भारत में डिजिटल बैंकिंग के क्षेत्र में पिछले एक दशक में बड़े बदलाव आए हैं। फिनटेक आधारित सेवाओं ने ग्राहकों के लिए आसान बैंकिंग की राह बनाई है, जिसमें पेमेंट्स बैंक मॉडल एक महत्वपूर्ण प्रयोग रहा। अब इसी प्रयोग के केंद्र में रहे फिनो पेमेंट्स बैंक के लिए अंततः बड़ा मोड़ आ गया है। बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से स्मॉल फाइनेंस बैंक में बदलने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। यह बदलाव न सिर्फ बैंक के व्यावसायिक मॉडल में बड़ा परिवर्तन लाएगा बल्कि देश के वित्तीय समावेशन मॉडल में भी एक नया अध्याय जोड़ेगा।

मंजूरी की घोषणा
5 दिसंबर 2025 को वित्तीय क्षेत्र में यह खबर आई कि फिनो पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को RBI ने स्मॉल फाइनेंस बैंक लाइसेंस का प्रिंसिपल अप्रूवल प्रदान कर दिया है। यह लाइसेंस मिलने के बाद बैंक को अधिक व्यापक वित्तीय सेवाओं की अनुमति होगी। इस घोषणा के बाद बाजार में उम्मीदें बढ़ीं कि कंपनी के शेयरों में तेजी आने की संभावना है।
बैंकिंग मॉडल में बड़ा बदलाव
फिनो पेमेंट्स बैंक 2017 में लॉन्च हुआ था। कंपनी मुख्य रूप से ग्रामीण और सेमी-अर्बन क्षेत्रों में ग्राहकों तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाने पर केंद्रित रही। पेमेंट्स बैंक होने के कारण इसकी कार्यप्रणाली सीमित थी और बैंकिंग नियमन के अनुसार इसे दो महत्वपूर्ण प्रतिबंधों का पालन करना पड़ता था। पहला, बैंक स्वयं अपने ग्राहकों को ऋण नहीं दे सकता था। दूसरा, बैंक किसी ग्राहक से अधिकतम 2 लाख रुपये तक ही डिपॉजिट रख सकता था।
इन सीमाओं के कारण बैंक को अपनी आय का मुख्य स्रोत थर्ड पार्टी वित्तीय प्रोडक्ट, डिजिटल पेमेंट कमीशन और ट्रांजैक्शन आधारित बिजनेस मॉडल को बनाना पड़ा। बैंक ने बड़े पैमाने पर माइक्रो मर्चेंट नेटवर्क बनाया, जिससे घरेलू स्तर पर छोटे दुकानदार भी बैंकिंग सेवा का माध्यम बने।
अब क्या मिलेगा बैंक को
स्मॉल फाइनेंस बैंक बनने के बाद फिनो के पास निम्न लाभ उपलब्ध होंगे।
- अपने प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को सीधे लोन देने की सुविधा
- डिपॉजिट कैप हटने के बाद अधिक आकर्षक अकाउंट मॉडल
- एमएसएमई, कृषि उत्पादक, छोटे दुकानदारों और स्वयं रोजगार वर्ग के लिए नए लेंडिंग प्रोडक्ट
- ग्रामीण और कम बैंकिंग वाले क्षेत्रों में वित्तीय विस्तार
- CASA आधारित बिजनेस बढ़ने का अवसर
- माइक्रो क्रेडिट आधारित पोर्टफोलियो तैयार करने का मौका
इन बदलावों के बाद बैंक के परिचालन ढांचे में संरचनात्मक सुधार की संभावना बढ़ेगी, जिससे लंबे समय में लाभ बढ़ने की संभावना है।
वित्तीय प्रदर्शन और चुनौतियां
2024 से 2025 के बीच फिनो बैंक के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। दूसरी तिमाही में बैंक के मुनाफे में 27 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि, इसी अवधि में बैंक की नेट इंट्रेस्ट इनकम 43 प्रतिशत के आसपास बढ़ी है। इससे संकेत मिला कि बैंक का परिचालन मॉडल मजबूत हो रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार बैंक की कोर सर्विस कंट्रीब्यूशन में वृद्धि यह बताती है कि बैंक अभी भी एक मजबूत रेवेन्यू कैश फ्लो बनाने की दिशा में काम कर रहा है। स्मॉल फाइनेंस बैंक बनने के बाद यह स्थितियां और मजबूत होंगी क्योंकि सीधे लोन देने से ब्याज आय बढ़ेगी।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 12 महीनों में बैंक को नई लीगल और टेक्निकल आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। इसके बाद ही बैंक पूरी तरह SFB मॉडल में संचालन करेगा।
बैंक का लक्ष्य और रणनीति
फिनो बैंक शुरू से विशिष्ट जनसंख्या पर केंद्रित रहा है। ग्रामीण महिलाएं, नई श्रेणी में आने वाले कार्यरत लोग, छोटे दुकानदार, सेवा आधारित व्यवसायियों आदि तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना बैंक का मुख्य लक्ष्य रहा है। कंपनी अपने एजेंट नेटवर्क को इस रूप में प्रस्तुत करती रही है कि यह देश के सबसे बड़े और सक्रिय बैंकिंग नेटवर्क में से एक है।
नई अनुमति मिलने के बाद फिनो बैंक की रणनीति कुछ प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित होगी।
नई लेंडिंग स्कीम
कंपनी तीन नए ऑफर के रूप में छोटे लोन लॉन्च करने की तैयारी में है। इनमें शामिल हैं
- 50000 रुपये से कम के छोटे लोन
- स्वयंरोज़गार करने वालों के लिए माइक्रो क्रेडिट
- एमएसएमई आधारित सिक्योर्ड लोन
इसका प्रमुख उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है जिनके पास नियमित आय है लेकिन क्रेडिट स्कोर या दस्तावेज़ीकरण के कारण सामान्य बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच नहीं बना पा रहे।
कहाँ तक पहुंचा भारत का SFB मॉडल
फिनो बैंक को मिली मंजूरी के बाद भारत में कुल 12 बैंक स्मॉल फाइनेंस बैंक की श्रेणी में शामिल हो जाएंगे। यह सूची देश के वित्तीय समावेशन मॉडल को मजबूत करती है। पहले से मौजूद बैंक, जैसे कि AU SFB, उत्कर्ष, सुर्योदय, इक्विटास, उज्जीवन आदि ने अपने-अपने क्षेत्रों में मजबूत निवेश स्थापना की है।
फिनो बैंक इस श्रेणी में सबसे अलग इस कारण होगा क्योंकि यह पहला ऐसा संस्थान है जो पेमेंट्स बैंक मॉडल से विकसित होकर SFB मॉडल की तरफ बढ़ रहा है।
अगले महीनों में कंपनी को किन प्रक्रियाओं से गुजरना होगा
अगली तिमाहियों में बैंक को RBI की शर्तों पर आधारित अनुपालन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस प्रक्रिया में
- टेक्निकल माइग्रेशन
- कंप्लायंस अपग्रेड
- नेटवर्थ रेशियो
- एटीएम नेटवर्क सुदृढ़ीकरण
- कैश डिस्पेंसिंग क्षमता का विस्तार
- जमा सीमा में विस्तार की तैयारी
- लोन मैनेजमेंट संरचना विकसित करना
शामिल होगा।
निष्कर्ष
फिनो पेमेंट्स बैंक का स्मॉल फाइनेंस बैंक की ओर बढ़ना केवल कंपनी की आंतरिक उन्नति नहीं है, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण भारत में बैंकिंग पहुंच और मजबूत होगी। वित्तीय समावेशन को भारत का आर्थिक मॉडल मानने वाले विशेषज्ञ इस घटना को महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं। आने वाले वर्ष में बैंक का प्रदर्शन इस बदलाव को सार्थक साबित करेगा या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।
