भारत में निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए कई योजनाएं संचालित की जाती हैं। इन्हीं योजनाओं में से एक है एम्प्लायी पेंशन स्कीम (EPS)। इस योजना के माध्यम से कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आजीवन पेंशन मिलती है। यह सुरक्षा केवल कर्मचारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनकी मृत्यु के बाद उनके परिवार को भी दी जाती है। खासकर ऐसे मामलों में जीवनसाथी और बच्चों को नियमित पेंशन प्राप्त होती है, जिससे परिवार आर्थिक असुरक्षा से बच सके।

वर्तमान समय में देश के लाखों लोग निजी नौकरियां कर रहे हैं, जिनमें से अधिकतर की पेंशन योजना का आधार यही EPS होता है। इस रिपोर्ट में विश्लेषण किया गया है कि कर्मचारी के निधन के बाद पत्नी को कितनी पेंशन मिलती है, किस प्रक्रिया के तहत मिलती है, कब शुरू होती है, और किन परिस्थितियों में परिवार पेंशन को निरंतर प्राप्त करता है। इसके साथ ही इस रिपोर्ट में हाल ही में जारी निर्देश, नई चर्चाएं, संसद में दिए गए जवाब और आने वाले समय में संभावित बदलावों को भी शामिल किया गया है।
EPFO की EPS योजना का आधार और परिवार के अधिकार
एम्प्लायी पेंशन स्कीम 1995 में लागू हुई थी। इसके तहत हर महीने नियोक्ता कर्मचारी की मूल वेतन का कुछ हिस्सा पेंशन फंड में जमा करता है। मौजूदा नियमों के अनुसार कर्मचारी के बुनियादी वेतन और डीए के 12 प्रतिशत में से 8.33 प्रतिशत सीधे EPS खाते में जाता है। यह राशि समय-समय पर बढ़ती रहती है और सेवा की अवधि के आधार पर पेंशन बनती है।
इस योजना में कहा गया है कि यदि कर्मचारी ने कम से कम 10 वर्ष का सक्रिय योगदान किया है, तो उसकी उम्र 58 वर्ष होने पर वह पेंशन का पात्र हो जाता है। वहीं यदि कर्मचारी का निधन 58 वर्ष से पहले हो जाए, तब भी पत्नी या पति को पेंशन मिलती है।
कई बार परिवारों में यह सवाल उठता है कि पेंशन कब से शुरू होती है। इसके स्पष्ट नियम मौजूद हैं कि जैसे ही कर्मचारी की मृत्यु होती है, वही तिथि परिवार पेंशन की पात्रता तिथि मानी जाती है। पत्नी या पति को रिटायरमेंट वर्ष तक प्रतीक्षा नहीं करनी होती।
कर्मचारी की मृत्यु पर मिलने वाली राशि: कितनी पेंशन मिलती है?
वर्तमान नियमों के अनुसार पति या पत्नी को मिलने वाली न्यूनतम मासिक पेंशन 1000 रुपये तय है। लेकिन यह राशि कर्मचारी की योगदान अवधि, पेंशनेबल सैलरी और औसत वेतन पर निर्भर करती है। यह पेंशन जीवनभर जारी रहती है।
यदि कर्मचारी की सेवा अवधि 10 वर्ष से अधिक है और उसकी मृत्यु नौकरी के दौरान हुई है, तो पेंशन राशि अन्य सामान्य मामलों से अधिक होती है। हाल ही में उपलब्ध आंकड़ों में यह भी सामने आता है कि EPS के तहत परिवार पेंशन वितरण बढ़ा है क्योंकि निजी क्षेत्र में नौकरियों की संख्या बढ़ी है।
इसके अलावा EPFO ने 2024-25 के आंकड़ों में बताया कि पिछले वर्षों की तुलना में पति या पत्नी द्वारा पेंशन आवेदन में 21% की वृद्धि दर्ज की गई है।
रिटायरमेंट से पहले मृत्यु के मामलों में नई जानकारी
एक महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि यदि सदस्य ने अधिक पेंशन का विकल्प चुना था, तो मृत्यु के बाद पत्नी को वही उच्च पेंशन प्राप्त होती है। इस नए नियम को EPFO ने 2023 में संशोधित किया था।
इसके लिए यह आवश्यक है:
पति या पत्नी को फॉर्म 10-D भरना होता है
बैंक खाता आधार से लिंक होना चाहिए
आधार नंबर की सत्यापन प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए
इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद परिजनों के खाते में पेंशन सीधे जमा होती है।
पति या पत्नी की मृत्यु के बाद आगे की पात्रता
यदि जीवनसाथी की मृत्यु हो जाए, तब पेंशन का अधिकार बच्चों को स्थानांतरित हो जाता है। यदि दो बच्चे हैं तो दोनों को कुल पेंशन का समान हिस्सा मिलता है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहती है जब तक बच्चे 25 वर्ष की आयु तक नहीं पहुंच जाते।
यदि बच्चे दिव्यांग हों, तो इस स्थिति में पेंशन आजीवन जारी रहती है।
रिटायरमेंट के बाद बढ़ेगी पेंशन? संसद में जवाब
हाल ही में शीतकालीन सत्र में संसद में सवाल उठाया गया कि क्या EPS-95 योजना की न्यूनतम पेंशन 1000 से बढ़ाई जाएगी। मंत्री द्वारा दिया गया जवाब यह था:
“इस समय न्यूनतम पेंशन बढ़ाने पर विचार नहीं किया जा रहा है।”
हालांकि वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि 2026-27 तक पेंशन राशि में वृद्धि की संभावना है क्योंकि महंगाई सूचकांक तेजी से बढ़ रहा है।
EPFO के नए डिजिटल बदलाव
2025-26 से EPFO पेंशन से जुड़े सभी आवेदन डिजिटल रूप में स्वीकार कर रहा है।
ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा दी गई है
रियल-टाइम स्टेटस अपडेट
Aadhaar आधारित पहचान
इसके परिणामस्वरूप आवेदन प्रसंस्करण समय अब 42 दिन से घटकर औसत 9 दिन रह गया है।
