इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक उथल-पुथल शुरू हो चुकी है, दुनिया तेज़ी से बदलते वैश्विक वित्तीय माहौल में कदम रख चुकी है। प्रसिद्ध लेखक और वित्तीय विचारक रॉबर्ट कियोसाकी ने चेतावनी देते हुए कहा कि दुनिया उस चरण में प्रवेश कर चुकी है जिसे आने वाले वर्षों में मानव इतिहास का सबसे गहरा, सबसे दीर्घकालिक और सबसे दर्दनाक आर्थिक संकट कहा जा सकता है।

रॉबर्ट कियोसाकी, जिन्होंने वर्षों पहले अपनी पुस्तक रिच डैड पुअर डैड के माध्यम से करोड़ों पाठकों को वित्तीय स्वतंत्रता, निवेश दर्शन और आर्थिक चिंतन की नई दृष्टि दी, आज फिर दुनिया को सावधान कर रहे हैं। उनकी ताजा चेतावनी बेहद तीखी और सीधी है। उनका दावा है कि जापान के तीन दशक पुराने कैरी ट्रेड बबल के फूटते ही वह सिलसिला शुरू हो गया है जो आने वाले महीनों और वर्षों में पूरे ग्रह की आर्थिक संरचना को बदल देगा।
कियोसाकी का कहना है कि यह एक सामान्य बाजार गिरावट नहीं है। यह एक ऐसा झटका है जिसके प्रभाव रियल एस्टेट, स्टॉक्स, बॉन्ड्स, कमोडिटीज, क्रिप्टो, बिजनेस एसेट्स, रोजगार, आय के स्रोत और यहां तक कि आम लोगों की बचत और जीवनशैली तक में दिखाई देंगे। वह लिखते हैं कि दुनिया एक ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है जहां पुराने वित्तीय मॉडल टिक नहीं पाएंगे।
जापान का कैरी ट्रेड कैसे बना दुनिया की अर्थव्यवस्था का गुप्त इंजन
करीब तीस वर्षों तक जापान का सस्ते ब्याज पर लोन देने का मॉडल यानी कैरी ट्रेड दुनिया की अर्थव्यवस्था का अघोषित ईंधन बना रहा। निवेशक जापानी येन में बेहद कम ब्याज दर पर ऋण लेते और उस पैसे को वैश्विक बाजारों में लगा देते। इससे दुनिया भर में एसेट प्राइस को लगातार बढ़ावा मिला। किसी को भी यह एहसास नहीं हुआ कि बाजारों में तेजी का एक बड़ा हिस्सा जापान की नीतियों पर टिका हुआ है।
कियोसाकी बताते हैं कि जैसे ही जापान ने कैरी ट्रेड समाप्त किया, वैसे ही वैश्विक निवेशकों पर भारी दबाव बन गया। अचानक लिक्विडिटी कम होने लगी, बाजारों में धन का प्रवाह धीमा हो गया और दुनिया के बड़े एसेट्स पर दबाव बढ़ने लगा। यह वही क्षण था जिसे वे आने वाले आर्थिक चक्र के नए युग की शुरुआत कहते हैं।
क्यों यह क्रैश साधारण गिरावट नहीं
कियोसाकी का दावा है कि इस बार होने वाला संकट सिर्फ एक सेक्टर में सिमटा नहीं रहेगा। यह सिर्फ निवेशकों को परेशान नहीं करेगा, बल्कि यह जीवन के हर हिस्से में उतर आएगा।
उन्होंने चेतावनी दी कि बाजारों की गिरावट के साथ रोजगार का संकट भी तेजी से बढ़ेगा। दुनिया में पहले ही AI का विस्तार तेजी से हो रहा है और लाखों नौकरियां मशीनों द्वारा निगल ली जाएंगी। ऐसे समय में, जब तकनीक मानव श्रम की जगह ले रही है और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था खुद को नए रूप में ढाल रही है, यह संकट और भी चुनौतीपूर्ण बन जाएगा।
कियोसाकी कहते हैं कि यह वह स्थिति है जहां असावधान और अप्रस्तुत लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में बेरोजगारी तेजी से बढ़ेगी, आय के स्रोत सिकुड़ेंगे और कई लोग आर्थिक रूप से टूट जाएंगे। उनकी चेतावनी में एक स्पष्ट संदेश छिपा है कि जो लोग अपने कौशल को नहीं बढ़ाएंगे, जो बदलाव को नहीं समझेंगे और जो पुराने पैटर्न में अटके रहेंगे, वे सबसे पहली चोट झेलेंगे।
एसेट बबल में पिन लग चुकी है
कियोसाकी ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि दुनिया के एसेट बबल में पिन लग चुकी है। रियल एस्टेट, स्टॉक्स, क्रिप्टो, कमोडिटी और यहां तक कि बॉन्ड मार्केट भी इस दबाव से बच नहीं पाएगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह संकट धीरे-धीरे गहराता जाएगा और आने वाला समय बाजारों के लिए बेहद मुश्किल बन सकता है।
इस संकट में कौन सुरक्षित रहेगा
कियोसाकी सालों से तीन एसेट्स पर भरोसा जताते आए हैं: गोल्ड, सिल्वर और बिटकॉइन। उनका मानना है कि किसी भी वैश्विक संकट के समय ये एसेट्स लोगों को गिरावट से सुरक्षा देते हैं।
उनका तर्क है कि जब मुद्राएं कमजोर पड़ती हैं, जब बाजारों में भरोसा टूटता है, तब लोग ठोस और भरोसेमंद एसेट्स की तरफ भागते हैं।
कियोसाकी का खुद का निवेश मॉडल
अपने बयान में कियोसाकी ने बताया कि वह खुद इस संकट से बचने के लिए और अधिक संपन्न बनने के लिए किस रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे एनर्जी सेक्टर में निवेश कर रहे हैं। तेल और प्राकृतिक गैस को वे आने वाले वर्षों के सबसे मजबूत सेक्टरों में मानते हैं।
इसके अलावा वे प्राइवेट इक्विटी के जरिए ऊर्जा कंपनियों में हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। उन्होंने यह भी माना कि हर व्यक्ति प्राइवेट इक्विटी में नहीं जा सकता, लेकिन म्यूचुअल फंड और ETF के माध्यम से वही काम किया जा सकता है।
AI क्यों सबसे बड़ा खतरा बन रहा है
कियोसाकी ने AI को आने वाले आर्थिक संकट की दूसरी सबसे बड़ी वजह बताया। उनका कहना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता उन नौकरियों को भी खत्म कर देगी जिन्हें कभी अटूट माना जाता था। इससे लाखों लोगों की आय पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। नौकरी खोने, आय कम होने और करियर अनिश्चित होने के कारण लोग आर्थिक रूप से और कमजोर हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जो लोग सीखते रहेंगे, नए कौशल अपनाएंगे और समय के साथ अपने करियर को बदलने में सक्षम होंगे, वे इस संकट का सामना कर पाएंगे। लेकिन जो लोग खुद को अपडेट नहीं करेंगे, वे सबसे अधिक प्रभावित होंगे।
कौन-कौन लोग सबसे ज्यादा संकट में आएंगे
कियोसाकी का कहना है कि वे लोग सबसे ज्यादा नुकसान झेलेंगे जो केवल सैलरी पर निर्भर हैं, जिनके पास कोई वैकल्पिक आय नहीं है, जिनके पास बचत नहीं है और जिन्होंने कभी निवेश करना नहीं सीखा।
वे यह भी कहते हैं कि जो लोग बाजार पर आंख बंद करके भरोसा कर रहे थे, उन्हें यह स्थिति सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी।
संकट में भी अवसर छिपे होते हैं
कियोसाकी लिखते हैं कि हर संकट में अवसर छुपे होते हैं। जो लोग डरकर बैठ जाते हैं, वे हमेशा नुकसान उठाते हैं। लेकिन जो लोग समझदारी से फैसले लेते हैं, सीखते हैं और बाजार के उतार-चढ़ाव को अवसर में बदलते हैं, वे इस समय में भी अमीर बन सकते हैं।
निष्कर्ष
यह संकट केवल एक आर्थिक घटना नहीं है, बल्कि एक विश्वव्यापी बदलाव है। यह हमें हमारी कौशल, निवेश समझ, मानसिक दृढ़ता और भविष्य की तैयारी का परीक्षण देगा। कियोसाकी की चेतावनी एक अलार्म की तरह है, जो हमें सतर्क करने के लिए है।
वह कहते हैं कि संकट आया है और यह आगे और बढ़ेगा। लोगों को चाहिए कि वे समझदारी से निवेश करें, जोखिम भरे फैसलों से बचें, अपने कौशल को मजबूत करें और उन अवसरों को पहचानें जो इस कठिन समय में भी छिपे हुए हैं।
