आदित्य धर की फिल्म ‘धुरंधर’ इस समय बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है। रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, आर माधवन, सारा अर्जुन और राकेश बेदी जैसे कलाकारों की दमदार प्रस्तुति ने इसे दर्शकों के बीच खासा लोकप्रिय बना दिया है। फिल्म ने रिलीज़ के केवल एक हफ्ते के भीतर 200 करोड़ रुपये के आंकड़े को छूने की ओर कदम बढ़ा दिया है। यह फिल्म भारतीय सिनेमा में हाल ही की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक बन गई है।

‘धुरंधर’ की कहानी में पाकिस्तान के विशेष रूप से ल्यारी शहर की राजनीति और गैंगवार को केंद्र में रखा गया है। फिल्म में पाक-स्पॉन्सर्ड आतंकवाद की घटनाओं और उनके प्रभाव को बड़े ही स्पष्ट और नाटकीय तरीके से दिखाया गया है। इस विषय वस्तु के कारण फिल्म को केवल भारत में ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी चर्चा मिली है।
हालांकि, जैसे ही फिल्म की अंतरराष्ट्रीय रिलीज़ की तैयारी शुरू हुई, खाड़ी देशों में इसे लेकर विवाद भी सामने आया। बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई ने इस फिल्म को रिलीज़ करने से इंकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, इन देशों ने इसे ‘पाकिस्तान विरोधी’ फिल्म मानते हुए रोक लगाया। फिल्म के निर्माता इस क्षेत्र में रिलीज़ के लिए प्रयासरत थे, लेकिन वहां की सरकारों ने विषय को स्वीकार नहीं किया।
यह पहली बार नहीं है जब किसी फिल्म को मध्य पूर्वी देशों में प्रतिबंध का सामना करना पड़ा हो। इस साल की शुरुआत में अक्षय कुमार की ‘स्काई फोर्स’ और जॉन अब्राहम की ‘द डिप्लोमैट’ को भी कई देशों में बैन कर दिया गया था। इसके अलावा, ‘आर्टिकल 370’ और ‘टाइगर 3’ जैसी फिल्मों को भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा। यह बताता है कि राजनीतिक और संवेदनशील विषयों पर बनी फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
धुरंधर की कहानी में दिखाई गई पाकिस्तान की विशेष राजनीतिक और अपराध आधारित पृष्ठभूमि ने इसे विवादित फिल्म बना दिया है। फिल्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि इसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद और गैंगवार की घटनाओं को बेबाक तरीके से पेश किया गया है। इसने खाड़ी देशों के अधिकारियों में यह धारणा पैदा कर दी कि फिल्म उनकी नीतियों और दृष्टिकोण के खिलाफ हो सकती है।
फिल्म की भारत में सफलता बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों से साफ नजर आ रही है। रणवीर सिंह की दमदार एक्टिंग, अक्षय खन्ना की स्थिर और प्रभावशाली भूमिका, आर माधवन और सारा अर्जुन की केमिस्ट्री ने फिल्म को दर्शकों के लिए बेहद आकर्षक बना दिया है। इसके साथ ही फिल्म के संवाद, गाने और सिनेमा के दृश्य भी फिल्म की लोकप्रियता में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
मध्य पूर्वी देशों में बैन होने से फिल्म के व्यवसाय पर असर पड़ सकता है। हालांकि, भारत और अन्य देशों में फिल्म की सफलता ने इसे बॉक्स ऑफिस पर काफी लाभकारी बना दिया है। इस बैन ने फिल्म के प्रचार में और भी अधिक उत्सुकता पैदा की है। दर्शकों के बीच यह फिल्म एक चर्चा का विषय बन गई है और लोग इसके कंटेंट और कहानी को लेकर उत्साहित हैं।
फिल्म निर्माता आदित्य धर ने पहले ही साफ किया है कि फिल्म किसी एक देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह एक कथा है जो विशेष राजनीतिक और सामाजिक परिप्रेक्ष्य को दिखाती है। बावजूद इसके, संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कारण फिल्म को कुछ देशों में रिलीज़ करने से रोक दिया गया।
‘धुरंधर’ की कहानी सिर्फ एक अपराध या राजनीतिक थ्रिलर नहीं है। यह कहानी दोस्ती, विश्वास, शक्ति और संघर्ष की भी है। फिल्म के किरदारों के माध्यम से दिखाया गया है कि कैसे व्यक्ति अपनी सीमाओं, परिस्थितियों और चुनौतियों के बावजूद अपने उद्देश्य और आदर्शों के लिए संघर्ष करता है।
इस फिल्म के संगीत, विजुअल इफेक्ट और सिनेमा की तकनीकी गुणवत्ता ने इसे और भी प्रभावशाली बना दिया है। निर्देशक आदित्य धर ने अपने निर्देशन कौशल के माध्यम से दर्शकों को न केवल मनोरंजन किया, बल्कि एक संवेदनशील विषय को प्रस्तुत करने में भी सफलता पाई।
फिल्म का यह विवाद और बैन यह दिखाता है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को दर्शकों तक पहुंचाने का भी शक्तिशाली माध्यम है। खाड़ी देशों में बैन होने के बावजूद, फिल्म ने भारतीय दर्शकों और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच अपनी पहचान बना ली है।
