एयरलाइन आगे किसी प्रकार की लापरवाही न करे, डीजीसीए ने दो विशेष निगरानी टीमें गुरुग्राम स्थित एयरलाइन के कार्यालय में तैनात की हैं। इन टीमों का काम केवल निरीक्षण तक सीमित नहीं बल्कि प्रतिदिन शाम 6 बजे तक एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करना भी है। इन रिपोर्टों में यह देखा जाएगा कि एयरलाइन अपने क्रू का उपयोग कैसे कर रही है, यात्रियों के रिफंड का प्रबंधन कैसे हो रहा है, और उड़ानों के संचालन में पारदर्शिता और मानकों का कितना पालन हो रहा है। यह कदम भी यह दर्शाता है कि नियामक संस्था अब वास्तविक समय में निगरानी और हस्तक्षेप करने की रणनीति अपनाना चाहती है।
डीजीसीए की ओर से अधिकारियों का निलंबन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कदम साफ करता है कि केवल एयरलाइन ही नहीं, बल्कि वह पूरा ढांचा भी जिम्मेदार है जो एयरलाइन की गतिविधियों की निगरानी करता है। यदि निगरानी करने वाले ही अपने काम में लापरवाह होंगे, तो किसी भी बड़ी एयरलाइन की संचालन क्षमता प्रभावित होना तय है।
इस कार्रवाई के बाद विमानन क्षेत्र में एक नई बहस शुरू हो गई है कि क्या भारत का नियामक तंत्र अब अधिक सक्रिय और कठोर हो रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में हवाई यात्रा में तेजी से वृद्धि हुई है, लेकिन एयरलाइन कंपनियों का संचालन तंत्र इस वृद्धि की गति को संभालने में असफल साबित हो रहा है। इसी वजह से नियामक का हस्तक्षेप अब और अधिक सख्त होता जा रहा है।
इंडिगो के लिए यह संकट लंबे समय तक असर छोड़ सकता है। हालांकि एयरलाइन ने घोषणा की है कि स्थिति सामान्य हो रही है और धीरे-धीरे उड़ानें पुनः संचालित की जा रही हैं, लेकिन यात्रियों का विश्वास वापस लाना आसान नहीं होगा। संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सिर्फ सस्ती और सुविधाजनक उड़ान अनुभव पर्याप्त नहीं है। सुरक्षा, मानक और निगरानी भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
इस पूरे विवाद ने भारत के विमानन क्षेत्र को एक चेतावनी दी है। भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए एयरलाइनों को अपने संचालन ढांचे को और मजबूत करना होगा। दूसरी ओर डीजीसीए जैसे नियामक निकायों को भी अपनी निगरानी और समय-समय पर समीक्षा प्रक्रियाओं को और प्रभावी बनाना होगा।
