उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य और औषधि सुरक्षा की दिशा में बड़ी कार्रवाई की गई है। कफ सिरप की अवैध तस्करी और करोड़ों रुपये के काले कारोबार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार की सुबह एक व्यापक अभियान चलाया। इस छापेमारी अभियान का मुख्य उद्देश्य तस्करी के नेटवर्क को बेनकाब करना और पूरे मामले में शामिल लोगों को कानून के कटघरे में लाना था।

ईडी की टीम ने लखनऊ, जौनपुर, वाराणसी समेत तीन प्रमुख राज्यों में 25 विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई उस समय शुरू की गई जब जांच से यह स्पष्ट हुआ कि अवैध कारोबार का दायरा केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्यों तक फैला हुआ था। यह मामला स्वास्थ्य सुरक्षा, कानून और अपराध नियंत्रण के दृष्टिकोण से अत्यंत गंभीर माना गया।
कफ सिरप के अवैध कारोबार में शामिल लोगों का नेटवर्क बड़े पैमाने पर चल रहा था। इनके जरिए एक हजार करोड़ से अधिक की रकम का लेन-देन किया गया और यह अवैध मुनाफा विभिन्न चैनलों के माध्यम से अर्जित किया गया। छापेमारी के दौरान पुलिस और ईडी टीम ने संबंधित ठिकानों पर दस्तावेज, बही-खाता, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और संदिग्ध सामान जब्त किया।
इस अभियान से पहले भी उत्तर प्रदेश पुलिस और अन्य एजेंसियों ने कई बार तस्करी रोकने की कोशिश की थी। लेकिन यह नेटवर्क अत्यंत संगठित और जटिल था। ईडी की कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया कि सरकार अवैध दवाओं और उनके व्यापार के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है।
अवैध कफ सिरप की तस्करी का मुख्य केंद्र वाराणसी और लखनऊ था। वाराणसी में कई गोदामों और भंडारण स्थलों में तस्करी का बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। यहां से अवैध दवा पूरे प्रदेश और अन्य राज्यों में सप्लाई की जाती थी। ईडी की टीम ने वाराणसी में विशेष रूप से उन स्थानों पर छापेमारी की, जहां से कफ सिरप की तस्करी होती थी।
लखनऊ में भी अवैध नेटवर्क की कई शाखाएँ सक्रिय थीं। राजधानी में कई स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने बड़े पैमाने पर कागजात, लेन-देन की रिकॉर्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक डेटा जब्त किया। जौनपुर में भी तस्करी के ठिकानों पर छापेमारी की गई और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की गई।
ईडी की इस कार्रवाई से यह साफ हो गया कि अवैध औषधि तस्करी केवल आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह समाज के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी पैदा करती है। कफ सिरप जैसी दवाओं का गलत और अवैध इस्तेमाल लोगों की जान और स्वास्थ्य दोनों के लिए जोखिम बन सकता है। इसीलिए सरकार ने इस मामले को प्राथमिकता दी और बड़े पैमाने पर कार्रवाई की।
इस अभियान के दौरान अधिकारियों ने बताया कि अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए जाएंगे। इसमें भारतीय दंड संहिता, मादक पदार्थ अधिनियम और औषधि नियंत्रण कानून की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जांच के आधार पर जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा और उनके खिलाफ कोर्ट में मामला प्रस्तुत किया जाएगा।
ईडी ने इस कार्रवाई को व्यापक और सुनियोजित बताया। टीम ने छापेमारी के दौरान प्रत्येक स्थल की विस्तार से जांच की और आवश्यक दस्तावेज जब्त किए। इससे अवैध कारोबार का पूरा नेटवर्क उजागर होने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान अन्य राज्यों में चल रहे समान नेटवर्क की भी जांच की नींव रखेगा।
इस कार्रवाई का असर समाज में भी दिख रहा है। लोग स्वास्थ्य सुरक्षा और दवा अवैध व्यापार के खतरों के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं। सरकार और ईडी की कार्रवाई से यह संदेश गया कि किसी भी तरह की अवैध दवा तस्करी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल अवैध कारोबार रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि समाज और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए भी यह आवश्यक कदम है। अवैध दवाओं के उपयोग से लोगों की जान और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसीलिए समय पर की गई ईडी की कार्रवाई अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कुल मिलाकर, कफ सिरप के अवैध कारोबार के मामले में ईडी की यह कार्रवाई न केवल अपराधियों को दंडित करेगी, बल्कि भविष्य में इस प्रकार की अवैध गतिविधियों की रोकथाम में भी सहायक होगी। इस अभियान ने स्पष्ट कर दिया कि कानून का हाथ अब किसी से नहीं झुकेगा और स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
