पाकिस्तान की शक्ति संरचना और सियासी उथल-पुथल के लंबे इतिहास में ऐसा बहुत कम हुआ है कि सैन्य व्यवस्था के सर्वोच्च पदों पर रहे अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से सजा मिली हो। मगर दिसंबर 2025 की यह घटना आधुनिक पाकिस्तान के इतिहास को हमेशा के लिए बदल देने वाली है। पाकिस्तान की सबसे शक्तिशाली और गुप्त संस्था मानी जाने वाली इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस यानी ISI के पूर्व महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) फैज हमीद को फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल ने 14 साल की कड़ी कैद की सजा सुनाई है। यह फैसला न सिर्फ पाकिस्तान की सैन्य राजनीति का चरित्र उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सत्ता के लिए चल रहा आंतरिक संघर्ष किस हद तक पहुँच चुका है।

फैज हमीद को यह सजा ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के उल्लंघन, सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग, राजनीतिक षडयंत्रों में सीधे शामिल होने और संवेदनशील सूचनाओं की गलत तरीके से हैंडलिंग जैसे आरोपों के आधार पर दी गई है। यह पहली बार है जब पाकिस्तान के इतिहास में एक ऐसे सैन्य अधिकारी को, जिसने देश की सबसे प्रमुख खुफिया एजेंसी का नेतृत्व किया हो, अदालत द्वारा इतनी कठोर कैद दी गई हो।
असीम मुनीर, जो वर्तमान में पाक सेना के मुखिया हैं, और जिनके साथ फैज हमीद के रिश्ते पहले से ही विवादों का केंद्र रहे हैं, अब इस फैसले के बाद अधिक शक्तिशाली दिखाई देते हैं। पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम को राज्य के भीतर सत्ता संतुलन बदलने का संकेत मान रहे हैं।
फैज हमीद का rise and fall: सत्ता का हरिगीत प्रवाह
फैज हमीद का नाम पाकिस्तान में पहली बार तब बहुत चर्चित हुआ जब वर्ष 2021 में अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा हुआ और वे एक चर्चित होटल में अफगान नेताओं के साथ चाय पीते दिखाई दिए। यह तस्वीर कुछ ही मिनटों में अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गई और दुनिया को पहली बार यह अहसास हुआ कि पाकिस्तान के भीतर बैठा एक जनरल अफगानिस्तान के घटनाक्रम का कितना बड़ा प्रभावक है।
फैज हमीद न सिर्फ DG ISI रहे, बल्कि पेशावर कॉर्प्स कमांडर जैसे महत्वपूर्ण पद पर भी तैनात रहे। पाकिस्तान में कॉर्प्स कमांडर्स को अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से सेना की जमीनी रणनीति और राजनीतिक हस्तक्षेप आगे बढ़ते हैं।
इमरान खान की सरकार के दौरान फैज हमीद को उनका सबसे करीबी सैन्य साथी माना जाता था। कई राजनीतिक विश्लेषकों का तो यह भी मानना था कि इमरान खान की सत्ता का बहुत बड़ा आधार फैज हमीद की रणनीतिक मदद थी। लेकिन पाकिस्तान की राजनीति में कभी भी स्थायी दोस्ती या दुश्मनी नहीं होती। समय के साथ हालात बदलते गए और फैज हमीद की शक्ति इतनी तेजी से बढ़ने लगी कि सेना के भीतर ही उनसे दूरी बनाई जाने लगी।
अगले कुछ महीनों में परिस्थितियाँ इस तरह बदलीं कि वही जनरल, जो कभी पाकिस्तान की सत्ता का निर्णायक केंद्र थे, अब उसी शक्ति संरचना के निशाने पर आ गए, जिसकी रक्षा में उन्होंने दशकों की सेवा दी थी।
फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया: 15 महीने का लंबा मुकदमा
पाकिस्तान सेना की मीडिया विंग ISPR ने जो बयान जारी किया, उसके अनुसार फैज हमीद के खिलाफ कार्यवाही अगस्त 2024 में शुरू की गई थी। यह मुकदमा 15 महीनों तक चला और देश के सबसे सख्त सैन्य कानूनों के तहत संचालित हुआ।
इस प्रक्रिया में फैज को अपनी पसंद की कानूनी टीम चुनने का पूरा अधिकार दिया गया। मुकदमे के दौरान साक्ष्य एकत्र किए गए, गवाह प्रस्तुत हुए और हर चरण गोपनीय तरीके से सेना के आंतरिक ढांचे में पूरा हुआ। पाकिस्तान के आम नागरिकों को इस मुकदमे की बारीक जानकारियाँ नहीं दी गईं, क्योंकि उसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया गया था।
लेकिन मुकदमे के भीतर क्या-क्या हुआ, इसका अंदाजा सेना के बयान से लगाया जा सकता है। सेना ने साफ कहा कि फैज हमीद को सभी आरोपों में दोषी पाया गया और कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा पालन किया गया। अदालत ने 11 दिसंबर 2025 से ही उनकी सजा लागू कर दी।
सजा के चार बड़े आधार: एक अधिकारी, चार गंभीर आरोप
फैज हमीद के खिलाफ चार प्रमुख प्रकार के आरोप लगाए गए, जो पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था में सबसे गंभीर माने जाते हैं।
पहला, राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल होना। पाकिस्तान के सैन्य नियमों के अनुसार, कोई भी अधिकारी सीधे या परोक्ष रूप से राजनीतिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। लेकिन फैज पर आरोप था कि वे कई राजनीतिक दलों और नेताओं के साथ गुप्त स्तर पर गठजोड़ करते रहे।
दूसरा आरोप था ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का उल्लंघन। यह कानून पाकिस्तान में अत्यंत कठोर है और इसके तहत संवेदनशील दस्तावेजों या सूचनाओं की गलत हैंडलिंग को देशद्रोह की श्रेणी में देखा जाता है।
तीसरा आरोप था सरकारी अधिकारों और संसाधनों का दुरुपयोग। कहा गया कि उन्होंने अपने पद का उपयोग उन कार्यों के लिए किया जो कानून के विरुद्ध थे।
चौथा और सबसे गंभीर आरोप यह था कि उन्होंने कुछ व्यक्तियों को अनुचित तरीके से नुकसान पहुँचाया, जिसके कारण देश की सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ा।
इन सभी आरोपों को मिलाकर अदालत ने 14 साल की कड़ी कैद की सजा का ऐलान किया।
क्या फैज हमीद आगे अपील करेंगे
फैज हमीद को पाकिस्तान के सैन्य ढांचे के अनुसार अपील का अधिकार दिया गया है। वे सैन्य अपीलेट कोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट और अंततः राष्ट्रपति से दया याचिका भी कर सकते हैं।
लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके लिए राहत पाना बेहद कठिन है, क्योंकि असीम मुनीर और शहबाज शरीफ सरकार दोनों ही उनके खिलाफ कड़े रुख में हैं।
आगे और भी मुसीबतें संभव
ISPR ने संकेत दिया है कि फैज हमीद पर राजनीतिक अशांति फैलाने और कई राजनीतिक समूहों के साथ गुप्त सांठगांठ करने की जांच भी चल रही है। ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले महीनों में उन पर और भी आरोप तय किए जा सकते हैं, जिनमें सख्त सजा की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के भीतर यह फैसला एक तरह से सत्ता के पुनर्गठन का हिस्सा है। यह उस व्यवस्था का संकेत है जिसमें पाकिस्तान की सेना अब अपनी आंतरिक सफाई कर रही है और उन अधिकारियों को खत्म कर रही है, जिन्होंने पिछले वर्षों में सेना की राजनीति में अत्यधिक दखल दी।
पाकिस्तान की राजनीति और सेना का बदलता समीकरण
फैज हमीद पर हुई कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति पर की गई कानूनी कार्रवाई नहीं है। इसके पीछे पाकिस्तान की राजनीति और सेना के रिश्तों का लंबा इतिहास है। पाकिस्तान में सेना को हमेशा एक शक्तिशाली संस्था माना गया है, जो देश की राजनीतिक दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सेना के भीतर यह चर्चा बढ़ती गई कि कुछ जनरल अत्यधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं और उनका प्रभाव राजनीतिक व्यवस्था को हिला रहा है।
यह भी कहा जाता रहा कि सेना के भीतर दो बड़े खेमे बन गए हैं। एक वह, जिसके केंद्र में असीम मुनीर जैसे अधिकारी हैं, जो सेना को राजनीतिक दखल से दूर रखना चाहते हैं। दूसरा वह, जिसमें फैज हमीद जैसे अधिकारी माने जाते थे, जिन्हें पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय प्रभाव बनाने के लिए जाना जाता था।
इस सजा को दोनों खेमों के संघर्ष में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
