छिंदवाड़ा जिले में एक ऐसा मामला सामने आया है जो 23 वर्षों से न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ था। वर्ष 2002 में चौरई क्षेत्र में एक गंभीर दुष्कर्म प्रकरण दर्ज हुआ था, जिसमें आरोपी डॉ. कुलवंत, जो उस समय बीएमओ (ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर) के पद पर कार्यरत थे, लापता हो गए थे। उनकी गिरफ्तारी के प्रयास इतने वर्षों तक विफल होते रहे क्योंकि उन्होंने बार-बार अपना ठिकाना बदला और पुलिस की पकड़ से दूर रहे।

डॉ. कुलवंत मूल रूप से भोपाल के निवासी हैं और उनकी नौकरी की जिम्मेदारी चौरई क्षेत्र में थी। जब उनके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ, तो पुलिस ने तुरंत फरार घोषित कर दिया। इसके बाद वे लगातार किसी न किसी रूप में अपना ठिकाना बदलते रहे, ताकि किसी भी हाल में पुलिस उन्हें पकड़ न सके। इस अवधि में आरोपी ने न केवल शहर बदल दिए बल्कि अपने नाम में भी बदलाव किए, जिससे उनके पहचान का पता लगाना और भी कठिन हो गया।
हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी और पुलिसिक प्रयासों के माध्यम से आरोपी का पता लगाने में सफलता मिली। छिंदवाड़ा पुलिस की विशेष टीम ने आरोपी के मोबाइल नंबर का सुराग पाया। इसके अलावा एक मुखबिर से मिली सूचना ने पुलिस को उसकी ठिकाने की दिशा दिखा दी। इन दोनों सुरागों के आधार पर पुलिस ने छत्तीसगढ़ के भाटापारा में छिपे डॉ. कुलवंत को गिरफ्तार किया।
पुलिस ने इस गिरफ्तारी के दौरान पूरी तरह से योजना बनाकर कार्रवाई की। छिंदवाड़ा पुलिस की टीम तुरंत छत्तीसगढ़ पहुंची और वहां के स्थानीय थाना निरीक्षक से सहयोग लिया। स्थानीय पुलिस के सहयोग से छिंदवाड़ा टीम ने मुखबिर द्वारा बताए गए स्थान पर दबिश दी और डॉ. कुलवंत को दबोच लिया। इस गिरफ्तारी में पुलिस की रणनीति, तकनीकी उपकरण और मुखबिर की भूमिका निर्णायक रही।
छिंदवाड़ा पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने बताया कि फरार वारंटियों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस टीम ने पिछले कुछ महीनों में ही एक दर्जन से अधिक इनामी और फरार अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाया है। डॉ. कुलवंत की गिरफ्तारी इस अभियान की सफलता का प्रतीक मानी जा रही है। एसपी अजय पांडे ने कहा कि पुलिस का उद्देश्य अपराधियों को किसी भी परिस्थिति में बचने का मौका न देना है और समय-समय पर सक्रियता बढ़ाना जारी रहेगा।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस मामले की कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने की योजना बना रही है। 2002 से लंबित यह मामला अब न्याय के दायरे में आएगा। पुलिस की विशेष टीम ने बताया कि डॉ. कुलवंत ने अपनी गिरफ्तारी के दौरान कोई विरोध नहीं किया और उन्हें सौंपा गया है। अब न्यायालय के समक्ष आरोपी की पेशी और सुनवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट किया कि तकनीकी साधनों, मुखबिर की सूचना और पुलिस टीम की मेहनत से लंबे समय तक फरार अपराधियों को भी न्याय के कटघरे में लाया जा सकता है। डॉ. कुलवंत की गिरफ्तारी न केवल छिंदवाड़ा पुलिस की कड़ी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह उन पीड़ितों के लिए भी राहत का संदेश है जो न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे।
