घर बनाना भारत में हमेशा से समय, धैर्य और पूंजी की सबसे बड़ी परीक्षा माना गया है। ईंट, सीमेंट, रेत, मजदूर, ठेकेदार और महीनों तक चलने वाला काम आम आदमी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता। कई बार तो घर बनने में सालों लग जाते हैं और लागत अनुमान से कहीं ज़्यादा बढ़ जाती है। ऐसे माहौल में अगर कोई यह दावा करे कि वह महज़ कुछ घंटों में एक पूरा घर बनाकर तैयार कर सकता है, तो पहली प्रतिक्रिया अविश्वास की ही होती है। लेकिन जब यही दावा देश के सबसे बड़े बिजनेस रियलिटी शो के मंच पर किया जाए और वहां बैठे निवेशक भी उस पर भरोसा जता दें, तो यह कहानी सिर्फ एक पिच नहीं रह जाती, बल्कि भविष्य की झलक बन जाती है।

शार्क टैंक के मंच पर भविष्य का घर
Shark Tank India के पांचवें सीजन में एक ऐसा स्टार्टअप सामने आया, जिसने निर्माण उद्योग की परंपरागत सोच को हिला कर रख दिया। मंच पर पहुंचे फाउंडर ने आत्मविश्वास के साथ कहा कि उनकी कंपनी चार घंटे में पूरी तरह असेंबल्ड और रहने लायक घर तैयार कर सकती है। यह सुनते ही निवेशकों की उत्सुकता बढ़ गई। बातचीत आगे बढ़ी तो यह साफ हुआ कि यह कोई कागज़ी दावा नहीं, बल्कि जमीन पर उतर चुका मॉडल है।
इस स्टार्टअप का नाम Uprear Build है, जिसकी शुरुआत अक्टूबर 2022 में सूरत के श्रीकांत शाह ने की थी। कंपनी खुद को एक प्रीमियम मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन स्टार्टअप के रूप में पेश करती है, जहां घर उसी तरह फैक्ट्री में तैयार किए जाते हैं, जैसे किसी ऑटोमोबाइल प्लांट में गाड़ियां बनती हैं।
फैक्ट्री में बनता घर, साइट पर होता है चमत्कार
Uprear Build का मॉडल पारंपरिक निर्माण से पूरी तरह अलग है। यहां घर का बड़ा हिस्सा फैक्ट्री में सेमी-ऑटोमेटिक मशीनों की मदद से तैयार किया जाता है। इन मॉड्यूल्स को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि उन्हें फोल्ड किया जा सके और ट्रक के जरिए किसी भी लोकेशन पर भेजा जा सके। साइट पर पहुंचते ही इन्हें खोलकर कुछ ही घंटों में इंस्टॉल कर दिया जाता है।
फाउंडर के मुताबिक, यह प्रक्रिया न केवल समय बचाती है, बल्कि लेबर कॉस्ट, वेस्टेज और मौसम से जुड़ी परेशानियों को भी काफी हद तक खत्म कर देती है। इन घरों में इस्तेमाल होने वाला स्ट्रक्चर खास किस्म के गैल्वनाइज्ड स्टील और एल्युमिनियम मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो इन्हें हल्का होने के बावजूद बेहद मजबूत बनाता है।
एक घंटे में खड़ा घर और जजों की प्रतिक्रिया
पिच के दौरान फाउंडर ने सिर्फ शब्दों में ही नहीं, बल्कि लाइव उदाहरण के जरिए भी अपने दावे को साबित किया। सभी निवेशकों को स्टूडियो के बाहर ले जाया गया, जहां करीब 330 स्क्वायर फुट का एक पूरा घर खड़ा था। यह घर सिर्फ एक घंटे में तैयार किया गया था। निवेशकों ने उस घर के अंदर जाकर हर कोना देखा, दीवारों, छत और फिनिशिंग को परखा और निर्माण गुणवत्ता की खुलकर तारीफ की।
यह पल निर्णायक साबित हुआ। जिस आइडिया पर शुरुआत में हैरानी थी, वही कुछ ही देर में भरोसे में बदल गया।
फाउंडर श्रीकांत शाह की शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा
Uprear Build के पीछे खड़े श्रीकांत शाह की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। उन्होंने अपनी स्कूलिंग सूरत के सेंट जेवियर्स से की। इसके बाद अहमदाबाद की निरमा यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा के लिए वह अमेरिका गए और वहां Purdue University से सिविल इंजीनियरिंग में मास्टर्स किया।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अमेरिका में एक ऐसी कंपनी में काम किया, जो मॉड्यूलर और प्रीफैब्रिकेटेड कंस्ट्रक्शन पर काम करती थी। वहीं से उन्हें यह समझ मिली कि भविष्य का निर्माण तेज़, स्मार्ट और फैक्ट्री-मेड होगा। इसी अनुभव को भारत में लागू करने के इरादे से उन्होंने Uprear Build की नींव रखी।
पारंपरिक घर से थोड़ा महंगा, लेकिन कहीं ज़्यादा तेज़
फाउंडर ने खुलकर यह भी स्वीकार किया कि उनका मॉड्यूलर घर पारंपरिक घरों की तुलना में करीब 15 प्रतिशत महंगा पड़ता है। लेकिन इसके साथ उन्होंने यह भी जोड़ा कि समय की बचत, कम लेबर, कम मेंटेनेंस और तेजी से उपयोग में आने की वजह से यह लागत काफी हद तक संतुलित हो जाती है।
इन घरों की औसत उम्र करीब 30 साल बताई गई है, जबकि पारंपरिक घरों की उम्र लगभग 40 साल मानी जाती है। हालांकि, जिस तेजी से जरूरत बदल रही है, वहां लंबे निर्माण समय की तुलना में तेज़ समाधान ज़्यादा महत्वपूर्ण होता जा रहा है।
सरकारी प्रोजेक्ट्स से आती है बड़ी कमाई
Uprear Build का बिजनेस मॉडल सिर्फ निजी ग्राहकों तक सीमित नहीं है। कंपनी के करीब 70 प्रतिशत रेवेन्यू सरकारी प्रोजेक्ट्स से आता है। खासतौर पर आंगनबाड़ी सेंटर, हेल्थकेयर यूनिट्स, स्कूल, अस्थायी अस्पताल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के निर्माण में इन मॉड्यूलर स्ट्रक्चर्स का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है।
इसके अलावा कंपनी प्राइवेट रिसॉर्ट्स, रेस्टोरेंट्स और कमर्शियल स्पेस के लिए भी अपने प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराती है।
तेजी से बढ़ती कमाई और प्रॉफिटेबल मॉडल
कंपनी की वित्तीय यात्रा भी निवेशकों को आकर्षित करने वाली रही। वित्त वर्ष 2022-23 में कंपनी ने 1.5 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की। इसके अगले साल 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 5.2 करोड़ रुपये हो गया। फिर 2024-25 में बिक्री 6.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
अब 2025-26 में कंपनी का लक्ष्य 25 करोड़ रुपये की बिक्री हासिल करना है। सबसे अहम बात यह है कि कंपनी अभी प्रॉफिटेबल है, जो शुरुआती स्टेज के किसी भी स्टार्टअप के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
निवेश की बातचीत और कुणाल बहल का भरोसा
पिच के दौरान फाउंडर ने 2.5 प्रतिशत इक्विटी के बदले 2 करोड़ रुपये की फंडिंग की मांग रखी। यह फंडिंग उस बड़े राउंड का हिस्सा थी, जिसके तहत कुल 9 करोड़ रुपये जुटाने की योजना थी। बातचीत आगे बढ़ी तो कुछ निवेशक इस डील से बाहर हो गए, लेकिन अनुपम और कुणाल बहल ने दिलचस्पी दिखाई।
काफी नेगोसिएशन के बाद सौदा कुणाल बहल के साथ तय हुआ। उन्होंने 2 प्रतिशत इक्विटी के बदले 1 करोड़ रुपये का निवेश किया और साथ ही 1 करोड़ रुपये का कर्ज तीन साल के लिए 10 प्रतिशत ब्याज दर पर देने पर सहमति जताई।
कुणाल बहल ने यहां तक कह दिया कि वह इस कंपनी को आने वाले 5 से 8 साल में पब्लिक होते हुए देख सकते हैं और NSE में इसकी लिस्टिंग की घंटी बजने की कल्पना कर सकते हैं।
कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के लिए क्या मायने रखता है यह मॉडल
Uprear Build की सफलता सिर्फ एक स्टार्टअप की कहानी नहीं है। यह भारत की कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में आ रहे बदलाव का संकेत है। शहरीकरण, तेजी से बढ़ती आबादी, आपदा प्रबंधन और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को देखते हुए तेज़ और टिकाऊ निर्माण की मांग लगातार बढ़ रही है।
मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन इस जरूरत का व्यावहारिक समाधान बनकर उभर रहा है। फैक्ट्री में नियंत्रित माहौल में तैयार होने वाले स्ट्रक्चर न केवल गुणवत्ता में बेहतर होते हैं, बल्कि समय और लागत दोनों को संतुलित रखते हैं।
भविष्य की झलक
Shark Tank India के मंच पर Uprear Build ने सिर्फ निवेश हासिल नहीं किया, बल्कि यह दिखा दिया कि भारत में भी वैश्विक स्तर की कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी विकसित हो सकती है। अगर इस मॉडल को सही समर्थन, नीति और स्केल मिलती है, तो आने वाले वर्षों में घर बनाना वैसा ही आसान हो सकता है, जैसा आज फर्नीचर खरीदना।
